अभिजीत दीपके के पास ये किसका इस्तीफा पहुंच गया? लोग बजाने लगे तालियां

आयशा शेख़

24 Jul 2026 (अपडेटेड: 24 Jul 2026, 07:30 PM)

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के दौरान खुद को उत्तराखंड पुलिस का कांस्टेबल बताने वाले एक व्यक्ति ने मंच से नौकरी छोड़ने का दावा किया. इसके बाद उत्तराखंड पुलिस का भी रिएक्शन आया है.

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CJP Protest: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन में खाकी वर्दी पहने एक शख्स मंच पर पहुंचा. छात्रों का दर्द और सिस्टम की नाकामी देखकर उत्तराखंड पुलिस के इस कांस्टेबल शेर सिंह का गुस्सा ऐसा फूटा कि उसने भरी सभा में ही अपनी सरकारी नौकरी छोड़ने का दावा कर दिया.

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सिस्टम के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए इस जवान ने कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके को अपना इस्तीफा सौंपा. कथित तौर पर उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं की धांधली पर अपनी भड़ास निकाली और फिर वहां मौजूद हर युवा ताली बजाने लगे.

शेर सिंह के इस बयान के तुरंत बाद उत्तराखंड पुलिस की आईजी कुमाऊं रेंज निवेदिता कुकरेती का आधिकारिक बयान सामने आया. उन्होंने इस सिपाही के आपराधिक इतिहास का खुलासा कर दिया. इस्तीफे को लेकर भी नया खुलासा किया है.

"परचून की दुकान पर मिलते हैं पेपर"

उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल शेर सिंह ने बेहद गुस्से में कहा, 

"हमारे उत्तराखंड में परचून की दुकान पर मिलते हैं पेपर... परचून की दुकान पर पटवारी का! गुलगुल में देखा है हमने."

भगत सिंह के विचारों का किया जिक्र

कांस्टेबल ने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए अमर शहीद भगत सिंह को याद किया और कहा कि युवाओं को इस अन्याय से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. छात्रों से किसी भी तरह की हिंसा न करने की अपील की और कहा, 

"भगत सिंह ने कहा था दोस्तों- इस देश के युवाओं, जिंदगी अपने दम पर जी जाती है, दूसरों के दम पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं. घबराओ मत, ये भगत सिंह का देश है. क्रांति कभी बम और पिस्तौलों से नहीं आती, अहिंसा नहीं करनी है इन गुंडों को. हम देख लेंगे! क्रांति आती है विचारों से और विचार कभी मरते नहीं."

"अगर हक की लड़ाई लड़ना बागी होना है, तो हां हैं हम बागी!"

सिस्टम को सीधी चेतावनी देते हुए जवान ने कहा कि युवाओं के हक और अधिकार छीनकर उन्हें बागी बनने पर मजबूर किया जा रहा है. अपनी नौकरी त्यागने का ऐलान करते हुए  कहा, 

"आपका जो हमारे हक-अधिकार छीन के हमें बागी बनाना चाहते हो... अगर हक की लड़ाई लड़ना बागी होना है, तो हां, हैं हम बागी! और आज से उत्तराखंड पुलिस की नौकरी से मैं रिजाइन करता हूं. लगाओ हाथ... आज के बाद अभिजीत भाई के साथ हम बताएंगे तुम्हें कि लोकतंत्र कैसे चलता है!"

आईजी निवेदिता कुकरेती ने साफ तौर पर कहा, 

"कांस्टेबल शेर सिंह छात्रों को भड़काने के लिए बेबुनियाद बयानबाजी कर रहा है. इसके बारे में सच्चाई यह है कि वह 28 जून 2026 से पिथौरागढ़ जिले से बिना किसी इजाजत के गैरहाजिर चल रहा था. एसपी पिथौरागढ़ द्वारा नोटिस दिए जाने और जवाब न मिलने पर उसे 20 जुलाई 2026 को सस्पेंड किया जा चुका है."

पुलिस अधिकारी ने आगे खुलासा करते हुए बताया कि कांस्टेबल का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है. इसका एक साथी कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के साथ मिलकर संगठित अपराध में शामिल थे. ये मासूम लोगों को डरा-धमकाकर उनकी जमीनों पर कब्जा करते थे. इसे 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. यह कई महीने जेल में रहा और फिलहाल जमानत पर बाहर है. इसके खिलाफ पहले से ही बर्खास्तगी की कार्रवाई चल रही थी और अब इस भड़काऊ बयानबाजी के खिलाफ कानूनी व विभागीय कार्रवाई की जा रही है.