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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में खड़े हुए योगी सरकार के पूर्व मंत्री सुनील भराला, पत्र लिख कर दी ये बड़ी मांग

UP News: 'आज का यूपी' में देखें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे पॉक्सो के आरोप, रामभद्राचार्य संग उनकी पुरानी अदावत और योगी सरकार के मंत्री सुनील भराला का चौंकाने वाला स्टैंड.

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Sunil Bharala
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यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की महत्वपूर्ण हलचलों का सटीक विश्लेषण पेश करता है. आज के एपिसोड में हम राज्य की तीन ऐसी बड़ी खबरों का विश्लेषण कर रहे हैं जिन्होंने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. पहली खबर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे यौन शोषण के गंभीर आरोपों और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले की है. दूसरी खबर जगद्गुरु रामभद्राचार्य और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच वर्षों से चली आ रही उस ऐतिहासिक अदावत की है जो अब बेहद निजी और तीखे हमलों में बदल चुकी है. और तीसरी खबर योगी सरकार के ही एक दर्जा प्राप्त मंत्री सुनील भराला की है जो अपनी ही सरकार के खिलाफ शंकराचार्य के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण के संगीन आरोप

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक बेहद गंभीर विवाद में घिर गए हैं. जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोषानंद ने अदालत में एक वाद दायर कर शंकराचार्य पर नाबालिगों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके पास इस कृत्य से संबंधित पुख्ता साक्ष्य और सीडी मौजूद है, जिसे वे अदालत में पेश करेंगे. इन आरोपों ने न केवल संत समाज बल्कि आम जनता को भी चौंका दिया है. शंकराचार्य ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक 'दूषित मानसिकता वाला कार्टेल' बताया है और कहा है कि उन्हें फंसाने के लिए बेहद नीच स्तर की साजिश रची जा रही है.

रामभद्राचार्य बनाम अविमुक्तेश्वरानंद, दो बड़े संतों के बीच महायुद्ध!

शंकराचार्य और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच की यह लड़ाई आज की नहीं, बल्कि पिछले तीन-चार सालों से चली आ रही है. विवाद की शुरुआत तब हुई जब रामभद्राचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद को 'नकली शंकराचार्य' करार दिया. इसके जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने रामभद्राचार्य की पीठ की वैधता पर ही सवाल उठा दिए और उन्हें स्वयंभू संत तक कह डाला. बहस इतनी तल्ख हो गई कि अविमुक्तेश्वरानंद ने रामभद्राचार्य के लिए शारीरिक अक्षमता से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे रामभद्राचार्य काफी क्षुब्ध हुए. हाल ही में जब सरकार ने शंकराचार्य को नोटिस दिया, तब भी रामभद्राचार्य ने सरकार के फैसले को सही बताते हुए अविमुक्तेश्वरानंद पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था.

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योगी सरकार के पूर्व मंत्री ही अपनी सरकार के खिलाफ?

इस पूरे विवाद में एक नया राजनीतिक मोड़ तब आया जब योगी सरकार के पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री पंडित सुनील भराला शंकराचार्य के समर्थन में खड़े दिखाई दिए. हालांकि उन्होंने यौन शोषण के मामले पर सीधी टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों (बटुकों) के साथ हुई मारपीट की जांच की मांग की है. सुनील भराला ने अपनी ही सरकार की पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दोषियों को सजा देने की बात कही है. यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शंकराचार्य खुद यह आरोप लगा चुके हैं कि उन्हें बदनाम करने की साजिश में उत्तर प्रदेश सरकार की भी कहीं न कहीं सहमति है.

यहां देखें पूरा वीडियो

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