अखिलेश यादव चल दिए हैं 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर! सपा चीफ बड़े मंगल पर भगवा गमछा ओढ़े भंडारा बांटते नजर आए

UP Political News: बड़े मंगल पर लखनऊ में अखिलेश यादव ने बांटा भंडारा. रामचरितमानस को बताया सांस्कृतिक संविधान. ब्राह्मणों पर टिप्पणी करने वाले राजकुमार भाटी को लगी फटकार.

UP Political News

कुमार अभिषेक

• 10:24 AM • 20 May 2026

follow google news

यूपी Tak का खास शो आज का यूपी राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सटीक विश्लेषण लेकर हाजिर है. आज के इस विशेष अंक में हमारी तीन बड़ी और मुख्य खबरें सपा चीफ अखिलेश यादव की 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की ओर बढ़ती राह और लखनऊ की सड़कों पर उनका भंडारा बांटना, हाईकोर्ट के आदेश के बाद वकीलों पर हुए लाठीचार्ज के संदर्भ में अखिलेश यादव द्वारा रामचरितमानस को 'सांस्कृतिक संविधान' की संज्ञा देना और ब्राह्मण समाज पर विवादित टिप्पणी करने वाले सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी को लखनऊ तलब कर अखिलेश यादव द्वारा लगाई गई कड़ी फटकार और दी गई सख्त चेतावनी शामिल हैं.

यह भी पढ़ें...

'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पर सपा! बड़े मंगल पर लखनऊ की सड़कों पर भंडारा बांटते दिखे अखिलेश 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछले 24 घंटे के भीतर कुछ ऐसे बड़े घटनाक्रम हुए हैं, जो यह साफ इशारा कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अकेले बहुसंख्यक यानी हिंदुओं की राजनीति की पिच पर खेलने देना नहीं चाहते हैं. अखिलेश यादव अब एक समावेशी राजनीति की बात करते हुए खुद को भी एक हिंदू और श्रद्धालु के रूप में पेश कर रहे हैं, ताकि विपक्ष उनके खिलाफ 'मुस्लिम परस्त' राजनीति की कोई धारणा न बना सके.

इसी सिलसिले में लखनऊ में 'बड़े मंगल' पर एक बेहद अलग नजारा देखने को मिला. अमूमन बड़े मंगल पर लखनऊ की सड़कों पर भंडारे लगते हैं, लेकिन इस बार खुद अखिलेश यादव सड़क पर उतरे. भगवा गमछा ओढ़े अखिलेश यादव लखनऊ की जनता को खुद अपने हाथों से पूरी, बुंदिया और प्रसाद का भंडारा बांटते नजर आए. इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "यही हमारे समाज की मिलीजुली संस्कृति है, यही गंगा-जमुनी तहजीब है, यही भाईचारा और हमारी पहचान है. अनेकता में एकता ही हमारा लोकतंत्र है और यही हमें हमारा संविधान भी सिखाता है कि हमें हर एक के प्रति प्रेम, दया और अपनापन रखना है."

वकीलों पर लाठीचार्ज के बाद अखिलेश का बड़ा दांव; रामचरितमानस को बताया 'सांस्कृतिक संविधान'

अखिलेश यादव का सॉफ्ट हिंदत्व की ओर बढ़ता कदम सिर्फ भंडारा बांटने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रदेश की सियासत को पूरी तरह गरमा दिया है. दरअसल, लखनऊ में हाईकोर्ट के आदेश के बाद वकीलों के चैंबर तोड़े जाने के विरोध के दौरान पुलिस और वकीलों में झड़प हुई थी. इस दौरान एक वकील के हाथ में रामचरितमानस की प्रति थी और पुलिस उन पर लाठियां बरसा रही थी.

इस तस्वीर को अपने सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर साझा करते हुए अखिलेश यादव ने रामचरितमानस को देश का 'सांस्कृतिक संविधान' और महामर्यादा ग्रंथ घोषित कर दिया. अखिलेश यादव ने अपने लंबे-चौड़े पोस्ट में लिखा, "भाजपा प्रभु राम का नाम अपने राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने के लिए करती रही है. कल जिस प्रकार भाजपा सरकार ने हाथ में श्री रामचरितमानस लिए हुए अधिवक्ता पर अति निंदनीय हिंसक लाठीचार्ज किया, वह भाजपा की सनातन विरोधी सोच को दर्शाता है. इससे सांस्कृतिक संविधान रूपी हमारे इस महाकाव्य और महा मर्यादा ग्रंथ का महा अपमान हुआ है."

अखिलेश यादव का यह बयान इसलिए भी सबसे बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है क्योंकि बीते समय में उन्हीं की पार्टी के कई बड़े चेहरों (जैसे स्वामी प्रसाद मौर्य और लोटन राम निषाद) ने रामचरितमानस को लेकर कई विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे सपा को सियासी नुकसान उठाना पड़ा था. अब अखिलेश यादव 'भाजपा हटाएं, धर्म बचाएं, देश बचाएं' के नारे के साथ खुद सनातन के रक्षक के रूप में सामने आ रहे हैं.

ब्राह्मणों पर विवादित टिप्पणी करने वाले राजकुमार भाटी को अखिलेश ने हड़काया

समाजवादी पार्टी के भीतर इस समय आंतरिक कलह और नाराजगी का माहौल भी देखने को मिल रहा है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने हाल ही में ब्राह्मण समाज के खिलाफ कुछ ऐसे अपशब्दों का इस्तेमाल कर दिया था, जिसके बाद पार्टी के सभी ब्राह्मण चेहरे (जैसे पवन पांडे, संतोष पांडे और कानपुर के विधायक) भड़क गए. इन सभी नेताओं ने लामबंद होकर अखिलेश यादव से मुलाकात की और राजकुमार भाटी को पार्टी से निष्कासित करने तक की वकालत कर दी.

इस बयानबाजी से भाजपा को राजनीतिक रूप से फायदा मिलते देख और अपने 'पीडीए' (PDA) फॉर्मूले को डिरेल होते देख अखिलेश यादव बेहद गुस्से में नजर आए. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राजकुमार भाटी को तुरंत लखनऊ तलब किया गया.

ऐसी चर्चा है कि बंद कमरे में अखिलेश यादव और राजकुमार भाटी के बीच करीब घंटे भर तक मुलाकात हुई. सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने भाटी को बेहद कड़े लहजे में हड़काया और सख्त चेतावनी दी कि समाजवादी पार्टी के बैनर तले रहते हुए किसी भी समाज या जाति के खिलाफ ऐसी अमर्यादित टिप्पणी दोबारा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. नाराजगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस मुलाकात की कोई भी आधिकारिक तस्वीर तक जारी नहीं की गई. हालांकि, बाद में एक आधिकारिक नोट के जरिए यह संदेश दिया गया कि पार्टी लाइन के विरुद्ध जाकर कोई भी नेता किसी समाज पर टीका-टिप्पणी नहीं करेगा.

यहां देखें पूरा शो