कोडीन कफ सिरप तस्करी में 5 और अरेस्ट, सबके नाम आए सामने पर मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल की कब होगी गिरफ्तारी?
codeine cough syrup smuggling syndicate: वाराणसी पुलिस की SIT ने कफ सिरप तस्करी के 40 करोड़ के सिंडिकेट का खुलासा किया. 25-25 हजार के 3 इनामी सहित 5 गिरफ्तार. बांग्लादेश भेजी जाती थी खेप.
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Varanasi News: कोडीन कफ सिरप तस्करी के सिंडिकेट के खिलाफ वाराणसी पुलिस की SIT को बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने इस मामले में 25-25 हजार रुपये के तीन इनामी अपराधियों समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि यह सिंडिकेट फर्जी ई-वे बिल के जरिए कागजों पर व्यापार दिखाकर करोड़ों रुपये के कफ सिरप की तस्करी बांग्लादेश तक करता था.
40 करोड़ की तस्करी कर 8 करोड़ का कमाया मुनाफा
जांच में खुलासा हुआ है कि पकड़े गए आरोपी फर्जी जीएसटी इनवॉइस और ई-वे बिल जेनरेट कर कफ सिरप का अवैध व्यापार करते थे. इन्होंने अब तक लगभग 25 लाख बोतलों की तस्करी की है, जिसकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये है. इस काले कारोबार से सिंडिकेट ने अब तक 8 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है. यह माल बाजार में उतारने के बजाय सीधे तस्करी के जरिए ठिकाने लगाया जाता था.
डीसीपी काशी, गौरव बंसवाल ने बताया कि इन गिरफ्तारियों के साथ अब तक कुल 18 आरोपी सलाखों के पीछे जा चुके हैं. ताजा कार्रवाई में गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से 46 विदेशी करेंसी और एक आईफोन भी बरामद हुआ है.
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गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान आई सामने
- अमित जायसवाल (25 हजार का इनामी, सिगरा, वाराणसी)
- दिवेश जायसवाल (25 हजार का इनामी, भेलूपुर, वाराणसी)
- अंकुश सिंह (25 हजार का इनामी, मूल निवासी रामपुर)
- अभिनव कुमार यादव (भेलूपुर, वाराणसी)
- घनश्याम (भेलूपुर, वाराणसी)
कैसे काम करता था यह सिंडिकेट?
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल है जो फिलहाल फरार है. शुभम अपने केबीएन प्लाजा स्थित ऑफिस में मीटिंग करता था, जिसमें तस्करी के रूट, हवाला के जरिए पैसे के लेनदेन और फर्जी फर्में खोलने की योजना बनाई जाती थी.
शुभम और उसका साथी प्रशांत उपाध्याय मिलकर विभिन्न लोगों के नाम पर फर्जी फर्में खुलवाते थे. इन फर्मों में आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से पैसा घुमाया जाता था और अंत में वह पैसा वापस शुभम को मिल जाता था. जब पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा में माल पकड़े जाने पर नोटिस मिलता था, तो शुभम के निर्देश पर फर्जी ई-वे बिल बनाकर जवाब भेज दिया जाता था ताकि कागजी तौर पर व्यापार वैध दिखे.
पुलिस को है अब मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल की तलाश
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ थाना कोतवाली में बीएनएस (BNS) की धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 8/21/29/26डी के तहत मामला दर्ज है. पुलिस अब मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल और सिंडिकेट के अन्य सदस्यों जैसे प्रशांत उपाध्याय, आकाश पाठक और मनोज यादव की तलाश में दबिश दे रही है.










