UP में पंचायत चुनाव को लेकर सामने आया लेटेस्ट अपडेट, OBC आरक्षण की राह साफ... अब कब डाले जा सकते हैं वोट?

UP Panchayat Chunav: योगी सरकार ने पांच सदस्यीय समर्पित ओबीसी आयोग का गठन किया. रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह बने अध्यक्ष. जानें कब होंगे यूपी में पंचायत चुनाव.

UP Panchayat Chunav Update

अंकित मिश्रा

• 09:37 AM • 21 May 2026

follow google news

UP Panchayat Chunav Update: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने की दिशा में आ रही सबसे बड़ी कानूनी और तकनीकी बाधा अब पूरी तरह दूर हो गई है. योगी सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पिछड़े वर्ग का कोटा तय करने के लिए एक नए 'समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन कर दिया है. प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना (नोटिफिकेशन) भी जारी कर दी गई है. सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है.

यह भी पढ़ें...

रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह को कमान, जानें कौन-कौन हैं टीम में शामिल

यह नया आयोग पूरी तरह समर्पित पांच सदस्यीय टीम के साथ काम करेगा, जिसका मुख्यालय राजधानी लखनऊ में बनाया गया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम औतार सिंह को इस आयोग की कमान सौंपी गई है और उन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है.

जस्टिस राम औतार सिंह के अलावा इस हाई-प्रोफाइल टीम में चार अन्य वरिष्ठ रिटायर्ड अधिकारियों को बतौर सदस्य शामिल किया गया है, जो जल्द ही अपना काम शुरू कर देंगे:

  1. जस्टिस राम औतार सिंह (रिटायर्ड) - अध्यक्ष
  2. बृजेश कुमार (रिटायर्ड अपर जिला जज) - सदस्य
  3. संतोष कुमार विश्वकर्मा (रिटायर्ड अपर जिला जज) - सदस्य
  4. डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया (रिटायर्ड आईएएस) - सदस्य
  5. एसपी सिंह (रिटायर्ड आईएएस) - सदस्य

क्यों पड़ी इस नए समर्पित ओबीसी आयोग के गठन की जरूरत? 

दरअसल, बीते दिनों हुई कैबिनेट की बैठक में योगी सरकार ने इस 'समर्पित ओबीसी आयोग' के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसके पीछे के कानूनी और तकनीकी कारणों को समझना बेहद जरूरी है. 

  • पुराने आयोग के पास नहीं थे अधिकार: उत्तर प्रदेश में पहले से मौजूद ओबीसी आयोग का मूल कार्यकाल अक्टूबर 2025 में ही समाप्त हो गया था. हालांकि, सरकार ने इसके कार्यकाल को एक साल आगे बढ़ाते हुए अक्टूबर 2026 तक के लिए कर दिया था, लेकिन कानूनी और संवैधानिक दृष्टिकोण से उस पुराने आयोग के पास 'समर्पित आयोग' के अधिकार प्राप्त नहीं थे.
  • सर्वे की वैधता का नियम: नियमों के मुताबिक, कोई भी ओबीसी आयोग अपने तीन साल के मूल कार्यकाल के दौरान ही आरक्षण से जुड़े सर्वे का काम कर सकता है. चूंकि पुराने आयोग का मूल समय पूरा हो चुका था, इसलिए वह चुनाव के लिए वैध सर्वे करने के योग्य नहीं रह गया था. इसी कानूनी पेच को सुलझाने और हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेशों का पूरी तरह अनुपालन करने के लिए योगी सरकार ने इस नए समर्पित आयोग का गठन किया है.

सर्वे रिपोर्ट के बाद तय होगा सीटों का गणित

अब यह नवनियुक्त समर्पित आयोग पूरे उत्तर प्रदेश में रैपिड सर्वे कराएगा और डेटा जुटाएगा. इसी सर्वे से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि पंचायतों में ओबीसी आरक्षण कितने प्रतिशत और किन-किन सीटों पर लागू होगा. अगर राज्य में ओबीसी वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण की सीमा पहले से ही निर्धारित है, लेकिन उसे जमीनी स्तर पर किस वार्ड या किस पद पर कैसे लागू करना है, यह इस आयोग की सर्वे रिपोर्ट ही तय करेगी. जब आयोग अपनी इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करके अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा, उसके बाद ही आरक्षण संबंधी आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी.

आखिर कब तक हो सकेंगे उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव? (संभावित तारीखें)

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तकनीकी तौर पर तय समय के अनुसार अप्रैल-मई के महीने में ही संपन्न हो जाने चाहिए थे. लेकिन समर्पित ओबीसी आयोग की अनुपस्थिति के कारण आरक्षण की शुरुआती प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी थी, जिसके चलते चुनावों में देरी हुई.

अब चूंकि आयोग का गठन हो चुका है, तो सवाल उठता है कि वोट कब डाले जाएंगे?

आयोग के गठन के बाद, पूरे प्रदेश में रैपिड सर्वे कराने, डेटा जुटाने, विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और फिर सरकार द्वारा आरक्षण की अंतिम लिस्ट जारी करने में तकरीबन पांच से सात महीने का लंबा समय लग सकता है. इन सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के पूरे होने के बाद, जब राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आधिकारिक रूप से चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा, तभी तारीखों का अंतिम ऐलान संभव होगा. इस पूरी समय-सीमा और तैयारी के गणित को देखते हुए यह प्रबल उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अक्टूबर-नवंबर तक कराए जा सकते हैं.