जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचते ही आजम खान की पत्नी ने किया ये काम, मामले में कांग्रेस सांसद की भी हो गई एंट्री

यूपी तक

• 02:54 PM • 17 Jul 2026

आजम खान की पत्नी डॉ. तजीन फातिमा ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है.

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Jauhar University: रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने आजम खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को अवैध बताते हुए उन्हें ढहाने का फरमान जारी कर दिया है. इस फैसले के बाद से यूपी की सियासत में उबाल आ गया है. आजम खान की पत्नी और पूर्व विधायक डॉ. तजीन फातिमा ने इस कार्रवाई को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और 'बदले की भावना' से की गई कार्रवाई बताया है. 

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तजीन फातिमा खुद जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचीं और आगे की कानूनी रणनीति पर विचार किया. इलाहाबाद हाई कोर्ट में रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के आदेश को चुनौती देने की कानूनी रणनीति पर मैनेजमेंट और SP नेताओं से बात की.

"सब कुछ पहले से तय था..."

सपा नेताओं का आरोप है कि प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए सुनवाई कर रहा था. स्थानीय सपा नेता आसिम राजा ने दावा किया कि हमने अपना पक्ष रखा, लेकिन हमारे जाने के महज 10 मिनट के भीतर ही फैसला सुनाकर प्रेस रिलीज जारी कर दी गई. तजीन फातिमा ने मीडिया से बातचीत में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, 

"हमारे पास कोर्ट का स्पष्ट आदेश है, जिसने हमें अपील के लिए 15 दिन का समय दिया है. इसके बावजूद कैंपस में पुलिस तैनात कर दी गई है. यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह दुर्भावना और बदले की नीयत से की जा रही है."

यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि जब ये इमारतें बनी थीं, तब यह इलाका आरडीए (RDA) के अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं था. हालांकि, प्राधिकरण ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया है.

विपक्ष का तीखा वार

यूनिवर्सिटी पर इस एक्शन को लेकर अब विपक्ष भी एकजुट हो रहा है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि किसी शिक्षण संस्थान को गिराना युवाओं के भविष्य को बुलडोजर से कुचलने जैसा है. 

उन्होंने कहा कि अगर नक्शे में कोई कमी थी, तो जुर्माना लगाकर उसे ठीक किया जा सकता था, न कि सीधे गिराने का आदेश दिया जाता. उधर, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी आरोप लगाया कि बीजेपी शिक्षा को सांप्रदायिक चश्मे से देख रही है.

दूसरी तरफ, बीजेपी के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि जब आजम खान सत्ता में थे, तब वह खुद को किसी राजा से कम नहीं समझते थे और नियमों को ताक पर रखकर काम करते थे.

सड़क को लेकर भी छिड़ा है नया विवाद

यह आदेश ऐसे समय पर आया है, जब महज एक दिन पहले ही पीडब्ल्यूडी ने यूनिवर्सिटी कैंपस के बीच से गुजरने वाली 3 किलोमीटर लंबी फोर-लेन सड़क को 'सार्वजनिक सड़क' घोषित कर दिया है. वहां बकायदा बोर्ड भी लगा दिए गए हैं. अखिलेश सरकार के समय सरकारी पैसे से बनी यह सड़क लंबे समय से कानूनी विवाद में फंसी है.

साल 2006 में बनी जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कई सालों से जमीन कब्जे, लीज के उल्लंघन और अवैध निर्माण के आरोपों से घिरी हुई है. अब देखना यह होगा कि क्या कोर्ट से आजम खान के परिवार को राहत मिलती है या फिर यूनिवर्सिटी की इन इमारतों पर वाकई बुलडोजर चल जाएगा.