Akhilesh Yadav on Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर धरना स्थल से दिल्ली पुलिस द्वारा हटाए जाने के बाद सियासी संग्राम चरम पर पहुंच गया है. आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल से लेकर चंद्रशेखर आजाद और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता इस कार्रवाई से बेहद आक्रोशित हैं. एक तरफ जहां विपक्ष इसे बीजेपी सरकार की तानाशाही बता रहा है. वहीं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने भी दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई और मेडिकल रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे लोकतंत्र को कुचलने वाली कार्रवाई बताया है.
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सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि के बड़े सवाल
अस्पताल के बाहर मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई को गलत बताया. उन्होंने कहा 'हाई कोर्ट ने केवल स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की बात कही थी. जबरन अस्पताल में भर्ती करने की नहीं. पुलिस कोर्ट के आदेश को गलत तरीके से पेश कर रही है.
गीतांजलि ने बताया कि अस्पताल प्रशासन जो पोटैशियम लेवल 2.9 बता रहा है, वह एक दिन पहले 4.3 था. इतनी जल्दी इतनी गिरावट नहीं हो सकती. इसलिए वे बिना क्रॉस-चेक किए कोई दवा नहीं लेंगी और बाहर की स्वतंत्र लैब से टेस्ट करवाएंगी. उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन उन्हें मेडिकल रिपोर्ट भी नहीं दे रहा है.
उन्होंने साफ किया कि वांगचुक अभी भी उपवास पर हैं. वह कोई शुगर या इलेक्ट्रोलाइट्स नहीं ले रहे हैं. सिर्फ नमक-पानी ले रहे हैं. उन्होंने सीएमओ को डिस्चार्ज के लिए एप्लीकेशन दी है और कहा कि यह कोई कम्युनिस्ट देश नहीं है जहां सरकार तय करे कि मरीज किस अस्पताल में जाएगा. यह एक नागरिक की निजी पसंद है.
बीजेपी सरकार नहीं अहंकार है-अखिलेश यादव
इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर केंद्र सरकार को घेरा. अखिलेश ने लिखा 'सोनम वांगचुक को बल प्रयोग करके जबरदस्ती आमरण अनशन स्थल से उठाना अत्यंत निंदनीय है. पूरे देश में इसे लेकर आक्रोश है. अखिलेश ने दिल्ली पुलिस से मांग की कि सादी वर्दी में कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान सार्वजनिक की जाए और वांगचुक का इलाज न्यायिक निगरानी में हो, क्योंकि उनका जीवन देश के पर्यावरण, विज्ञान और युवाओं के लिए बहुत कीमती है.
अखिलेश ने आगे कहा कि इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक छवि को नुकसान पहुंचाया है. बीजेपी सरकार नहीं बल्कि अहंकार बन चुकी है. यह जहां भी एकता और सौहार्द देखती है, वहां डरकर आंदोलनों को तितर-बितर कर देती है. लेकिन वे भूल रहे हैं कि आज की नई पीढ़ी डिजिटल यूनिटी के जरिए वैचारिक क्रांति लाने में सक्षम है.
बीजेपी देश के लिए सफेद चादर का कफ़न लाई है-डिंपल यादव
बता दें कि कुछ दिन पहले खुद अखिलेश यादव ने सोनम वांगचुक से फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना था. साथ ही उनसे अनशन खत्म करने की अपील की थी. सपा के कई बड़े सांसद और नेता लगातार जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं. मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने भी वहां पहुंचकर आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की और बैक टू बैक दो पोस्ट के जरिए सरकार को घेरा.
पहले पोस्ट में लिखा 'सोनम वांगचुक को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है. भाजपा सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं. यह पूरी तरह तानाशाही है.' दूसरे पोस्ट में तीखा प्रहार करते हुए कहा 'बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफ़न लेकर आए हैं. जब शांतिपूर्ण आवाजों को दबाया जाता है तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं. सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज दबाना देश की आत्मा को दबाना है.'
विपक्ष के भारी विरोध और सोनम वांगचुक के परिवार द्वारा मेडिकल रिपोर्ट्स को चुनौती दिए जाने के बाद अब यह मामला और तूल पकड़ता जा रहा है. समाजवादी पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस आंदोलन में वांगचुक के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार इस बढ़ते सियासी दबाव पर क्या कदम उठाती है.
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