वाराणसी होटल के कमरे नंबर 2005 में सगे भाई-बहन ने एक साथ दी थी जान, अब इसमें मोक्ष और तेरहवीं वाला एंगल चौंका देगा
Varanasi Double Suicide Case: वाराणसी के होटल सिटी इन में हैदराबाद के सगे भाई-बहन ने कथित रूप से विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली. माता-पिता और बड़ी बहन की मौत के बाद अकेले रह गए दोनों ने बहन की तेरहवीं के दिन यह कदम उठाया. पुलिस मोक्ष की मान्यता के एंगल से भी जांच कर रही है.
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Varanasi Double Suicide Case: धर्मनगरी काशी से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. यहां हैदराबाद से आए सगे भाई-बहन ने वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन के सामने स्थित एक होटल के बंद कमरे में विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पिछले एक साल में माता-पिता और फिर 28 जनवरी को बड़ी बहन की मौत के बाद दोनों पूरी तरह अकेले रह गए थे. बताया जा रहा है कि गहरे सदमे और मानसिक आघात के चलते उन्होंने ये कदम उठाया है. चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों ने अपनी बड़ी बहन की तेरहवीं के दिन ही जान दी. पुलिस जांच में काश्यां मरणं मुक्तिः यानी काशी में मृत्यु से मोक्ष की मान्यता का एंगल भी सामने आ रहा है.
क्या है पूरा मामला?
मंगलवार को वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के परेड कोठी इलाके में स्थित कैंट रेलवे स्टेशन के सामने होटल सिटी इन से एक सनसनीखेज मामला सामने आया था. यहां हैदराबाद (सिकंदराबाद) के सीताफल मंडी निवासी गणेश गौड़ गुनलापल्ली (46) और उनकी बहन धनलक्ष्मी गुनलापल्ली (38) होटल के कमरा नंबर 2005 में ठहरे हुए थे. दोनों सगे भाई-बहन होटल के कमरे में पिछले कुछ तीन दिनों से रह रहे थे. बताया जा रहा है कि बंद कमरे के अंदर दोनों ने कथित रूप से विषाक्त पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या कर ली. कमरे की तलाशी के दौरान टेबल पर दवाइयां बिखरी मिलीं और कई दवाओं के खाली रैपर भी बरामद हुए थे.
पुलिस ने जब सामान की जांच की तो पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट, लैपटॉप और 6 लाख 61 हजार रुपये नकद मिले. इसके अलावा एक छोटा सा सुसाइड नोट भी मिला, जिस पर अंग्रेजी में लिखा था कि “सॉरी, फॉरगिव अस”. दस्तावेजों के आधार पर दोनों की पहचान सगे भाई-बहन के रूप में हुई थी.
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बड़ी बहन की तेरहवीं के दिन उठाया कदम
जांच के दौरान सामने आया कि दोनों भाई-बहन ने अपनी बड़ी बहन की तेरहवीं के दिन ही आत्महत्या की है. उनकी बड़ी बहन का निधन 28 जनवरी को हुआ था और उसी शोक के माहौल के बीच उन्होंने यह कदम कदम उठा लिया.
डीसीपी काशी गौरव बंसवाल ने बताया कि कॉल डिटेल खंगालने पर मृत महिला की एक करीबी मित्र से बातचीत हुई. उन्होंने खुलासा किया कि पिछले साल ही दोनों के माता-पिता का देहांत हो चुका था. माता-पिता को खोने के बाद अभी वे संभल भी नहीं पाए थे कि 28 जनवरी को बड़ी बहन की भी मौत हो गई. लगातार एक-एक कर परिवार के सदस्यों को खोने के बाद दोनों भाई-बहन पूरी तरह अकेले पड़ गए थे. पुलिस को आशंका है कि इस गहरे पारिवारिक सदमे और मानसिक झटके ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया, जिसके चलते उन्होंने यह दर्दनाक फैसला लिया.
मोक्ष की मान्यता का भी है एंगल
पुलिस को मृतकों के बैग से एक अस्थि कलश और डेथ सर्टिफिकेट भी मिला है. इससे आशंका जताई जा रही है कि दोनों अपनी बड़ी बहन के अस्थि विसर्जन के लिए काशी आए थे. पुलिस के मुताबिक, वाराणसी में जब दक्षिण भारत से आए तीर्थयात्रियों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं सामने आती हैं तो “काश्यां मरणं मुक्तिः” की मान्यता चर्चा में आ जाती है.पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि संभवतः दोनों का मानना था कि काशी में मृत्यु से मोक्ष प्राप्त होता है. इसी आस्था के चलते उन्होंने काशी में आकर जीवन समाप्त करने का निर्णय लिया हो. हालाकि, पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है.
आगे की जांच जारी
पुलिस मृतकों के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है. अगर 72 घंटे के भीतर कोई शव का दावा करने नहीं आता है तो पोस्टमार्टम की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी. डीसीपी काशी ने बताया कि अभी तक की जांच में परिवार में अकेले रह जाने और मानसिक आघात की वजह से आत्महत्या की आशंका प्रबल है. साथ ही मोक्ष प्राप्ति के लिए काशी आने का एंगल भी जांच के दायरे में है.
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