UP Kiska: हर्षवर्धन बाजपेयी या संदीप यादव, कौन जीतेगा प्रयागराज की शहर उत्तरी सीट?

Allahabad North Assembly Election 2027: प्रयागराज की शहर उत्तरी सीट पर 2027 चुनाव दिलचस्प होता दिख रहा है. भाजपा विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी जहां हैट्रिक की तैयारी में हैं, वहीं सपा नेता संदीप यादव ने मजबूत चुनौती पेश कर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है.

Harsh Vardhan Bajpai

रजत सिंह

• 04:11 PM • 22 May 2026

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Allahabad North Assembly Election 2027: यूपी की राजनीति के दिलचस्प किस्सों और जमीनी हकीकत को समेटे हमारे खास शो 'यूपी किसका' में आज बात प्रयागराज की 'शहर उत्तरी' विधानसभा सीट की. यह एक विशुद्ध शहरी सीट है जहां पारंपरिक रूप से मुकाबला हमेशा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच रहा है. लेकिन हाल के दिनों में यहां की सियासत ने एक नया मोड़ लिया है. भाजपा की इस सबसे मजबूत मानी जाने वाली सुरक्षित गढ़ रूपी सीट पर जहां वर्तमान विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी ने दोबारा बंपर वोटों से जीत दर्ज की. वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) के एक धाकड़ युवा नेता संदीप यादव ने पहली बार दूसरे नंबर पर आकर भाजपा के इस अभेद्य किले में दरार पैदा कर दी है. आज सवाल यही है कि क्या साल 2027 के रण में सपा इस सीट पर साइकिल चला पाएगी या भाजपा का कमल अपनी चमक बरकरार रखेगा?

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"पहला चुनाव वादों पर, दूसरा रिपोर्ट कार्ड पर" — हर्षवर्धन वाजपेयी

शहर उत्तरी सीट से लगातार दो बार (2017 और 2022) के विजेता भाजपा विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी एक बेहद मजबूत और रसूखदार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनकी दादी केंद्रीय मंत्री रही हैं और पिता भी इलाके के दिग्गज नेता रहे हैं. 'यूपी Tak' से अपनी चुनावी यात्रा साझा करते हुए हर्षवर्धन वाजपेयी ने कहा '2022 के चुनाव में जब मैं मैदान में था, तो हमारे वरिष्ठ नेता सतीश महाना जी और सुरेश खन्ना जी (जो 7-8 बार के एमएलए हैं) ने मुझसे कहा था कि हर्ष याद रखना, पहला चुनाव जीतना आसान होता है क्योंकि वह वादों पर लड़ा जाता है. लेकिन दूसरा चुनाव मुश्किल होता है क्योंकि वह आपके रिपोर्ट कार्ड पर होता है. मैं थोड़ा नर्वस था लेकिन यह शहर उत्तरी की जनता और बजरंगबली की कृपा है कि जहां मैं पहला चुनाव 35,000 वोटों के अंतर से जीता था, वहीं दूसरा चुनाव 55,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीता.'

विधायक हर्षवर्धन ने बताया कि उनका पहला मुख्य टारगेट क्षेत्र की रेलवे फाटक की समस्या को दूर करना था, जिसे उन्होंने पूरा किया. अब उनका अगला लक्ष्य मेडिकल चौराहे और महाराणा प्रताप चौराहे जैसी जगहों पर लगने वाले 90 सेकंड से दो मिनट के भारी ट्रैफिक जाम को खत्म करना है जिसकी तैयारी 2027 के लिए अभी से जारी है.

