जज के सामने ही कैदी शहजाद ने खोल दी पुलिस के फेक एनकाउंटर वाली पोल, मचा खूब बवाल
Deoband Jail Viral Video: देवबंद जेल से वायरल हुए वीडियो में कैदी शहजाद ने कथित फर्जी ‘हाफ एनकाउंटर’ और पुलिस प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं. एसीजीएम की पूछताछ के दौरान सामने आए दावों ने यूपी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि मामले की न्यायिक जांच जारी है.

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Deoband Jail Viral Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने उत्तर प्रदेश में कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ की बहस को फिर से हवा दे दी है. वीडियो में देवबंद जेल के अंदर एक न्यायिक अधिकारी घायल कैदियों से पूछताछ करते दिखाई दे रहे हैं. इसी दौरान एक कैदी शहजाद पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाता नजर आ रहा है. वीडियो सामने आने के बाद सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मच गई है और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
क्या है वायरल वीडियो का दावा?
बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब डेढ़ महीने पुराना है, जब देवबंद जेल में एसीजीएम परविंदर सिंह निरीक्षण के लिए पहुंचे थे. वीडियो में दिखता है कि घायल कैदियों को लाइन में खड़ा कर एक-एक से पूछताछ की जा रही है. इसी दौरान शहजाद नामक कैदी कथित एनकाउंटर की कहानी पर सवाल उठाते हुए दावा करता है कि उसे फंसाया गया.
शहजाद का कहना है कि वह अपनी पेशी के बाद बागपत से लौट रहा था तभी शामली के एक पार्क से पुलिस ने उसे उठा लिया. उसके मुताबिक, उसके मोबाइल की लोकेशन से सच्चाई सामने आ सकती है.
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थाने में मारपीट और जंगल में गोली
वीडियो में शहजाद आरोप लगाता है कि उसे थाने ले जाकर बुरी तरह पीटा गया, बिजली के झटके दिए गए और जबरन जुर्म कबूल करवाने की कोशिश की गई. उसका दावा है कि बाद में उसे जंगल में ले जाकर करीब 8 इंच की दूरी से उसके पैर में गोली मारी गई और फिर देसी कट्टे से फायर कर पूरी घटना को एनकाउंटर का रूप दिया गया. जब जज ने उससे पूछा कि गोली कैसे चली तो उसने बैठकर पूरी घटना को दोहराया. शहजाद ने पहले भी कोर्ट में कथित फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ याचिका दायर की थी.
पुलिस ने कहा मुठभेड़ में हुई जवाबी फायरिंग
पुलिस के मुताबिक, 19 नवंबर को शहजाद को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया था. प्रेस नोट के अनुसार, वह अपने साथी के साथ बाइक पर सवार था और चेकिंग के दौरान रुकने के बजाय पुलिस पर फायरिंग करने लगा. जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस का दावा था कि वह गोकशी के मामले में वांछित था. हालांकि, न्यायिक जांच शुरू होने के बाद शहजाद ने पूरे ऑपरेशन को पहले से रचा गया षड्यंत्र बताया है.
‘हाफ एनकाउंटर’ पर पुरानी बहस फिर तेज
उत्तर प्रदेश में कथित हाफ एनकाउंटर यानी आरोपियों के पैरों में गोली मारने की घटनाओं को लेकर पहले भी विवाद उठते रहे हैं. विपक्षी दल कई बार सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं. हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी एक मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की थी. जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा था कि उत्तर प्रदेश को पुलिस स्टेट नहीं बनने दिया जा सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि सजा देने का अधिकार पुलिस के पास नहीं, बल्कि न्यायालय के पास है. साथ ही आरोप लगाया गया कि कुछ अधिकारी प्रमोशन और प्रशंसा पाने के लिए ऐसी कार्रवाइयों का सहारा लेते हैं.
सियासत और सिस्टम पर सवाल
वायरल वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल गूंज रहा है कि क्या ‘हाफ एनकाउंटर’ एक ट्रेंड बनता जा रहा है. क्या जांच एजेंसियां निष्पक्ष हैं. और क्या न्यायिक निगरानी पर्याप्त है. हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी. फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है और पुलिस प्रशासन पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है.
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