Mood kya hai Ayodhya: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा क्या बदल देगा अयोध्या का सियासी माहौल? पत्रकारों ने बता दिया

मयंक शुक्ला

24 Jul 2026 (अपडेटेड: 24 Jul 2026, 06:46 PM)

Mood kya hai Ayodhya: यूपी Tak के 'मूड क्या है' शो में अयोध्या की पांचों विधानसभा सीटों का चुनावी विश्लेषण किया गया. पत्रकारों ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद, मुआवजा, जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दों और 2027 चुनाव में जनता के बदलते मूड पर अपनी राय रखी.

Mood kya hai Ayodhya

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Mood kya hai Ayodhya: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही अयोध्या की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. राम मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी के मामले को विपक्ष द्वारा लगातार मुद्दा बनाए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इसका असर 2027 के चुनाव पर पड़ेगा? यूपी Tak की सीरीज 'मूड क्या है' शो में अयोध्या के पत्रकारों ने जिले की पांचों विधानसभा सीटों (अयोध्या, रुदौली, बीकापुर, मिल्कीपुर और गोसाईगंज) के सियासी समीकरणों और जनता के मूड पर खुलकर चर्चा की. पत्रकारों का मानना है कि चढ़ावा गबन का मामला और विकास के नाम पर मुआवजे की अनदेखी जैसे मुद्दे अंतिम पायदान पर खड़े मतदाताओं तक पहुंचे हैं जो सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं.

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चढ़ावा चोरी और गबन के आरोप का क्या होगा चुनावी असर?

अयोध्या के वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सिर्फ अयोध्या तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश भर के करोड़ों सनातनियों से जुड़ा हुआ मुद्दा है. विपक्ष इस मुद्दे को घर-घर तक पहुंचाने में काफी हद तक सफल रहा है. हालांकि पत्रकारों का एक वर्ग यह भी मानता है कि बीजेपी अपने मजबूत संगठनों आरएसएस, बीएचपी, बजरंग दल और नए राष्ट्रव्यापी मुद्दों के जरिए चुनाव तक माहौल को बदलने में माहिर है.

2024 लोकसभा चुनाव के झटके और मुआवजे का असंतोष

पत्रकारों ने याद दिलाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार के पीछे विकास कार्यों के दौरान प्रभावित हुए लोगों का आक्रोश बड़ा कारण था.रामपथ, एयरपोर्ट और सौंदर्यकरण की परियोजनाओं में जिन व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों के मकान-दुकान टूटे, उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलने का असंतोष आज भी कायम है.स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा जनता की सुनवाई न होना भी बीजेपी के प्रति नाराजगी का एक प्रमुख कारण रहा है.

कैंडिडेट, लोकल फैक्टर और जातीय समीकरण होंगे निर्णायक 

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने तीन सीटें अयोध्या, रुदौली, बीकापुर जीती थीं. जबकि दो सीटों मिल्कीपुर और गोसाईगंज पर सपा का कब्जा हुआ था. पत्रकारों के मुताबिक 2027 में मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है.

उम्मीदवार का चयन: जनता इस बार केवल पार्टी का झंडा देखकर नहीं बल्कि सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले और जनसमस्याएं उठाने वाले उम्मीदवार को चुनेगी.

दलित-पिछड़ा वर्ग और नए विकल्प: चंद्रशेखर आजाद की 'आजाद समाज पार्टी'की एंट्री से युवा,दलित और अति-पिछड़े मतदाताओं का समीकरण बदल सकता है.

गोसाईगंज का पेच: गोसाईगंज विधानसभा में सपा से बीजेपी में आए अभय सिंह और पूर्व विधायक खब्बू तिवारी दोनों के बीजेपी के साथ आने से पार्टी के भीतर का स्थानीय समीकरण भी दिलचस्प हो गया है.

अयोध्या के मीडिया दिग्गजों का निष्कर्ष है कि चुनाव तक भले ही राजनीतिक दल नए-नए दांव खेलेंगे. लेकिन इस बार जनता प्रत्याशियों के काम और स्थानीय जमीनी मुद्दों के आधार पर ही 2027 का फैसला सुनाएगी.

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