RSS मुखिया मोहन भागवत की खूब तारीफ करने लगे बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन, ये सब कहा
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान को मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का समर्थन मिला है. मौलाना ने उनके विचारों को सकारात्मक बताते हुए कहा कि ये देश में हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे को बढ़ावा देंगे.
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का हालिया भाषण और लेख इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं. जहां कई मुस्लिम संगठनों ने उनके बयानों की आलोचना की है, वहीं जानी-मानी इस्लामिक शख्सियत और मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मोहन भागवत के बयानों का समर्थन किया है. आपको बता दें कि उन्होंने कहा कि यह बातें समाज को जोड़ने वाली और देश की एकता को मजबूत करने वाली हैं.
संघ भारत का सबसे बड़ा संगठन है
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि आरएसएस भारत का सबसे बड़ा संगठन है और देश में किसी भी धर्म से जुड़ा इतना बड़ा संगठन अभी तक अस्तित्व में नहीं आया है. उन्होंने कहा कि डॉ. मोहन भागवत एक विद्वान और दूरदर्शी नेता हैं जो समय-समय पर समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले बयान देते हैं.
मौलाना ने सराहा भागवत का संदेश दिया कि "हर जगह शिवलिंग मत तलाशो". मौलाना ने भागवत के उस बयान की सराहना की जिसमें उन्होंने कहा था कि "हर जगह शिवलिंग मत तलाशो." उन्होंने इसे देश के सामाजिक सौहार्द के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे समाज में व्यर्थ के तनाव को रोका जा सकता है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भागवत ने कहा था “हर मस्जिद के नीचे मंदिर मत तलाशो.”
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धर्म के नाम पर टकराव देश के लिए नुकसानदेह
बता दें कि मौलाना रजवी ने आगे कहा कि देश की तरक्की के लिए टकराव नहीं, बल्कि मिल-जुल कर चलना जरूरी है. किसी भी मजहब से टकराव देश और समाज के लिए घातक है. उन्होंने कहा कि भागवत के बयानों से उम्मीद जगी है कि अब देश में नफरत फैलाने वाले तत्वों की गतिविधियों पर लगाम लगेगी.
इस्लामिक स्कॉलर ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मस्जिदों, मदरसों और मजारों को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया, जिससे समाज में तनाव फैला. उन्होंने उम्मीद जताई कि भागवत के प्रयासों से अब इस प्रकार की घटनाएं रुकेंगी और सभी समुदायों के बीच बेहतर तालमेल कायम होगा.
लेख और भाषण सोचने लायक हैं
मौलाना रजवी ने कहा कि मोहन भागवत का हालिया लेख और भाषण न केवल सकारात्मक सोच को दर्शाते हैं बल्कि देश को जोड़ने की एक सशक्त पहल भी हैं. उन्होंने कहा कि ये बातें सभी समुदायों को पढ़नी और समझनी चाहिए, ताकि देश में आपसी भाईचारा और शांति बनी रहे.
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