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CM योगी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बोला था हमला, अब अखिलेश ने लिया शंकराचार्य का पक्ष और खूब सुनाया

UP News: यूपी में शंकराचार्य विवाद पर छिड़ा सियासी संग्राम! अखिलेश यादव ने सीएम योगी के बयान को बताया शाब्दिक हिंसा और पाप. पढ़ें योगी के तीखे सवाल और अखिलेश का पलटवार.

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Photo: CM Yogi and Akhilesh Yadav
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच सीधे वार-पलटवार के दौर में तब्दील हो गया है. विधानसभा में सीएम योगी द्वारा शंकराचार्य पद की गरिमा और कानून के शासन पर दिए गए बयान के बाद आज यानी शनिवार को सपा चीफ अखिलेश यादव ने X पर बिना नाम लिए मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है. अखिलेश यादव ने सीएम योगी के बयान को शाब्दिक हिंसा और पाप करार देते हुए सरकार को घेरा है. 

अखिलेश यादव का पलटवार, 'इंसान नहीं, अहंकार बोलता है'

सपा चीफ अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि 'परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में अपमानजनक अपशब्द बोलना न केवल शाब्दिक हिंसा है, बल्कि पाप भी है.' उन्होंने मेजें थपथपाने वाले भाजपा विधायकों को भी चेतावनी दी कि जनता सड़क पर उनका हिसाब करेगी.

अखिलेश यादव ने लिखा, "जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते, मुआवजे में भ्रष्टाचार करते हैं और अपने ऊपर लगे मुकदमे खुद हटवाते हैं, वो किसी और के धर्म-पद पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं." उन्होंने तंज कसा कि जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है, तो संस्कार विकार में बदल जाते हैं. अखिलेश ने यह भी कहा कि यह समाज को अपमानित करने की राजनीति है और आगामी चुनाव में जनता वोट के जरिए इसका जवाब देगी.

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सदन में क्या कहा था सीएम योगी ने?

इससे पहले शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में पहली बार इस विवाद पर चुप्पी तोड़ी थी. उन्होंने स्पष्ट किया था कि मर्यादाओं का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है और हर व्यक्ति कानून से बंधा है. 

सीएम योगी ने कहा था, "हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता. आदि जगत गुरु शंकराचार्य ने चार पीठों की स्थापना की थी और जो पात्र होगा, वही परंपरा के अनुसार मान्य होगा." उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि कोई भी आचार्य के रूप में जहां-तहां जाकर माहौल खराब नहीं कर सकता.

माघ मेले में हुई अव्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि 4.5 करोड़ की भीड़ में रास्ता ब्लॉक करना गैर-जिम्मेदाराना है. उन्होंने कहा, "मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए है. क्या कोई भी मंत्री या सपा अध्यक्ष का बोर्ड लगाकर कहीं भी घूम सकता है? एक सिस्टम होता है." मुख्यमंत्री ने सपा से पूछा था कि अगर वे उन्हें शंकराचार्य मानते हैं, तो वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज क्यों कराया था और एफआईआर क्यों दर्ज की थी? उन्होंने कहा कि सपा को इस नाम पर जनता को गुमराह करना बंद करना चाहिए.

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