
सूरज सिंह
सूरज सिंह पिछले 13 वर्षों से लगातार निष्पक्ष पत्रिका और खबरों की गहरी समझ रखते हैं. वे सामाजिक, राजनीतिक और जनहित के साथ क्राइम की खबर निष्पक्ष और तथ्यपूर्ण लेखन के लिए पहचाने जाते हैं. उनकी खासियत यह है कि वे बिना किसी दबाव या पक्षपात के खबरों को दो अलग-अलग दृष्टिकोणों से प्रस्तुत करते हैं, उन्होने पत्रकारिता के दौरान कई चर्चित और प्रभावशाली खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया. वह चाहे बिकरूकांड हो या उनकी दूसरी चर्चित कहानी “मुंबई–कुंद्रा कानपुर कनेक्शन" जिसने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया.
इसके अलावा “कानपुर आतंकी कनेक्शन समय" और सुरक्षा एजेंसी का अलर्ट ” जैसी खबरों को भी उन्होंने गहराई और तथ्यों के साथ सामने रखा. उनकी रिपोर्टिंग शैली निष्पक्ष, निर्भीक और खोजी मानी जाती थी. उस दौर में कानपुर के पत्रकार जगत में उनकी खबरों से काफी हलचल रहती थी, और कई मुद्दों पर प्रशासन व समाज दोनों का ध्यान गया.
कानपुर देहात बिकरू कांड की भी गंभीर और विस्तृत कवरेज की. उन्होंने इस मामले को तथ्यों, जांच और निष्पक्ष दृष्टिकोण के साथ पाठकों तक पहुँचाया. उनकी रिपोर्टिंग में घटनाओं के हर पहलू को सामने लाने का प्रयास दिखाई देता था, जिसके कारण खबरों का व्यापक प्रभाव पड़ा और पत्रकारिता जगत में उनकी अलग पहचान बनी.
कानपुर में उस समय उनकी खोजी रिपोर्टिंग और निर्भीक लेखन की काफी चर्चा रहती थी, और कई महत्वपूर्ण मामलों में उनकी खबरों ने जनचर्चा को प्रभावित किया.
कानपुर देहात की दूसरी खबर मैथा तहसील क्षेत्र मे मां-बेटी की दर्दनाक जलकर मौत की घटना को भी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया. उनकी रिपोर्टिंग में केवल घटना का विवरण ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक प्रभावों को भी सामने लाया गया.
इसके अलावा उन्होंने रानियां थाने में हुई कथित कस्टोडियल डेथ और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी प्रभावशाली और निष्पक्ष खबरें लिखीं. उनकी खोजी पत्रकारिता और बेबाक लेखन शैली के कारण कई मामलों में जनचर्चा तेज हुई और प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव बना.
कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनकी खबरों को गंभीरता से पढ़ा जाता था, क्योंकि वे बिना किसी दबाव के तथ्य आधारित पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे.
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