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रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद में छिड़ा महायुद्ध! कब से चली आ रही है दोनों संतों के बीच अदावत?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और रामभद्राचार्य के बीच वर्षों पुरानी अदावत अब कोर्ट तक पहुंच गई है. जानें कैसे शुरू हुआ नकली शंकराचार्य और अपमानजनक टिप्पणियों का यह सिलसिला.

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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बीच छिड़ा यह 'शास्त्रार्थ' अब एक व्यक्तिगत और कानूनी युद्ध का रूप ले चुका है. यह विवाद तब भड़का जब रामभद्राचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति की शास्त्रीय वैधता को चुनौती देते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से 'नकली शंकराचार्य' करार दिया था. पलटवार में अविमुक्तेश्वरानंद ने भी रामभद्राचार्य की तुलसी पीठ की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े कर दिए और उन्हें स्वयंभू संत की संज्ञा दे दी थी. विवाद उस वक्त अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया जब अविमुक्तेश्वरानंद ने रामभद्राचार्य की शारीरिक अक्षमता को लेकर 'अंधा' और 'विकलांग' जैसे बेहद तल्ख और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया, जिससे रामभद्राचार्य और उनके अनुयायी गहरे तक आहत हुए थे.