प्रतीक यादव की मौत पर बड़ा मोड़! NHRC पहुंची शिकायत, हत्या की आशंका ने बढ़ाया सस्पेंस

यूपी तक

14 May 2026 (अपडेटेड: 18 Jul 2026, 10:21 PM)

Prateek Yadav Death Case: मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की दहलीज तक पहुंच गया है. एक एनजीओ (NGO) द्वारा दर्ज कराई गई इस शिकायत में मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है.

Prateek Yadav (File Photo)

Prateek Yadav (File Photo)

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Prateek Yadav Death Case: मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की दहलीज तक पहुंच गया है. एक एनजीओ (NGO) द्वारा दर्ज कराई गई इस शिकायत में मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है. इस घटनाक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:

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प्रतीक यादव मौत मामला

प्रतीक यादव की अचानक हुई मौत अब कानूनी मोड़ लेती नजर आ रही है. मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था डीके फाउंडेशन ने इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है. संस्था ने प्रतीक यादव की मौत को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई घटना बताते हुए हत्या की आशंका जताई है और मामले की स्वतंत्र व उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है.
सुसाइड नहीं, हत्या का शक

याचिका में क्या तर्क दिए गए हैं?

डीके फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं. संस्था का कहना है कि शुरुआती तौर पर प्रतीक यादव की मौत की वजह कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स बताई जा रही है, लेकिन शरीर पर मिले कथित चोट के निशान और मौत की अचानक हुई घटना कई संदेह पैदा करती है. याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रतीक यादव अपनी फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के लिए जाने जाते थे, इसलिए उनकी मौत की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है. संस्था ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मामले की जांच के लिए तुरंत विशेष जांच दल (SIT) गठित करने, लखनऊ के सिविल अस्पताल और संबंधित रूट के सभी सीसीटीवी फुटेज को न्यायिक अभिरक्षा में लेने और फॉरेंसिक जांच केंद्रीय प्रयोगशाला के जरिए कराने की मांग की है, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष रह सके.
जांच के घेरे में 'संदिग्ध' मौत

बता दें कि प्रतीक यादव का निधन 13 मई की सुबह हुआ था, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत की वजह हार्ट और फेफड़ों की गति रुकना बताई गई थी. हालांकि, अब मानवाधिकार आयोग में हुई इस शिकायत के बाद प्रशासन और जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ सकता है. 'डीके फाउंडेशन' ने इस पूरी घटना को संदिग्ध मानकर न्याय की मांग की है.