Mood Kya Hai Moradabad: उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तपिश अभी से चरम पर पहुंचने लगी है. कौन जीतेगा, किसकी सरकार बनेगी और जमीनी स्तर पर जनता का मिजाज क्या है, इसी को समझने के लिए यूपी Tak की टीम मुरादाबाद पहुंची. हमारे खास शो 'मूड क्या है' में मुरादाबाद के वरिष्ठ और जमीनी पत्रकारों ने यहां की सभी 6 विधानसभा सीटों का ऐसा विश्लेषण किया है. पत्रकारों के मुताबिक साल 2027 का रण मुरादाबाद में सपा और भाजपा दोनों के लिए 'लड़ो या मरो' जैसी स्थिति पैदा करने वाला है. हालांकि हाल ही में हुए कुंदरकी उपचुनाव की जीत ने भाजपा को एक नई संजीवनी दी है जिसके बाद यहां का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है.
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मुरादाबाद का मौजूदा समीकरण
वरिष्ठ पत्रकारों ने बताया कि साल 2022 के नियमित विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद की कुल 6 सीटों में से 5 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल की थी. वहीं भाजपा के खाते में सिर्फ 1 सीट (मुरादाबाद नगर) गई थी. लेकिन हाल ही में हुए कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव में बाजी पलट गई और वह सीट भी भाजपा के खाते में चली गई.
2027 का अनुमान
पत्रकारों के विश्लेषण के अनुसार, आगामी चुनाव में भी मुकाबला बेहद कड़ा रहेगा और सीटों का यह अनुपात 4 और 2 के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ सकता है.
कांठ सीट पर कमाल अख्तर का दबदबा
मुरादाबाद मंडल की सियासत में समाजवादी पार्टी के कांठ से विधायक कमाल अख्तर को एक बेहद मजबूत और चालाक रणनीतिकार माना गया है. चर्चा के दौरान पत्रकारों ने कमाल अख्तर को लेकर एक बड़ी बात कही. पत्रकारों के मुताबिक, मुरादाबाद लोकसभा सीट से रुचि वीरा को न सिर्फ सपा का टिकट दिलवाने में बल्कि उन्हें चुनाव जितवाकर संसद भेजने में भी कमाल अख्तर का बहुत बड़ा हाथ था.
जमीनी पकड़: कमाल अख्तर चुनाव लड़ना बहुत अच्छी तरह जानते हैं और आगामी चुनाव को देखते हुए वह लगातार अपने क्षेत्र में जनता के बीच एक्टिव हैं, जिससे कांठ में सपा की स्थिति मजबूत बनी हुई है. हालांकि यहां बहुसंख्यक जाट आबादी को साधने के लिए एनडीए गठबंधन आरएलडी (RLD) के किसी चेहरे पर भी दांव लगा सकता है.
विधायक नासिर कुरैशी का कट सकता है टिकट
मुरादाबाद देहात सीट हमेशा से समाजवादी पार्टी का अभेद्य गढ़ रही है. यहां कहा जाता है कि सपा का सिंबल लेकर कोई अकेले भी चल दे तो मुरादाबाद आते-आते हजारों गाड़ियों का काफिला जुड़ जाता है. लेकिन इस बार पत्रकारों ने यहां बड़ा उलटफेर होने की आशंका जताई है.
जनता की नाराजगी: वर्तमान सपा विधायक नासिर कुरैशी को लेकर जमीनी रिपोर्ट अच्छी नहीं है. वह मूल रूप से एक बड़े व्यापारी हैं और जनता का आरोप है कि वह जीतने के बाद अपने क्षेत्र के गांवों में नालियों, सड़कों और जनसमस्याओं को देखने नहीं आए.
बदलाव के आसार: इसी एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) के चलते चर्चा में सामने आया कि इस बार सपा नासिर कुरैशी का टिकट काट सकती है. यह सीट गठबंधन के तहत कांग्रेस के खाते में भी जा सकती है.
कुंदरकी और बिलारी
कुंदरकी में विकास की बाढ़: उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद योगी सरकार ने कुंदरकी विधानसभा सीट पर पूरा जोर लगा दिया है. पत्रकारों के मुताबिक, पूरे मंडल के विकास बजट का करीब 40% हिस्सा अकेले कुंदरकी विधानसभा को मिला है. हालांकि हाल ही में तुर्क बिरादरी को लेकर आए बयानों के चलते भाजपा विधायक के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं.
बिलारी में सपा की गुटबाजी: बिलारी सीट पर वर्तमान में सपा के मोहम्मद फहीम विधायक हैं (जो आजम खान के करीबी हैं). लेकिन इस बार वहां समाजवादी पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी चरम पर है जिसका सीधा नुकसान सपा को उठाना पड़ सकता है और भाजपा या एनडीए के घटक दल इस त्रिकोणीय मुकाबले का फायदा उठा सकते हैं.
ठाकुरद्वारा सीट
ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट को लेकर पत्रकारों का अनुमान है कि पूर्व सांसद कुंवर सर्वेश सिंह के निधन के बाद भाजपा इस सीट पर उनके परिवार के ही किसी सदस्य को टिकट दे सकती है. सहानुभूति की लहर के दम पर भाजपा यह सीट निकालने में सफल हो सकती है. हालांकि आरएलडी के प्रभारी मंत्री का क्षेत्र होने के कारण आरएलडी भी इस सीट पर अपना पूरा दम दिखाएगी.
मुख्यमंत्री योगी का वो मंच वाला बयान
पूरी चर्चा के दौरान पत्रकारों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस आक्रामक बयान का भी जिक्र किया जो उन्होंने मुरादाबाद के मंच से दिया था. सीएम ने साफ कहा था कि 'जहां भाजपा का विधायक है वहां विकास की लहर है और जहां भाजपा का विधायक नहीं है (सपा का है) वहां विकास ठप है.' मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की थी कि यदि वे अपने क्षेत्र का संपूर्ण विकास चाहते हैं तो अगली बार भी उन सीटों से भाजपा के ही विधायक चुनकर लखनऊ भेजें.'
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