क्या टूट गई अखिलेश यादव और तेज प्रताप यादव की दोस्ती? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

कुमार अभिषेक

26 May 2026 (अपडेटेड: 26 May 2026, 10:17 AM)

Akhilesh Tej Pratap Yadav News: UP Tak के खास शो 'आज का यूपी' में देखिए कैसे बीजेपी ने मुलायम परिवार के बाद लालू यादव के कुनबे में बड़ी सेंध लगा दी है. लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने यूपी के मिर्जापुर में सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की और अखिलेश यादव से अपने सारे रिश्ते खत्म करने का एलान कर दिया. जानिए वीडियो कॉल लीक करने की उस इनसाइड स्टोरी को जिसके चलते अखिलेश और तेज प्रताप के बीच इतनी बड़ी खाई पैदा हो गई.

Tej Pratap and Akhilesh Yadav

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Akhilesh Tej Pratap Yadav Bond: उत्तर प्रदेश की राजनीति और समसामयिक घटनाक्रमों पर आधारित यूपी Tak का बेहद लोकप्रिय और खास शो 'आज का यूपी' राज्य की सियासी हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण लेकर हाजिर है. आज के इस अंक में हम मुख्य रूप से राज्य और देश की राजनीति को प्रभावित करने वाली तीन बड़ी खबरों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे. हमारी आज की पहली बड़ी खबर बिहार के कद्दावर नेता लालू प्रसाद यादव के परिवार से जुड़ी है, जहां उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर पहुंचे और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ करते हुए अखिलेश यादव से अपने सभी रिश्तों के खत्म होने का बड़ा ऐलान कर दिया है, जिसे मुलायम परिवार के बाद लालू परिवार में बीजेपी की बड़ी सेंध माना जा रहा है. दूसरी बड़ी खबर के तहत हम बात करेंगे कि कैसे तेज प्रताप के इस यू-टर्न के पीछे अखिलेश यादव द्वारा चुनाव में उनकी मनमानी आदतों जैसे फोन रिकॉर्डिंग और वीडियो कॉल लीक करने के चलते बनाई गई दूरी है. वहीं, हमारी तीसरी बड़ी खबर इस नए सियासी घटनाक्रम के उस नैरेटिव पर आधारित है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश की जमीन पर भले ही तेज प्रताप का कोई वजूद न हो. लेकिन मुलायम सिंह यादव के परिवार की अपर्णा यादव की तरह अब लालू परिवार का भी बीजेपी के पाले में खड़ा होना एक नए राष्ट्रीय सियासी समीकरण का संदेश दे रहा है.

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1. मुलायम परिवार के बाद लालू के घर में भी बीजेपी की सेंध! क्या नए 'अपर्णा यादव' बनेंगे तेज प्रताप?

बिहार की राजनीति के सबसे बड़े क्षत्रप लालू प्रसाद यादव के परिवार में क्या भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ी सेंधमारी कर दी है? यह सवाल इस समय उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार के सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा गूंज रहा है. जिस तरह उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने मुलायम सिंह यादव के कुनबे में सेंध लगाकर अपर्णा यादव को अपने पाले में किया था. ठीक उसी राह पर अब लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव चलते दिखाई दे रहे हैं.

तेज प्रताप यादव ने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी देवी के मंदिर में दर्शन-पूजन किया. इसके ठीक बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने एक ऐसी नई सियासी लाइन पकड़ ली जिसने सबको चौंका दिया. तेज प्रताप यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुलकर तारीफ की और यहां तक दावा कर दिया कि आगामी चुनाव में योगी आदित्यनाथ ही दोबारा पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने जा रहे हैं. जब पत्रकारों ने उनसे सीधा सवाल पूछा कि क्या वह भविष्य में बीजेपी का सहयोग करेंगे तो तेज प्रताप ने बेहद सकारात्मक अंदाज में कहा 'अभी तो कोई ऐसी बात नहीं है, लेकिन अगर माता की कृपा से ऐसा कोई फल मिलता है तो यह अच्छी बात है, हम सहयोग करने का काम करेंगे.' लालू यादव की उस घोर बीजेपी विरोधी विचारधारा के विपरीत, जिसमें वह कहते थे कि मरना पसंद करेंगे लेकिन बीजेपी से हाथ नहीं मिलाएंगे, उनके बड़े बेटे का यह रुख इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि वह बीजेपी के नए 'सपोर्ट सिस्टम' के सहारे अपनी अलग सियासी राह तलाश रहे हैं.

