कौन हैं अमन सिंह बिष्ट जो प्रतीक यादव के रिश्तेदार, करीबी दोस्त और बिजनेस पार्टनर थे?

Aaj ka UP: यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में देखिए सूबे की तीन बड़ी खबरें. प्रतीक यादव के निधन के बाद उनकी अस्थियां हरिद्वार ले जाई जा रही हैं. जानिए उनके बिजनेस पार्टनर और साले अमन सिंह बिष्ट की कहानी.

Aman Singh

कुमार अभिषेक

• 09:49 AM • 16 May 2026

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Aaj ka UP: यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सबसे सटीक और गहरा विश्लेषण लेकर हाजिर है. आज के इस विशेष एपिसोड में हम उत्तर प्रदेश की तीन बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खबरों का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं. पहली खबर, दिवंगत प्रतीक यादव के निधन के बाद उनकी अस्थियों को हरिद्वार ले जाने की तैयारियों और उनके सबसे भरोसेमंद बिजनेस पार्टनर व साले अमन सिंह बिष्ट की अनसुनी कहानी से जुड़ी है. दूसरी खबर में हम आपको दिखाएंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का यूपी के मंत्रियों पर क्या असर हुआ है और कैसे कुछ नेता साइकिल-मोटरसाइकिल पर आ गए हैं. तीसरी खबर वाराणसी से है जहां पीएम मोदी के इस नियम की धज्जियां उड़ाते हुए एक नए मंत्री जी का विशाल काफिला खुद ही लंबे ट्रैफिक जाम में फंस गया और अब सोशल मीडिया पर भारी ट्रोल हो रहा है.

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प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा और साले अमन सिंह बिष्ट के साथ 'याराना'

प्रतीक यादव के असामयिक निधन के बाद पूरा सैफई परिवार और यूपी की जनता स्तब्ध है. कल प्रतीक यादव की अस्थियां पवित्र नगरी हरिद्वार ले जाई जा रही हैं जिसकी जिम्मेदारी अपर्णा यादव के सगे भाई अमन सिंह बिष्ट, शिवपाल यादव के बेटे अक्षय यादव और तेज प्रताप यादव संभाल रहे हैं.

इस बीच प्रतीक यादव के रियल स्टेट साम्राज्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं. दरअसल, अमन सिंह बिष्ट सिर्फ प्रतीक के साले नहीं बल्कि उनके सबसे करीबी दोस्त, जिम पार्टनर और बिजनेस के सबसे बड़े 'फ्रंटमैन' रहे हैं. साल 2011 में शादी के बाद शुरू हुई यह दोस्ती इतनी गहरी थी कि प्रतीक की दर्जनों कंपनियों का चेहरा अमन ही थे. जब प्रतीक को रियल स्टेट में करोड़ों का नुकसान हुआ या जब मुलायम सिंह यादव और अपनी माताजी के जाने के बाद वे गहरे डिप्रेशन में गए तब अमन साए की तरह उनके साथ खड़े रहे. अब जबकि प्रतीक की दोनों बेटियां छोटी हैं यह माना जा रहा है कि अपर्णा यादव के बिहाफ पर अमन ही इस पूरे बिजनेस एम्पायर को आगे संभालेंगे.

2. पीएम मोदी की अपील का असर— मंत्रियों की 'साइकिल और बाइक' पॉलिटिक्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के नेताओं और मंत्रियों से अपील की थी कि वे ईंधन (पेट्रोल-डीजल) बचाने के लिए अपने काफिलों को छोटा करें और खुद एक मिसाल पेश करें. पीएम मोदी ने खुद केवल दो गाड़ियों के काफिले के साथ चलकर एक उदाहरण सेट किया. इसका असर उत्तर प्रदेश के मंत्रियों और विधायकों पर भी देखने को मिला है. यूपी के वरिष्ठ मंत्री सुरेश खन्ना बड़ी गाड़ियों को छोड़कर साइकिल चलाकर अपने दफ्तर पहुंचे. वहीं, मंत्री दानिश आजाद अंसारी मोटरसाइकिल से सफर करते दिखे. सहारनपुर के नकुड़ से विधायक मुकेश चौहान रेलवे स्टेशन से रिक्शा लेकर अपने घर रवाना हुए.  सोशल मीडिया पर इन मंत्रियों की तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं और वे खुद को पीएम की इस मुहिम का हिस्सा बता रहे हैं. हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक दिन की पीआर एक्सरसाइज है या यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा?

3. वाराणसी में उड़ गई नियमों की धज्जियां- जाम में फंसे नए मंत्री जी

एक तरफ जहां लखनऊ में मंत्री साइकिल और बाइक की सवारी कर रहे हैं. वहीं प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से इसके उलट एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई. वाराणसी के जिला अध्यक्ष और नवनिर्वाचित एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, जिन्हें हाल ही में मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है, एक विशाल काफिले के साथ वाराणसी पहुंचे.

प्रधानमंत्री की 'नो काफिला' अपील के ठीक विपरीत, नए मंत्री जी की गाड़ियों का हुजूम इतना लंबा था कि वे खुद ही वाराणसी की सड़कों पर लगे भीषण ट्रैफिक जाम में फंस गए. स्थानीय लोगों ने इस भारी-भरकम काफिले और जाम के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिए. अब पीएम मोदी के सबसे करीबी नेताओं में शुमार हंसराज विश्वकर्मा इंटरनेट पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं कि आखिर मंत्री बनते ही वे प्रधानमंत्री के ही संदेश को कैसे भूल गए.