भानवी सिंह को X पर टैग कर राजा भैया के ‘भाई’ अक्षय प्रताप ने शेयर की 27 हजार वाली शराब पीते हुए फोटो

यूपी तक

15 May 2026 (अपडेटेड: 18 Jul 2026, 10:21 PM)

UP News: लखनऊ में जालसाजी के मुकदमे के बाद जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से चर्चा में आ गया है. अक्षय प्रताप ने X पर जो तस्वीर शेयर की, उसमें उनकी मेज पर ‘रॉयल सैल्यूट 21’ ब्रांड की शराब रखी दिखाई दी.

Akshay Pratap Singh, Bhanvi Singh, Royal Salute 21, MLC controversy, Raja Bhaiya news, Lucknow FIR, political controversy, Uttar Pradesh politics

अक्षय प्रताप सिंह और भानवी सिंह (फाइल फोटो)

Google CTA

UP News: लखनऊ में जालसाजी के मुकदमे के बाद जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से चर्चा में आ गया है. अक्षय प्रताप ने X पर जो तस्वीर शेयर की, उसमें उनकी मेज पर ‘रॉयल सैल्यूट 21’ ब्रांड की शराब रखी दिखाई दी, जिसकी कीमत करीब 27,650 रुपये बताई जा रही है. खास बात यह रही कि उन्होंने इस पोस्ट में राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह को भी टैग किया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. जानकारी के मुताबिक FIR दर्ज होने के कुछ समय बाद ही अक्षय प्रताप सिंह ने X पर यह पोस्ट किया. माना जा रहा है कि यह पोस्ट उन्होंने अपने विरोधियों को जवाब देने के लिए किया है.

यह भी पढ़ें...

भानवी सिंह को टैग कर लिखा संदेश

अक्षय प्रताप सिंह ने इस पोस्ट में राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह को टैग करते हुए मशहूर कवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां भी लिखीं. उन्होंने लिखा -

'जिस नर की बाँह गही मैंने, जिस तरु की छाँह गही मैंने,
उसपर ना वार चलने दूँगा, कैसे कुठार चलने दूँगा,
जीते जी उसे बचाऊँगा, या स्वयं आप कट जाऊँगा…'
 

राजनीतिक हलकों में इस पोस्ट को राजा भैया के समर्थन और विरोधियों को संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है.

क्यों दर्ज हुई FIR?

लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में अक्षय प्रताप सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई एमपी-एमएलए कोर्ट के स्पेशल एसीजेएम के आदेश पर की गई है. राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने आरोप लगाया है कि अक्षय प्रताप और उनके सहयोगियों ने जालसाजी करके उनकी साझेदारी वाली एक फर्म पर कब्जा करने की कोशिश की. बताया गया कि यह फर्म 10 फरवरी 2014 को बनाई गई थी. आरोप है कि नवंबर 2020 में फर्म का पता बदलकर अक्षय प्रताप के निजी आवास का पता दर्ज करा दिया गया. साथ ही करीब 5 करोड़ रुपये की संपत्तियों को हड़पने के लिए दस्तावेजों में कथित हेराफेरी की गई.

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत

इस मामले में अक्षय प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें वहां से राहत नहीं मिली. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. इसके बाद हजरतगंज पुलिस ने अक्षय प्रताप सिंह, रोहित सिंह, अनिल सिंह और रामदेव यादव के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चाएं तेज हैं.