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गीतकार मनोज मुंतशिर के गांव में पंचायत चुनाव से पहले ही ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, ग्राउंड रिपोर्ट चौंकान वाली है

Panchayat Chunav: अमेठी के प्रसिद्ध गीतकार मनोज मुंतशिर के गांव गौरीपुर (जगदीशपुर) में पंचायत चुनाव से पहले ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. यूपी Tak की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वीआईपी गांव होने के बावजूद यहां सड़कें, नालियां और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है.

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Panchayat Chunav: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में यूपी Tak की टीम अमेठी जिले के उस वीआईपी गांव पहुंची जिसकी पहचान दूर-दूर तक है. यह गांव है मशहूर गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर का पैतृक निवास गौरीपुर (जगदीशपुर). लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस शख्सियत ने अपनी लेखनी से अमेठी का नाम रोशन किया उनके अपने गांव की हालत आज बदहाली के आंसू रो रही है. चुनाव से ठीक पहले ग्रामीणों ने विकास के दावों की पोल खोलते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है.

मनोज मुंतशिर के पैतृक गांव गौरीपुर में जमीनी हकीकत जानने पहुंची टीम को ग्रामीणों ने अपनी आपबीती सुनाई. गांव वालों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि पिछले कई सालों से यहां विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगी है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो पक्की सड़कें हैं और न ही नालियों की सही व्यवस्था. बारिश के मौसम में हालत इतनी खराब हो जाती है कि एम्बुलेंस तक गांव के अंदर नहीं आ पाती. यहां तक कि शव को ले जाने वाले रास्तों पर भी जलजमाव की समस्या बनी रहती .

स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों का आरोप है कि ब्लॉक स्तर पर पोर्टल पर तो काम पूरा दिखाया जाता है और बजट भी पास हो जाता है. लेकिन धरातल पर कुछ नजर नहीं आता.पंचायत भवन और सार्वजनिक शौचालय जैसी सरकारी इमारतें जर्जर स्थिति में हैं. ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों और प्रतिनिधियों को जब अपनी धौंस जमानी होती है तो वे मनोज मुंतशिर के नाम का इस्तेमाल करते हैं.लेकिन जब गांव के विकास की बात आती है तो वे चुप्पी साध लेते हैं.गांव की महिलाओं ने शिकायत की कि आज भी वे टूटे हुए घरों में रहने को मजबूर हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ भी पात्र लोगों तक नहीं पहुंच रहा है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि इस बार के पंचायत चुनाव में वे बदलाव के मूड में हैं. वे किसी लालच या वादों के जाल में फंसने के बजाय अब धरातल पर काम देखना चाहते हैं.

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