2. "मैं अखिलेश यादव को सपोर्ट नहीं करता"

मिर्जापुर के दौरे पर तेज प्रताप यादव ने जो सबसे बड़ा और तीखा हमला बोला, वह समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर था. तेज प्रताप ने दो टूक शब्दों में कहा, 'देखिए, मैं अखिलेश यादव को तो बिल्कुल भी सपोर्ट नहीं करता हू.' यह बयान इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि एक समय मुलायम परिवार में तेज प्रताप यादव के सबसे गहरे और निजी रिश्ते अखिलेश यादव से ही हुआ करते थे. दोनों के बीच अक्सर मोबाइल पर लंबी बातचीत और वीडियो कॉलिंग हुआ करती थी.

इस गहरी दोस्ती के अचानक दुश्मनी और दूरी में बदलने की एक बेहद दिलचस्प इनसाइड स्टोरी है. दरअसल, तेज प्रताप यादव की कुछ आदतों ने अखिलेश यादव को उनसे दूर होने पर मजबूर कर दिया. तेज प्रताप अक्सर अखिलेश यादव के साथ होने वाली अपनी बातचीत और वीडियो कॉल को पीछे से चुपके से रिकॉर्ड करवा लिया करते थे और बाद में अपनी सियासी धमक दिखाने के लिए उसे सोशल मीडिया पर पब्लिक कर देते थे.अखिलेश यादव को कई बार इसका अहसास भी हुआ, लेकिन उन्होंने पारिवारिक लिहाज में इसे नजरअंदाज किया. मगर पानी तब सिर से ऊपर चला गया जब बिहार चुनाव के दौरान महुआ सीट से लड़ते वक्त तेज प्रताप ने अखिलेश को अपने पक्ष में प्रचार करने के लिए फोन किया. अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में मना करते हुए कहा कि वह आधिकारिक तौर पर आरजेडी और तेजस्वी यादव के साथ हैं. इस दोहरे झटके और मनमानी आदतों के खुलासे के बाद से दोनों के रिश्तों पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लग गया.

3. यूपी में तेज प्रताप का कोई सियासी वजूद नहीं, फिर भी बीजेपी के लिए क्यों फायदेमंद है यह नया नैरेटिव?

अगर जमीनी और चुनावी गणित के लिहाज से देखा जाए, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में तेज प्रताप यादव की कोई बिसात या राजनीतिक जमीन नहीं है. यूपी में न तो उनका कोई वोट बैंक है और न ही कोई संगठित फॉलोइंग, जो किसी भी चुनाव के नतीजों को 1% भी प्रभावित कर सके. इसके बावजूद, बीजेपी और देश की राजनीति के लिए तेज प्रताप यादव का यह बदला हुआ अंदाज बेहद मायने रखता है.

राजनीति में जमीन से ज्यादा कई बार नैरेटिव का बड़ा खेल होता है. बीजेपी इस समय देश को यह संदेश देने में पूरी तरह सफल हो रही है कि देश के दो सबसे बड़े और कद्दावर मंडलवादी-समाजवादी नेता (मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव), जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बीजेपी के विरोध में गुजार दी, आज उन्हीं के बच्चे और परिवार के अहम हिस्से बीजेपी की नीतियों और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम के मुरीद हो चुके हैं. बिहार की राजनीति में भी तेज प्रताप यादव लगातार सम्राट चौधरी जैसे बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं. उत्तर प्रदेश में भले ही इसका कोई चुनावी असर न हो लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के मनोबल को तोड़ने और दो बड़े सियासी कुनबों को आपस में लड़ाने या कमजोर करने के नैरेटिव के लिहाज से यह बीजेपी के लिए एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत है.