ग्रेटर नोएडा में किराए के मकान में चल रहा था ड्रग्स बनाने का खेल! NCB की रेड में 45 करोड़ के नशे का खुलासा
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स बनाने वाली दो गुप्त लैब का भंडाफोड़ किया है. ये लैब गौतम बुद्ध नगर जिले के जहांनाबाद कादलपुर गांव में किराए की जगहों पर संचालित हो रही थीं.
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Greater Noida Drug Lab News: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स बनाने वाली दो गुप्त लैब का भंडाफोड़ किया है. ये लैब गौतम बुद्ध नगर जिले के जहांनाबाद कादलपुर गांव में किराए की जगहों पर संचालित हो रही थीं. 16 अक्टूबर 2026 को हुई कार्रवाई में 379.740 किलो एम्फेटामाइन युक्त सामग्री और 10 किलो स्यूडोएफेड्रिन बरामद किया गया. NCB के मुताबिक, बरामद सामग्री से करीब 56 किलो तैयार क्रिस्टलीय एम्फेटामाइन बनाई जा सकती थी, जिसकी अवैध बाजार में अनुमानित कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है. इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. एजेंसी ने इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन क्रिस्टल हंट’ नाम दिया है.
भारी मात्रा में ड्रग्स बनाने की सामग्री बरामद
NCB की टीम ने जहांनाबाद कादलपुर गांव में जिन दो जगहों पर छापा मारा, वहां सिंथेटिक ड्रग्स बनाने और उनकी प्रोसेसिंग का काम किया जा रहा था. तलाशी के दौरान 4.260 किलो क्रिस्टल, 157.700 किलो अर्ध-क्रिस्टलीय सामग्री और 217.780 किलो तरल पदार्थ बरामद हुआ. इन सभी का कुल वजन 379.740 किलो बताया गया है. इसके अलावा 10 किलो स्यूडोएफेड्रिन भी मिला. एजेंसी का अनुमान है कि बरामद क्रिस्टल और अर्ध-क्रिस्टलीय सामग्री से लगभग 56 किलो तैयार एम्फेटामाइन बनाई जा सकती थी. इसकी कीमत अवैध बाजार में करीब 45 करोड़ रुपये आंकी गई है.
लैब में मिले कई तरह के केमिकल और उपकरण
छापेमारी के दौरान NCB को ड्रग्स तैयार करने में इस्तेमाल हो सकने वाले कई रसायन भी मिले. इनमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड, एसीटोन, टोल्यून, सल्फ्यूरिक एसिड और पोटैशियम परमैंगनेट शामिल हैं. इसके साथ ही दोनों जगहों से बड़े हीटिंग उपकरण, कांच के बर्तन, केमिकल रखने वाले ड्रम, फिल्टर करने के औजार और वजन मापने वाली मशीनें बरामद की गईं. वहां सांस की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले मास्क भी मिले. इन बरामद वस्तुओं से एजेंसी को लैब में चल रही गतिविधियों की जांच में मदद मिल सकती है. अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन जगहों को कौन संचालित कर रहा था और ड्रग्स बनाने के लिए जरूरी संसाधन कहां से जुटाए गए थे.
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विदेशी नागरिक और मिजोरम की महिला गिरफ्तार
इस कार्रवाई के बाद NCB ने डेस्टिनी अब्राहम डंबिरी और ललमजुआली उर्फ ओलिविया लालछाविमावी को गिरफ्तार किया है. डंबिरी ने खुद को नाइजीरिया का नागरिक बताया था, लेकिन इमिग्रेशन रिकॉर्ड में अलग जानकारी सामने आई है. रिकॉर्ड के मुताबिक, वह जनवरी 2020 में फ्रांसिस कलोकोह नाम से सिएरा लियोन के नागरिक के रूप में भारत आया था. वह टूरिस्ट वीजा पर आया था, जिसकी वैधता दिसंबर 2020 तक थी. NCB अब उसकी पहचान और भारत में रहने से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी की भूमिका इन गुप्त लैब के संचालन में किस तरह की थी.
गोवा एयरपोर्ट पर भी पकड़ी जा चुकी है दूसरी आरोपी
दूसरी आरोपी ओलिविया मिजोरम की रहने वाली है. उसे मार्च 2026 में गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट पर हेरोइन युक्त पाउडर मिलने के मामले में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने गिरफ्तार किया था. उस समय उसके सामान से 313 ग्राम हेरोइन युक्त पाउडर बरामद हुआ था. फिलहाल वह उस मामले में जमानत पर है. अब ग्रेटर नोएडा की गुप्त लैब से जुड़े मामले में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है. NCB दोनों आरोपियों के संपर्कों, गतिविधियों और कथित ड्रग्स नेटवर्क से उनके संबंधों का पता लगाने में जुटी है.
अक्टूबर 2024 में भी पकड़ी गई थी सिंथेटिक ड्रग्स लैब
ग्रेटर नोएडा में इससे पहले भी सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाली एक गुप्त लैब का खुलासा हो चुका है. NCB के मुताबिक, अक्टूबर 2024 में कसना औद्योगिक क्षेत्र में चल रही एक लैब पकड़ी गई थी. वहां से ठोस और तरल रूप में करीब 95.5 किलो सिंथेटिक ड्रग्स बरामद हुई थी. उस मामले की जांच के दौरान मैक्सिको के ड्रग्स कार्टेल ‘कार्टेल डे जलिस्को न्यू जनरेशन’ (CJNG) से संभावित संबंध सामने आए थे. उस कार्रवाई में मैक्सिको के एक नागरिक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, मौजूदा मामले में भी ऐसे किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका है या नहीं, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा.
फंडिंग से लेकर ड्रग्स की सप्लाई तक की जांच
NCB अब ‘ऑपरेशन क्रिस्टल हंट’ के तहत लैब की फंडिंग और सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. एजेंसी यह पता लगा रही है कि इन जगहों को चलाने के लिए पैसा कौन दे रहा था, रसायन कहां से खरीदे जा रहे थे और तैयार ड्रग्स किन लोगों तक पहुंचाई जानी थीं. दूसरे राज्यों और विदेशों से जुड़े संभावित संपर्कों की भी जांच की जा रही है. एजेंसी के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. फिलहाल बरामद सामग्री, उपकरणों और आरोपियों से जुड़ी जानकारियों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश जारी है.
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संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की NCB की अपील
NCB ने लोगों से अपील की है कि किराए के मकानों या औद्योगिक परिसरों में संदिग्ध गतिविधियां नजर आने पर इसकी जानकारी संबंधित एजेंसियों को दें. तेज और असामान्य केमिकल की गंध, ड्रमों की बार-बार आवाजाही, लैब के उपकरणों का संदिग्ध तरीके से भंडारण और रासायनिक कचरे को गलत ढंग से फेंकना ऐसी गतिविधियों के संकेत हो सकते हैं. इसकी सूचना राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन मानस (MANAS) के नंबर 1933 पर दी जा सकती है. एजेंसी ने यह भी बताया कि अवैध लैब से निकलने वाला रासायनिक कचरा मिट्टी, नालों और पानी के स्रोतों को दूषित कर सकता है. इससे लोगों की सेहत और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है.
