तनखैया कलेक्टर से जूते साफ कराऊंगा... 7 साल पुराने इस बयान पर आजम खान को कोर्ट ने सुना दी सजा

Azam Khan News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को अदालत से बड़ा झटका लगा है. 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक विवादित बयान के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है.

Azam Khan (File Photo)

यूपी तक

• 01:43 PM • 16 May 2026

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Azam Khan News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को अदालत से बड़ा झटका लगा है. 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक विवादित बयान के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है. कोर्ट ने आजम खान को 2 साल की जेल की सजा सुनाई है. इसके साथ ही उन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

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चुनावी सभा में दिया था विवादित बयान

यह मामला 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान रामपुर के भोट थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया था. आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में आजम खान ने तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. सभा में उन्होंने कहा था, 'सब डटे रहो, यह कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो. यह तनखैया है और तनखैयों से नहीं डरते. देखे हैं कई मायावती के फोटो, कैसे बड़े-बड़े अफसर रूमाल निकालकर जूते साफ कर रहे हैं. उन्हीं से गठबंधन है, उन्हीं के जूते साफ कराऊंगा इनसे, अल्लाह ने चाहा.'

बयान के बाद दर्ज हुआ था केस

आजम खान के इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने कड़ी आपत्ति जताई थी. अधिकारियों का कहना था कि इस तरह के बयान से प्रशासन की गरिमा को ठेस पहुंची और चुनाव आचार संहिता का भी उल्लंघन हुआ है. इसके बाद भोट थाने में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.पुलिस ने मामले की जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए और उनके बयान भी दर्ज किए गए.

गवाहों और सबूतों के आधार पर आया फैसला

अभियोजन पक्ष का कहना था कि आजम खान ने सार्वजनिक मंच से सरकारी अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जो कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें दोषी माना और सजा सुनाई. कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. गौरतलब है कि आजम खान पहले से भी कई मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. ऐसे में यह फैसला उनके लिए एक और बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है.