13 साल से अचेत हरीश राणा को मिलेगी इच्छा मृत्यु! अब उनके पिता अशोक राणा की ये बातें कलेजा चीर देंगी

Harish Rana Case: सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से वेजिटेटिव स्टेट में पड़े 32 वर्षीय हरीश राणा के इलाज को वापस लेने की अनुमति दे दी है. पिता अशोक राणा ने कहा कि तीन साल की कानूनी लड़ाई के बाद यह फैसला मिला और यह बेटे की पीड़ा को खत्म करने के लिए लिया गया कठिन निर्णय है.

यूपी तक

• 03:48 PM • 11 Mar 2026

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Harish Rana Case: सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है. पिछले 13 सालों से वेजिटेटिव स्टेट में जीवन बिता रहे हरीश के मेडिकल ट्रीटमेंट को वापस लेने की अनुमति अदालत ने दे दी है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हरीश राणा को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया जाए, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस फैसले के बाद हरीश के पिता अशोक राणा ने कहा कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चे के लिए ऐसा नहीं चाहता, लेकिन बेटे की पीड़ा देखकर उन्होंने यह कठिन फैसला लिया है. 

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पिता बोले - तीन साल से लड़ रहे थे यह कानूनी लड़ाई

हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका परिवार पिछले तीन सालों से इस मामले को लेकर अदालत में लड़ाई लड़ रहा था. उन्होंने कहा कि “हम परमात्मा का धन्यवाद करते हैं कि आज हमें न्याय मिला. कौन से माता-पिता चाहेंगे कि उनके बेटे के साथ ऐसा हो लेकिन हम चाहते थे कि उसे इस लंबे दर्द से मुक्ति मिले.” अशोक राणा ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ अपने बेटे के लिए ही नहीं, बल्कि उन कई अन्य लोगों के लिए भी था जो हरीश की तरह सालों से ऐसी स्थिति में पड़े हुए हैं. उनके मुताबिक, यह मामला पहले हाई कोर्ट में चला और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुचा, जहां आखिरकार उन्हें सफलता मिली. 

एम्स में होगी आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि हरीश राणा को एम्स दिल्ली में भर्ती कराया जाए और वहां सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए. परिवार के मुताबिक, इस बारे में आगे की सभी औपचारिकताओं पर शाम तक डॉक्टरों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा की जाएगी. 

पिता ने याद किए बेटे के सपने

अशोक राणा ने अपने बेटे की प्रतिभा और सपनों का जिक्र करते हुए बताया कि हरीश एक होनहार छात्र था. वह सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था और पढ़ाई में हमेशा टॉपर रहा था. उन्होंने कहा कि हरीश पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा था और वहां कई प्रतियोगिताएं जीत चुका था. परिवार को उससे बहुत उम्मीदें थीं और वह अपने करियर को लेकर काफी मेहनत कर रहा था.

13 साल पहले हुई थी दर्दनाक घटना

बता दें कि करीब 13 साल पहले गाजियाबाद का रहने वाला हरीश राणा पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ गया था. वह वहां एक कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था और हॉस्टल में रहता था. लेकिन एक दिन अचानक परिवार को सूचना मिली कि हरीश हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गया है. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया और डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया लेकिन गिरने की वजह से उसके सिर पर गंभीर चोट लग गई थी. इसी चोट के कारण वह कोमा में चला गया और बाद में वेजिटेटिव स्टेट में पहुंच गया. 

परिवार को उम्मीद थी कि समय के साथ हरीश की हालत में सुधार होगा लेकिन वह दिन कभी नहीं आया। साल 2013 से ही हरीश इसी स्थिति में है. इतने लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उसके शरीर पर घाव भी हो गए हैं. डॉक्टरों ने भी परिवार को बता दिया था कि उसके ठीक होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है.

बेटे की पीड़ा देखकर लिया कठिन फैसला

डॉक्टरों की राय सुनने के बाद हरीश के परिवार ने यह फैसला किया कि उन्हें अपने बेटे को इस पीड़ा भरी जिंदगी से मुक्त कर देना चाहिए. इसी कारण उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इच्छा मृत्यु की अनुमति के लिए याचिका दाखिल की थी. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद परिवार को कानूनी तौर पर यह अनुमति मिल गई है कि हरीश का इलाज वापस लिया जा सके. पिता अशोक राणा का कहना है कि यह फैसला उनके लिए बेहद भावनात्मक और कठिन था लेकिन उन्होंने यह कदम अपने बेटे की तकलीफ को देखते हुए उठाया. 

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