FIR Against Iqra Hasan: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस प्रशासन और कैराना से समाजवादी पार्टी की नवनिर्वाचित सांसद इकरा हसन के बीच सीधे टकराव की स्थिति पैदा हो गई है. सहारनपुर पुलिस ने एक हत्याकांड के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन करने के आरोप में सपा सांसद इकरा हसन, एक पूर्व मंत्री और करीब 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज किया है. इस कार्रवाई पर कैराना सांसद इकरा हसन ने तल्ख और तीखी प्रतिक्रिया दी है. इकरा ने प्रशासन को दो टूक लहजे में चुनौती देते हुए कहा है कि वह इन मुकदमों से डरने वाली नहीं हैं और गरीबों, मजलूमों व इंसाफ की लड़ाई को पूरी मजबूती और हौसले के साथ लड़ती रहेंगी.
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'कान खोलकर सुन ले प्रशासन, हम डरने वाले नहीं'
अपने ऊपर दर्ज हुई एफआईआर पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सपा सांसद इकरा हसन ने सत्ताधारी दल भाजपा और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया. इकरा ने कहा 'अगर प्रशासन को लगता है कि वह हमें फर्जी मुकदमों से डरा देगा, तो वे कान खोलकर सुन लें हम इन सब चीजों से डरने वाले नहीं हैं. हम हर हाल में अपने लोगों की आवाज उठाते रहेंगे. आज देश में अमीर लोगों की तुरंत सुनवाई हो जाती है. लेकिन गरीबों को सिर्फ प्रताड़ना मिलती है. जो गरीब इंसाफ की गुहार लेकर अधिकारियों के दरवाजे पर जाता है, उल्टे उसी पर और उसके संरक्षकों पर एफआईआर दर्ज कर दी जाती है. जैसा कि हमारे साथ हुआ. लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे.'
क्यों दर्ज हुई एफआईआर?
दरअसल, यह पूरा विवाद 21 अप्रैल को शामली के जसाला जंगल में हुई मोनू कश्यप नामक युवक की बेरहमी से हत्या से जुड़ा है. धारदार हथियार से की गई इस जघन्य वारदात के बाद से ही कश्यप समाज में भारी आक्रोश है. 21 मई को सांसद इकरा हसन मृतक मोनू कश्यप की बेबस मां विमलेश देवी को इंसाफ दिलाने और मुकदमे में उचित धाराएं बढ़वाने के लिए सहारनपुर डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं.
आरोप है कि डीआईजी कार्यालय पर सुनवाई न होने के कारण वहां पुलिस प्रशासन और सांसद के बीच तीखी बहस हो गई. इकरा हसन का कहना है कि प्रशासन से पीड़ित मां को कोई आश्वासन नहीं मिला, बल्कि उन्हें अपमानित कर बाहर धकेल दिया गया. इसके विरोध में जब सांसद वहीं धरने पर बैठ गईं तो पुलिस ने उन्हें कुछ देर के लिए कस्टडी में भी लिया. पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने वहां सरकारी कार्य में बाधा डाली और चक्काजाम जैसी स्थिति पैदा की जिसके बाद पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया.
अखिलेश यादव ने की मुलाकात
इस पूरे मामले ने उस समय बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया जब 20 मई को सांसद इकरा हसन मृतक मोनू की मां विमलेश देवी को लेकर लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री व सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव से मिलने उनके आवास पर पहुंचीं. मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने पीड़ित मां को ढांढस बंधाया और मामले में हर संभव कानूनी व राजनीतिक मदद का भरोसा दिया. इसके साथ ही सपा अध्यक्ष ने पार्टी की ओर से पीड़ित परिवार को सहायता के रूप में दो लाख रुपये का चेक भी सौंपा.
'हत्यारे खुले घूम रहे, इंसाफ मांगने वालों पर केस'
बेटे के जाने के गम में डूबी मां विमलेश देवी ने पुलिस की इस कार्रवाई पर रोते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि उनके बेटे के असली कातिलों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और न ही पुलिस ने सही धाराएं लगाई हैं. विमलेश देवी ने कहा कि जो सांसद एक गरीब मां को न्याय दिलाने के लिए रात-दिन संघर्ष कर रही हैं, पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने के बजाय उन पर ही मुकदमा ठोक दिया.
कश्यप समाज में आक्रोश
सांसद इकरा हसन पर हुई इस एफआईआर के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कश्यप समाज और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है. बहरहाल, इकरा हसन के आक्रामक तेवरों और कश्यप समाज के बढ़ते गुस्से ने इस हत्याकांड को पश्चिमी यूपी का एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है.
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