बाराबंकी: Subhas Chandra Bose की यादों और आजादी के आंदोलन से जुड़ा दरियाबाद क्षेत्र आज भी अपनी ऐतिहासिक और राजनीतिक विरासत के लिए जाना जाता है. बाराबंकी जिले के हड़हा स्टेट और दरियाबाद विधानसभा की पहचान केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही बल्कि यह क्षेत्र जनसेवा, सम्मान और सामाजिक विश्वास की परंपरा का केंद्र माना जाता रहा है.
ADVERTISEMENT
इतिहासकारों और स्थानीय जानकारों के मुताबिक, हड़हा स्टेट का स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान रहा. बताया जाता है कि राजा प्रताप बहादुर सिंह ने स्वतंत्रता सेनानियों की हर संभव मदद की थी. इतना ही नहीं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी एक समय हड़हा पहुंचे थे जहां उन्होंने हजारों लोगों को संबोधित किया और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही थी. ऐसा कहा जाता है कि उनकी प्रेरणा से यहां तकनीकी शिक्षा संस्थान की नींव भी रखी गई थी. आज भी क्षेत्र में नेताजी की स्मृतियां लोगों के बीच गर्व के साथ याद की जाती हैं.
इसी ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले नेताओं में सबसे प्रमुख नाम रहा राजीव सिंह का दरियाबाद की राजनीति में राजा राजीव सिंह केवल एक राजनेता नहीं बल्कि जनता के सुख-दुख में खड़े रहने वाले जननेता माने जाते थे. लगातार छह बार विधायक और मंत्री रहे राजा राजीव सिंह ने दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और सवर्ण हर वर्ग के बीच समान सम्मान और अपनापन कायम रखा.
राजा राजीव सिंह का राजनीतिक सफर जितना प्रभावशाली रहा उतना ही भावुक उनका अंतिम समय भी रहा. टिकट कटने के बाद उनके निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया था. उनके अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि जनता उन्हें केवल नेता नहीं बल्कि परिवार का सदस्य मानती थी. राजा राजीव सिंह की राजनीति की सबसे बड़ी पहचान उनकी सादगी और जनसेवा थी. उन्होंने अपने क्षेत्र को माफिया, गुंडागर्दी और सांप्रदायिक राजनीति से दूर रखने का प्रयास किया. यही वजह थी कि हर वर्ग के लोगों में उनके प्रति गहरा विश्वास था. क्षेत्र के लोग बताते हैं कि उन्होंने हमेशा हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने का कार्य किया.
उनके निधन के बाद हड़हा स्टेट की परंपरा के अनुसार उनके बेटे रितेश कुमार सिंह का राजतिलक किया गया. क्षेत्र में “रिंकू भैया” के नाम से पहचाने जाने वाले रितेश सिंह आज अपने पिता की राजनीतिक और सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाने में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं. सामाजिक सेवा व संघर्ष की राजनीति का अनुसरण करते हुए आज रिंकू भैया सभी जाति, धर्म, मजहब और पंथ में अत्यंत ही लोकप्रिय माने जाते हैं. क्षेत्र में उनका जनसंपर्क लगातार मजबूत हो रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनमें अपने पिता राजा राजीव सिंह की झलक साफ दिखाई देती है. रितेश सिंह का सामाजिक और राजनीतिक कुनबा भी काफी बड़ा माना जाता है. बताया जाता है कि उनके साथ 35 हजार से अधिक क्षत्रिय वोटरों का मजबूत समर्थन जुड़ा हुआ है जो स्वयं को राजा साहब के परिवार का सदस्य मानते हैं. यही कारण है कि बाराबंकी क्षेत्र में रिंकू भैया को एक मजबूत व लोकप्रिय क्षत्रिय नेता के रूप में भी देखा जाता है. हालांकि उनकी पहचान केवल किसी एक समाज तक सीमित नहीं बल्कि सभी वर्गों के बीच एक सहज और सक्रिय जननेता की बनती जा रही है.
बिना किसी सरकारी पद पर रहते हुए भी रितेश सिंह लगातार जनता के बीच मौजूद रहते हैं. जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनना, प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कर समाधान कराना और हर वर्ग के लोगों से सीधे संवाद बनाए रखना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है. हाल ही में एक दलित पीड़ित की जमीन कब्जे की शिकायत पर त्वरित हस्तक्षेप कर कार्रवाई करवाने के बाद क्षेत्र में उनकी सक्रियता की चर्चा और तेज हुई.
राजनीतिक गलियारों में भी रितेश सिंह की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी बढ़ती नजदीकियों को आने वाले समय की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. 2027 विधानसभा चुनाव की चर्चा के बीच दरियाबाद में एक बार फिर सेवा, सम्मान और विश्वास की राजनीति केंद्र में दिखाई दे रही है.
दरियाबाद की धरती की यही खासियत रही है कि यहां राजनीति केवल सत्ता पाने का माध्यम नहीं बल्कि लोगों से दिल का रिश्ता जोड़ने का जरिया मानी जाती है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रेरणा, राजा राजीव सिंह की जनसेवा और रितेश सिंह की सक्रियता इन तीनों को जोड़ती यह विरासत आज भी दरियाबाद की पहचान बनी हुई है.
(इस इंपैक्ट फीचर को रेहान मुस्तफा ने लिखा है.)
ADVERTISEMENT









