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कुलदीप सिंह सेंगर वाली फेमस बांगरमऊ विधानसभा में कौन पड़ रहा भारी, क्या सपा मारेगी बाजी?

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Bangarmau Assembly: कुलदीप सिंह सेंगर की जेल से रिहाई और बांगरमऊ विधानसभा सीट पर चुनावी स्थिति पर चर्चा की गई है. यह सीट नाव जिले में है जहां पिछले चुनावों में बीजेपी और सपा के बीच कड़ी टक्कर रही है. कुलदीप सिंह सेंगर पर गंभीर आरोपों के बावजूद उनकी चर्चा देशभर में रही है. बीजेपी के श्रीकांत कटियार लगातार दो बार इस सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं. सपा ने भी प्रबल स्थिति रखते हुए इस चुनाव में अपनी ताकत बढ़ाई है.

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Bangarmau Assembly: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्नाव जिले की बांगरमऊ सीट हमेशा से चर्चा के केंद्र में रही है. कभी कुलदीप सिंह सेंगर के दबदबे के लिए तो कभी उनके जेल जाने और सजा होने के बाद पैदा हुए सियासी शून्य के लिए. आज यूपी किसका शो में हम बात करेंगे बांगरमऊ के उन समीकरणों की जहां 2027 की जंग अभी से दिलचस्प हो चली है.

कुलदीप सिंह सेंगर: रसूख, विवाद और सजा

बांगरमऊ सीट का नाम आते ही सबसे पहला चेहरा कुलदीप सिंह सेंगर का उभरता है. सेंगर के जेल से बाहर आने की चर्चाओं ने पूरे प्रदेश में सियासी हलचल तेज कर दी है. रेप और मर्डर जैसे गंभीर आरोपों में घिरे सेंगर को जब सजा हुई तो विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने उन्हें जमकर घेरा. पीड़िता के सड़क पर प्रदर्शन से लेकर सेंगर के बीजेपी से निष्कासन तक इस सीट ने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या सेंगर का प्रभाव आज भी वोट बैंक पर कायम है?

बांगरमऊ का चुनावी इतिहास: कब किसने मारी बाजी?

वर्तमान में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है. लेकिन इसका इतिहास मिला-जुला रहा है. 2022 और 2019 के उपचुनाव में बीजेपी के श्रीकांत कटियार लगातार दो बार से विधायक हैं. 2019 में सेंगर की सदस्यता जाने के बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की थी. 2017 में कुलदीप सिंह सेंगर बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते. 2012 में समाजवादी पार्टी के बदलू खान ने जीत हासिल की थी. वहीं बात करें पुराने रिकॉर्ड की तो कुलदीप सिंह सेंगर यहां से सपा के टिकट पर भी जीत चुके हैं. जबकि 2002 में यह सीट बसपा के पाले में थी.

2027 में क्या है संभावना

सपा के जिला अध्यक्ष का कहना है कि 2022 में भीड़ देखकर हम अति उत्साह में आ गए थे. लेकिन इस बार कार्यकर्ता ग्राउंड जीरो पर काम कर रहे हैं. उनका साफ कहना है कि 'अखिलेश यादव जी बस इस बार उम्मीदवार सोच-समझकर उतार दें, तो हम सभी 6 सीटें जीतेंगे.' वहीं बीजेपी खेमे में जबरदस्त उत्साह है. पार्टी नेताओं का दावा है कि मोदी-योगी की योजनाओं के दम पर वे 2022 का रिकॉर्ड भी तोड़ देंगे. स्थानीय पत्रकारों के अनुसार 2027 में एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) एक बड़ा फैक्टर होगी. 10 साल की सरकार का हिसाब-किताब होगा और मुख्य किरदार सीएम योगी आदित्यनाथ ही होंगे. लोकसभा चुनाव में सपा के बेहतर प्रदर्शन ने उनके हौसले बुलंद किए हैं जिससे मुकाबला टाइट होने के आसार हैं.

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