UP Political News: यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण करता है. 'आज का यूपी' के इस विशेष अंक में राज्य की तीन बड़ी और अहम खबरों का विस्तार से विश्लेषण किया गया है. पहली बड़ी खबर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा यूपी में हुए कथित 'फेक एनकाउंटर' के मुद्दे को सीधे 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) से जोड़कर सरकार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से जुड़ी है. दूसरी बड़ी खबर में, अखिलेश यादव ने प्रदेश के टॉप बाहुबलियों और बड़े अपराधियों की एक सूची सार्वजनिक करते हुए सरकार से उनके आपराधिक मुकदमों पर जवाब मांगा है. वहीं तीसरी बड़ी खबर के तहत, अखिलेश यादव ने मीडिया संस्थानों और संपादकों के बीच 'पीडीए' समाज के प्रतिनिधित्व को लेकर एक चौंकाने वाला डेटा पत्रकारों के ही सामने स्क्रीन पर प्रदर्शित किया है.
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'फेक एनकाउंटर' बनाम पीडीए: अखिलेश यादव का योगी सरकार पर बड़ा हमला
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में पुलिस मुठभेड़ों (एनकाउंटर्स) को लेकर योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. हाल ही में जौनपुर में एक लाख के इनामी बदमाश रवि यादव (जो एक दूल्हे को गोली मारने का आरोपी था) के एनकाउंटर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दो मुस्लिम बिरादरी के कथित लुटेरों के मारे जाने के बाद अखिलेश यादव ने इसे एक बड़ा सियासी मुद्दा बना दिया है. अपनी इस विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने तमाम आंकड़ों के साथ दावा किया कि यूपी में जितने भी एनकाउंटर हो रहे हैं, उनमें से 75% लोग पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज से आते हैं.
अखिलेश यादव ने एनकाउंटर की इस नीति को सरकार द्वारा जनता पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और दहशत फैलाने का जरिया बताया. उन्होंने कहा कि फर्जी एनकाउंटर नाकाम सरकार की पहचान होते हैं और इससे कानून-व्यवस्था सुधरने के बजाय पुलिस में भ्रष्टाचार फैलता है. इसके साथ ही उन्होंने मुठभेड़ में शामिल पुलिसकर्मियों को नसीहत देते हुए कहा कि वे सरकार के मोहरे बनकर अधिकारी से अपराधी बन रहे हैं, जिससे उनके परिवार जिंदगी भर अपराध बोध और कुंठा में गुजारने को मजबूर हो जाते हैं.
दूसरी तरफ, इस पूरे मामले पर सरकार का अपना स्पष्ट डेटा और कमिटमेंट है. सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों में तकरीबन 300 के आसपास अपराधियों के एनकाउंटर हुए हैं और इस दौरान दर्जन भर पुलिसवाले भी शहीद हुए हैं. सरकार और आयोग का स्पष्ट पक्ष है कि कोई भी एनकाउंटर फेक नहीं है, क्योंकि मानवाधिकार आयोग से लेकर अदालत तक कहीं भी सरकार को इस विषय पर नहीं घेरा गया है. इसके बावजूद, अखिलेश यादव वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए इस इमोशनल मुद्दे के जरिए ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यकों को एकजुट करने के नए नैरेटिव पर काम कर रहे हैं.
अखिलेश यादव ने जारी की बाहुबलियों की सूची, कोर्ट का हवाला देकर सरकार को घेरा
लंबे समय से उत्तर प्रदेश के टॉप 10 या बड़े अपराधियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग कर रहे अखिलेश यादव ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद एक बड़ी सूची सामने रख दी. अखिलेश यादव ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के माध्यम से उन बाहुबलियों और बड़े नामों की लिस्ट पढ़वाई, जिनके असलहों, लाइसेंसों और मुकदमों की आपराधिक रिपोर्ट हाई कोर्ट द्वारा मांगे जाने का दावा किया गया है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्क्रीन पर एक-एक करके प्रदेश के कई बड़े और चर्चित बाहुबलियों के नाम पढ़े गए. इस सूची में मुख्य रूप से रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया), धनंजय सिंह, बृजेश सिंह, विनीत सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, सुशील सिंह, अजय मरहत, सुजीत सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुग्डो, पप्पू भौकाली, इंद्रदेव सिंह, सुनील यादव, अजीम साहब, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सतीश सिंह, छत्र सिंह और डॉ. उदयभान सिंह जैसे नाम शामिल थे. अखिलेश यादव ने इस सूची के जरिए सरकार को घेरते हुए पूछा कि इन लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों पर उत्तर प्रदेश सरकार की क्या स्थिति है.
मीडिया में प्रतिनिधित्व को लेकर अखिलेश का बड़ा दांव, पत्रकारों के सामने रखा डेटा
पूरी तरह से पीडीए (OBC, SC, ST और मुस्लिम) कार्ड खेल रहे अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पत्रकारों के सामने ही मीडिया इंडस्ट्री का एक बड़ा डेटा स्क्रीन पर प्रदर्शित कर दिया. अखिलेश यादव ने हिंदी समाचार चैनलों और अखबारों के मालिकों व संपादकों के सामाजिक प्रतिनिधित्व का डेटा दिखाते हुए देश की संस्थाओं में असमानता का मुद्दा उठाया.
अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर पत्रकारों से संवाद करते हुए कहा कि वे खुद इस डेटा को देख लें क्योंकि यह पूरी तरह सच है. उनके पीछे स्क्रीन पर चल रहे डेटा के मुताबिक, मीडिया संस्थानों के शीर्ष पदों और संपादकों में तकरीबन 95% से 96% लोग सामान्य वर्ग (General Category) से आते हैं, जबकि देश की बहुसंख्यक आबादी वाले पीडीए समाज का प्रतिनिधित्व केवल 4% से 5% के आसपास ही सिमटा हुआ है. इस डेटा को सामने रखकर अखिलेश यादव ने यह विमर्श स्थापित करने की कोशिश की कि सत्ता, संस्थाओं और मीडिया के शीर्ष स्तर पर अभी भी समाज के पिछड़े और शोषित वर्ग को उनका वास्तविक हक नहीं मिल पा रहा है.
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