UP Political News: यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' है, जिसमें हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज के इस शो में उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाली तीन बड़ी खबरों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है, जिसमें पहली बड़ी खबर लखनऊ के मलीहाबाद में कंसा मंडी किले को लेकर पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच गहराता ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद है. दूसरी बड़ी खबर इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहे युवा सूरज पासी की 'लाखन आर्मी' और उनके सामाजिक से राजनीतिक सफर का उदय है. तीसरी बड़ी खबर इस पूरे घटनाक्रम के कारण समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (PDA) गठबंधन के सियासी समीकरणों पर पड़ने वाला असर और बीजेपी के कथित रणनीतिक प्लान का राजनीतिक विश्लेषण है.
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कसा मंडी किला विवाद: मजार बनाम प्राचीन शिव मंदिर की लड़ाई
लखनऊ के पास मलीहाबाद और काकोरी के इलाके में स्थित कंसा मंडी का किला इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति का नया केंद्र बन गया है. इस जर्जर किले को लेकर पासी समाज और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के बीच दावों का टकराव लगातार बढ़ रहा है.
पासी समाज का दावा: पासी बिरादरी का कहना है कि यह किला उनके पूर्वज और प्रतापी राजा महाराजा कंसा पासी का ऐतिहासिक महल है. समाज का दावा है कि इस परिसर के भीतर एक प्राचीन शिव मंदिर मौजूद था, जिसे कालांतर में मुस्लिम समुदाय ने अपने कब्जे में ले लिया.
मुस्लिम पक्ष का तर्क: दूसरी तरफ, स्थानीय मुस्लिम समाज इस जगह को मजार और कब्रें बता रहा है. उनका मानना है कि यह स्थल सालार गाजी मसूद के अनुयायियों और उनके बाद आए पीर (सूफी संतों) से जुड़ा हुआ है.
गजट का प्रमाण: लखनऊ के तकरीबन 125 साल पुराने सरकारी गजट में भी इस स्थल को महाराजा कंसा पासी का महल ही दर्ज किया गया है. वर्तमान में इस विवादित जगह पर तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि आगामी जुम्मे और बकरीद की नमाज के दौरान कोई अप्रिय घटना या अनहोनी न हो सके.
कौन हैं सूरज पासी? नशा मुक्ति से 'लाखन आर्मी' के गठन तक का सफर
कंसा मंडी विवाद के बीच जिस एक नए चेहरे की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह नाम है सूरज पासी का. सूरज पासी इस पूरे आंदोलन की रीढ़ बनकर उभरे हैं और युवाओं को अपने साथ जोड़कर इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं. सूरज पासी ने राजनीति या धार्मिक आंदोलन से पहले इलाके में फैले नशे के खिलाफ एक बड़े अभियान की शुरुआत की थी. पिछले कई सालों से चलाए जा रहे इस नशा मुक्ति अभियान के जरिए उन्होंने हजारों स्थानीय युवाओं को अपने साथ जोड़ा.
'लाखन आर्मी' का उदय
भीम आर्मी की तर्ज पर सूरज पासी ने 'लाखन आर्मी' (लाखन एकता मिशन) नाम के एक संगठन की स्थापना की. इस संगठन का मुख्य मोटो युवाओं को अपराध से दूर रखना और नशा मुक्त बनाना है. देखते ही देखते इस संगठन का विस्तार करीब 20 जिलों के हजारों जेंजी (Gen-Z) युवाओं तक हो गया.
लखनऊ का नाम ऐतिहासिक रूप से राजा लाखन पासी के नाम पर माना जाता है. अवध के इस पूरे क्षेत्र में कभी पासी राजाओं का साम्राज्य था, जिनके अवशेष पूरे क्षेत्र में बिखरे पड़े हैं. सूरज पासी अब इसी गौरवशाली इतिहास को समेटने और कंसा महाराज के किले को मुक्त कराने की मुहिम का नेतृत्व कर रहे हैं.
2027 का सियासी चक्रव्यूह, क्या बिखर जाएगा अखिलेश यादव का 'PDA' गठबंधन?
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के भीतर पासी बिरादरी ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के 'इंडिया गठबंधन' का समर्थन किया था. इसी मजबूत वोट बैंक के कारण बीजेपी यूपी में 60 सीटें जीतने के दावे से घटकर महज 33 सीटों पर सिमट गई थी. लेकिन अब इस नए विवाद ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह हिला दिया है.
अखिलेश के 'PDA' को झटका!
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (मुस्लिम) को मिलाकर 'PDA' का नारा दिया था. पर अब 'पासी बनाम मुसलमान' की इस सीधी धार्मिक लड़ाई के कारण यह मजबूत सियासी गठबंधन बिखरता हुआ दिखाई दे रहा है.
सपा सांसदों का घेराव करने की चेतावनी
आंदोलन की अगुवाई कर रहे सूरज पासी ने मोहनलालगंज के सपा सांसद आरके चौधरी और अयोध्या के सपा सांसद अवधेश प्रसाद से इस मुहिम में खुलकर साथ आने की मांग की है. उन्होंने सीधे तौर पर आह्वान किया है कि अगर पासी बिरादरी से आने वाले ये दोनों बड़े नेता उनके साथ खड़े होकर मजार को हटाने की मांग नहीं करते, तो लाखन आर्मी उनके घरों का घेराव करेगी. इससे समाजवादी पार्टी के सामने अपनी ही दो प्रमुख वोट बैंक (दलित और मुस्लिम) में से किसी एक को चुनने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
क्या पीछे है बीजेपी का कोई प्लान?
प्रत्यक्ष तौर पर इस पूरे विवाद में भारतीय जनता पार्टी कहीं भी सामने दिखाई नहीं दे रही है. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे एक गहरी सियासी रणनीति काम कर रही है. सूरज पासी ने अपने नशा मुक्ति अभियान की शुरुआत मोहनलालगंज के पूर्व भाजपा सांसद कौशल किशोर के साथ मिलकर की थी और वह लंबे समय से उनके संपर्क में रहे हैं. ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले उभरे इस मुद्दे ने यह तय कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातियों और धर्म के समीकरण एक बार फिर बदलने वाले हैं.
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