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C-Voter सर्वे: UGC के विवाद से BJP को कितना नुकसान? सर्वे के ये आंकड़े पार्टी को हिला देंगे

यूपी तक

C-Voters सर्वे: यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे लगाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है. सी-वोटर के ताजा सर्वे में खुलासा हुआ है कि 64.9% लोग इन नियमों को सवर्ण विरोधी मान रहे हैं.जबकि 66% को कैंपस में जातिगत हिंसा भड़कने का डर है. सर्वे के अनुसार, 60% जनता का मानना है कि इस विवाद से बीजेपी को आगामी चुनावों में बड़ा सियासी नुकसान हो सकता है.

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Protest against ugc new rule
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C-Voters सर्वे: यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर देश भर में छिड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है.सवर्णों की अनदेखी के आरोपों पर कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को UGC के नए नियमों पर स्टे लगा दिया है. अब 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी और फिर पता चलेगा कि सरकार से जो जवाब मांगा गया है कोर्ट के तरफ से उस जवाब में सरकार ने क्या कुछ कहा है. इस बीच सी-वोटर के ताजा सर्वे ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं. 

क्या सवर्णों के खिलाफ हैं नए नियम?

C-वोटर के लेटेस्ट सर्वे में जनता से सीधा सवाल पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि यूजीसी के नए नियम सवर्णों के खिलाफ हैं? इस सवाल को लेकर  64.9% लोगों ने अपनी सहमति जताई है. इसमें 50% पूरे सहमत और 14.9% थोड़े सहमत हैं. वहीं इस सवाल पर 31.1% लोगों ने अपनी असहमति भी जताई है. ऐसे में यह साफ होता है कि एक बड़ा हिस्सा  यूजीसी के नए नियम को सवर्ण विरोधी मान रहा है.

कैंपस में बढ़ सकती है जातिगत हिंसा

सर्वे में यह भी पूछा गया कि क्या इन नियमों से यूनिवर्सिटी कैंपस में जातिगत तनाव पैदा होगा? 66% लोगों का मानना है कि इन नियमों के कारण छात्रों के बीच दूरियां बढ़ेंगी और कैंपस में जातिगत हिंसा भड़क सकती है. वहीं 31.6% लोग मानते हैं कि इससे कैंपस के माहौल पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान नियमों के स्पष्ट न होने पर सवाल उठाए थे.सी-वोटर के सर्वे में भी यही डर दिखा.65.8% जनता को लगता है कि नए नियमों का दुरुपयोग होगा. मात्र 29.7% लोग मानते हैं कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा.

इक्विटी कमेटी में प्रतिनिधित्व पर सवाल

यूजीसी की प्रस्तावित इक्विटी कमेटी के ड्राफ्ट में सवर्णों के प्रतिनिधित्व पर स्थिति स्पष्ट नहीं है. सर्वे के अनुसार 67.8% लोग चाहते हैं कि इस कमेटी में हर वर्ग (सवर्ण, OBC, SC, ST) का बराबर प्रतिनिधित्व होना चाहिए ताकि फैसला निष्पक्ष हो. 15.3% लोग इसे अनिवार्य नहीं मानते.

बीजेपी को होगा भारी सियासी नुकसान?

सबसे दिलचस्प सवाल राजनीति से जुड़ा था. आगामी विधानसभा चुनावों खासकर उत्तर प्रदेश 2027 को देखते हुए यह आंकड़ा काफी अहम माना जा रहा है.60% लोगों का मानना है कि इन नियमों से बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को चुनावी नुकसान होगा. 35% लोग मानते हैं कि इसका राजनीति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.

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