"चट्टान में दरार डाल दी है, 2027 में हथौड़ा चलेगा"- संदीप यादव

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के नेता संदीप यादव पिछले कुछ समय से अपने आक्रामक और जमीनी कार्यों की वजह से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. प्रयागराज में आई भीषण गंगा बाढ़ के दौरान नाव लेकर लोगों तक राशन पहुंचाना हो, या महाकुंभ क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव की आदमकद प्रतिमा स्थापित कर उनके प्रशंसकों को एकजुट करना—संदीप यादव ने जमीन पर पसीना बहाया है. वीआईपी कल्चर पर तंज कसते हुए संदीप यादव कहते हैं 'शहर उत्तरी विधानसभा भाजपा के लिए एक ऐसी चट्टान थी जिसे हिलाना नामुमकिन माना जाता था. साल 2022 में यहां की जनता के आशीर्वाद से मैंने उस चट्टान में पहली गहरी दरार पैदा कर दी है. जो लोग चांदी-सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए हैं और इस सीट को अपने बाप-दादा की बपौती समझते थे, उन्हें हटाने में थोड़ा समय तो लगता है. 2022 में हमने जो बीज बोया था, उसकी फसल अब तैयार है. 2027 में जब जनता का हथौड़ा चलेगा, तो यह चट्टान पूरी तरह टूट जाएगी और यहां प्रचंड बहुमत से साइकिल चलेगी."

क्या कहते हैं शहर उत्तरी के जातीय समीकरण?

इस सीट का सामाजिक और जातीय ताना-बाना पारंपरिक रूप से भाजपा के पक्ष में झुका हुआ नजर आता है. यही वजह है कि इसे भाजपा के लिए सबसे मुफीद सीट माना जाता है.

दलित: करीब 1,00,000 मतदाता

ब्राह्मण (भाजपा का कोर वोटर): करीब 1,00,000 मतदाता

कायस्थ (भाजपा का पारंपरिक झुकाव): करीब 65,000 मतदाता

मुस्लिम: करीब 25,000 मतदाता

यादव: करीब 15,000 मतदाता

बनिया/वैश्य: करीब 14,000 मतदाता

अन्य ओबीसी (OBC): करीब 8,000 मतदाता

संख्या बल के हिसाब से ब्राह्मण, कायस्थ और दलित मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा मिलकर यहां भाजपा को बड़ी बढ़त दिलाता है, जिसके चक्रव्यूह को भेदना विपक्षी दलों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है.

क्या कहता है स्थानीय पत्रकारों का आकलन?

सीट के मिजाज को समझने के लिए जब स्थानीय पत्रकारों से बात की गई तो उनका मानना है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल और राष्ट्रीय स्तर के चुनावी नतीजों के प्रभाव को देखते हुए फिलहाल पलड़ा भारतीय जनता पार्टी का ही भारी है। पत्रकारों का कहना है कि 'अगर 2027 में भाजपा से हर्षवर्धन वाजपेयी ही दोबारा प्रत्याशी रहते हैं, तो उनकी व्यक्तिगत साफ-सुथरी छवि और विकास कार्यों के दम पर पार्टी की जीत लगभग तय है. लेकिन अगर भाजपा ने चेहरा बदला, तो राह मुश्किल हो सकती है. वहीं साल 2022 में संदीप यादव की कार्यशैली और व्यक्तिगत छवि ही थी जिसने सपा को इतिहास में पहली बार इस सीट पर दूसरे नंबर पर ला खड़ा किया. अगर विपक्ष इसी तरह संघर्ष करता रहा, तो आगामी परिणाम चौंकाने वाले भी हो सकते हैं.'

भविष्य के गर्भ में छिपा है फैसला

राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी भारी सस्पेंस है कि क्या आगामी चुनाव में सपा-कांग्रेस का गठबंधन बरकरार रहेगा या नए समीकरण बनेंगे? अगर यह सीट गठबंधन में कांग्रेस के खाते में जाती है (चूंकि पूर्व में अनुग्रह नारायण सिंह यहां से कांग्रेस के टिकट पर जीतते रहे हैं), तो संदीप यादव का अगला कदम क्या होगा? फिलहाल मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प है. एक तरफ हर्षवर्धन वाजपेयी की हैट्रिक लगाने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ संदीप यादव का सत्ता पलटने का जुनून.