नए मंत्रियों को विभाग नहीं मिला तो भड़के अखिलेश यादव, यूपी में नए मंत्रिमंडल पर सियासत हुई तेज

संतोष शर्मा

17 May 2026 (अपडेटेड: 18 Jul 2026, 10:24 PM)

UP Politics News: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों को अब तक विभाग नहीं मिलने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.

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Akhilesh Yadav and OP Rajbhar (File Photo)

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UP Politics News: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों को अब तक विभाग नहीं मिलने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर तंज कसा, जिसके बाद सुभासपा अध्यक्ष और मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी तीखा जवाब दिया.

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अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मंत्रालयों के बंटवारे में हो रही देरी की वजह 'कमीशन और कमाई के बंटवारे को लेकर डबल इंजन की टक्कर' है. उन्होंने कहा कि नए मंत्री अभी सिर्फ दर्शक बने हुए हैं और जनता सरकार के हर फैसले पर नजर रखेगी. इसके अलावा अखिलेश यादव ने कहा कि जिन नए मंत्रियों को विभाग दिए जाएंगे, उनके कामकाज पर नजर रखी जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाले विभाग कमजोर हो चुके हैं और अब सोशल मीडिया तथा सिटिजन जर्नलिज्म के जरिए ही जनता को न्याय मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ऑडियो, वीडियो और अन्य दस्तावेजी सबूत भी जुटाए जाएंगे.


अखिलेश यादव की इस टिप्पणी पर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया. उन्होंने पूर्वांचली अंदाज में कहा कि अखिलेश यादव के परिवार में हाल ही में शोक का माहौल है, इसके बावजूद वह राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "तेरहवीं तक रुक जाइए, फिर विचारों की राजनीति कर लेंगे."


राजभर ने आगे कहा कि अगर अखिलेश यादव विभाग चाहते हैं तो वह सुभासपा में शामिल हो जाएं, वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात करके उन्हें मंत्री बनवा देंगे. उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा, 'बेगाने मंत्रिमंडल में अखिलेश दीवाना!'

इस मामले में उत्तर प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के शासनकाल में साढ़े तीन मुख्यमंत्री हुआ करते थे. उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारवाद की राजनीति करने वाले दल संगठन की प्रक्रिया को नहीं समझते और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं.