आजमगढ़ की गोपालपुर सीट पर सपा का दबदबा या बीजेपी करेगी सेंधमारी?

सुषमा पांडेय

• 04:43 PM • 24 Sep 2026

UP Kiska: आजमगढ़ की गोपालपुर सीट पर 2027 चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज है. सपा के मजबूत गढ़ के सामने बीजेपी की चुनौती है. यादव, दलित, मुस्लिम और गैर-यादव ओबीसी समीकरणों के साथ बाढ़, किसान, सड़क और विकास के स्थानीय मुद्दे अहम होंगे.

CM Yogi And Akhilesh Yadav

CM Yogi And Akhilesh Yadav (File Photo)

Google CTA

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की गोपालपुर विधानसभा सीट भले ही कागजों में कोई वीआईपी सीट न दर्ज हो लेकिन इसका राजनीतिक इतिहास और सामाजिक ताना-बाना इसे प्रदेश की सबसे दिलचस्प सीटों में से एक बनाता है. एक समय था जब इस सीट पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलती थी. लेकिन पिछले तीन विधानसभा चुनावों से (2012, 2017 और 2022) सपा ने इस सीट पर अपना अभेद्य किला तैयार कर रखा है.

यह भी पढ़ें...

मौजूदा विधायक नफीस अहमद के नेतृत्व में सपा जहां अपनी जीत का सिलसिला 2027 में भी बरकरार रखने का दावा कर रही है. वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव आंकड़ों और नए सामाजिक समीकरणों के सहारे बीजेपी इस किले में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश में है. क्या 2027 के चुनाव में सपा अपनी हैट्रिक के बाद चौथी बार कब्जा बरकरार रख पाएगी या बीजेपी यादव, दलित, मुस्लिम और गैर-यादव ओबीसी समीकरणों को साधकर बाजी पलटेगी?

गोपालपुर का सियासी इतिहास और हालिया चुनावी नतीजे

गोपालपुर सीट समय-समय पर बदलते राजनीतिक मूड की गवाह रही है. कांग्रेस, जनता दल, बीजेपी और बीएसपी सभी ने अलग-अलग दौर में यहां जीत दर्ज की है. 1996 और 2002 में सपा ने जीत हासिल की थी जिसे 2007 में बीएसपी के श्याम नारायण यादव ने तोड़ा. लेकिन 2012 के बाद से यह सीट पूरी तरह सपा के पाले में है.

2022 विधानसभा चुनाव का गणित

सपा (नफीस अहमद): 84,001 वोट (विजेता - 24,307 वोटों का अंतर)

बीजेपी (सत्येंद्र राय): 59,694 वोट (दूसरे स्थान पर)

बीएसपी (रमेश चंद्र यादव): 45,211 वोट (तीसरे स्थान पर)

AIMIM (अब्दुल्ला): 8,000+ वोट

2024 लोकसभा चुनाव का ट्रेंड

2024 के आजमगढ़ लोकसभा चुनाव ने गोपालपुर के सियासी गणित में एक नया आंकड़ा जोड़ दिया. आजमगढ़ सीट पर सपा के धर्मेंद्र यादव और बीजेपी के दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' के बीच मुकाबला हुआ था. गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र के भीतर सपा के धर्मेंद्र यादव को 99,606 वोट मिले जबकि बीजेपी के निरहुआ को 64,574 वोट प्राप्त हुए.

इस तरह 2024 में गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से सपा को करीब 35,000 वोटों की बढ़त मिली जो कि 2022 के 24000 वोटों के अंतर से भी अधिक है. यही बढ़ता ग्राफ 2027 के लिए बीजेपी की चिंता और सपा के उत्साह का मुख्य कारण है.

गोपालपुर का जातीय गणित (अनुमानित आंकड़े)

गोपालपुर के राजनीतिक समीकरणों में मुस्लिम-यादव (MY) और दलित वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

यादव: 64,000 - 68,000 (लगभग 33%)

दलित: 51,000 - 53,000 (लगभग 28%)

मुस्लिम: 41,000 - 42,000 (लगभग 13%)

अन्य ओबीसी व सवर्ण: राजभर (24,000)

बनिया:23,000)

ब्राह्मण:15,000)

क्षत्रिय:15,000)

भूमिहार:12,000 

मल्लाह/निषाद:11,000

प्रजापति: 10,000

चौहान:10,000)

पासी:10,000

सोनकर:7,000

चौरसिया:4,000

सपा जहां अपने परंपरागत MY समीकरण के साथ अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे और दलित वोटर्स के झुकाव के दम पर मजबूत दिखती है. वहीं बीजेपी गैर-यादव ओबीसी, सवर्ण और सेंधमारी के जरिए इस बड़े वोट बैंक को तोड़ने के दांव चल रही है.

सपा बनाम बीजेपी: क्या हैं दोनों दलों के दावे?

समाजवादी पार्टी का दावा: सपा संगठन का कहना है कि वे बूथ कमेटियों और वोटर लिस्ट की री-वेरिफिकेशन पर बारीकी से काम कर रहे हैं. उनका मानना है कि अखिलेश यादव की पीडीए (PDA) विचारधारा और पूर्ववर्ती सपा सरकार द्वारा जिले में किए गए बड़े विकास कार्यों (जैसे मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, चीनी मिल और फोरलेन सड़कें) के दम पर जनता दोबारा सपा को ही चुनेगी.

भारतीय जनता पार्टी का दावा

बीजेपी नेताओं का कहना है कि डबल इंजन सरकार (योगी-मोदी शासन) में 'सबका साथ, सबका विकास' के तहत बिना किसी पक्षपात के काम हो रहा है. निष्पक्ष चुनाव, संगठन की मजबूती और मतदाता पुनरीक्षण (SIR) के बाद फर्जी नामों के हटने से बीजेपी के कैडर वोट में बढ़ोतरी होगी. पार्टी का मानना है कि यदि मजबूत प्रत्याशी उतारा गया तो समीकरण पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में आ सकते हैं.

स्थानीय मुद्दे: बाढ़, गन्ना किसान और बाबा भैरवनाथ मंदिर

राजनीतिक बयानों से इतर गोपालपुर के जमीनी मुद्दे भी चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं. घाघरा नदी से सटा देवारा इलाका हर साल बाढ़ और कटान की समस्या से जूझता है. तटबंधों की मजबूती और पक्की सड़कों की मांग यहां का प्रमुख मुद्दा है. कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण यहां बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है. किसानों को अंबेडकर नगर या अन्य जिलों की मिलों (जैसे घोसी या सठियांव) पर निर्भर रहना पड़ता है जिससे स्थानीय स्तर पर चीनी मिल की मांग उठती रही है.

बाबा भैरवनाथ मंदिर (पर्यटन केंद्र): महाराजगंज स्थित पौराणिक बाबा भैरवनाथ मंदिर को बड़ा पर्यटन केंद्र बनाने और घाटों के सौंदर्यीकरण की मांग लगातार की जा रही है. बीजेपी और स्थानीय प्रशासन इसे पर्यटन के नक्शे पर लाने का प्रयास कर रहे हैं.

2027 के महासंग्राम में गोपालपुर का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि सपा अपने मजबूत गढ़ और पीडीए फॉर्मूले को कितना बचा पाती है और बीजेपी जमीनी मुद्दों व सामाजिक गोलबंदी के जरिए इस किले को ढहाने में कितनी कामयाब होती है.

ये भी पढ़ें: यूपी चुनाव से पहले ताजा सर्वे, अवध-बुंदेलखंड की 137 सीटों पर किसे मिलेगी बढ़त?