Pradeep Gupta on CM CM Yogi: उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में कुछ महिनों का समय बाकि है. इस बीच, देश की प्रतिष्ठित चुनावी सर्वे एजेंसी 'एक्सिस माय इंडिया' के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने उत्तर प्रदेश की सियासत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर एक बड़ा दावा किया है. समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने फिलहाल राज्य में 'कोई बड़ी समस्या' दिखाई नहीं दे रही है. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बहुत तेजी से बदल सकते हैं.
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'यूपी में संतुष्टि का स्तर अच्छा, लेकिन चीजें जल्दी बदलती हैं'
इंटरव्यू में यूपी के मौजूदा सियासी मिजाज पर बात करते हुए प्रदीप गुप्ता ने कहा, "उत्तर प्रदेश में, इस समय (जनता के बीच) संतुष्टि का गुणांक अच्छा है. उसके आधार पर देखा जाए तो फिलहाल कोई बड़ी समस्या नजर नहीं आती है. लेकिन उत्तर प्रदेश एक अलग तरह का राज्य है, वहां चीजें बहुत तेजी से बदलती हैं."
क्या 2027 के चुनाव में फिर चलेगा जाति का कार्ड?
जब प्रदीप गुप्ता से यह सवाल पूछा गया कि क्या 2027 की चुनावी जंग में जाति एक बार फिर निर्णायक कारक बनकर उभरेगी? तो उन्होंने कहा कि जाति चुनावी नतीजों को तय करने में अपनी भूमिका निभाती रहेगी, लेकिन इसके साथ ही सुशासन और एक मजबूत विकल्प का न होना भी मतदाताओं के व्यवहार को काफी प्रभावित करता है.
प्रदीप गुप्ता ने कहा, "जाति भी एक कारक बनी रहेगी. लेकिन लोग प्रदर्शन भी देखते हैं. लोग यह भी देखते हैं कि अगर यह सरकार अच्छा काम नहीं कर रही है, तो इससे बेहतर दूसरा कौन सा विकल्प उपलब्ध है? यह इसी तरह काम करता है." आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सत्तारूढ़ भाजपा राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश करेगी.
क्या था 2022 के विधानसभा चुनाव का गणित?
यूपी के पिछले चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 403 सीटों में से 255 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि उसके सहयोगियों को मिलाकर एनडीए (NDA) का कुल आंकड़ा 273 सीटों तक पहुंच गया था. वहीं, अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी 111 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी. इस चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ दो और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को महज एक सीट पर सिमटना पड़ा था.
यह दशकों में पहली बार हुआ था जब उत्तर प्रदेश में कोई मौजूदा सरकार दोबारा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटी थी, जिसने योगी आदित्यनाथ को लगातार दूसरा कार्यकाल सौंपा था. विपक्ष द्वारा महंगाई, बेरोजगारी और एंटी-इंकंबेंसी जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों के बावजूद, भाजपा की उस जीत को बड़े पैमाने पर उसके कल्याणकारी और विकास के एजेंडे को जनता के समर्थन के रूप में देखा गया था.
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