'अखिलेश ने कहा था कोई विधायक अयोध्या नहीं जाएगा...' मनोज पांडेय ने बताया सपा छोड़ने का पूरा किस्सा

कुमार अभिषेक

• 01:00 PM • 07 Nov 2026

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अयोध्या में आयोजित 'पंचायत आजतक' के मंच से कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.

Manoj Pandey

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Manoj Pandey News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय ने अयोध्या में आयोजित 'पंचायत आजतक' के मंच से कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने सपा छोड़ने के फैसले के पीछे भगवान राम और सनातन आस्था से जुड़े मुद्दों को अहम वजह बताया. मनोज पांडेय के मुताबिक उन्होंने करीब 30 साल तक समाजवादी पार्टी के साथ राजनीति की, लेकिन पार्टी में राम और आस्था से जुड़े मामलों पर जिस तरह का रुख अपनाया गया, उससे उन्हें असहजता महसूस हुई. उन्होंने कहा कि भगवान राम किसी एक राजनीतिक दल के नहीं हैं और आस्था को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. इस दौरान उन्होंने अखिलेश यादव, पीडीए, ब्राह्मण समाज, यूजीसी के नए नियमों और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपनी राय रखी.

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रामलला के दर्शन वाले फैसले से हुई आपत्ति

मनोज पांडेय ने समाजवादी पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा में हुई एक घटना का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्ताव आया था कि जो विधायक अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करना चाहते हैं, उनके लिए विधानसभा की ओर से व्यवस्था की जाएगी. उस समय वह सर्वदलीय बैठक का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी. मनोज पांडेय के मुताबिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सदन में खड़े होकर कहा था कि उनकी पार्टी का कोई भी विधायक अयोध्या दर्शन के लिए नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि इस फैसले से उन्हें आपत्ति थी, क्योंकि भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं. राम को किसी एक पार्टी से जोड़ना या उनके दर्शन को लेकर राजनीतिक रुख अपनाना उचित नहीं है. उनके मुताबिक इसी तरह के मुद्दों ने उन्हें पार्टी छोड़ने के फैसले की ओर बढ़ाया.

अखिलेश यादव को लेकर क्या कहा?

अखिलेश यादव के अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने के सवाल पर मनोज पांडेय ने कहा कि उन्हें किसी के भी मंदिर जाने या भगवान के दर्शन करने पर कोई आपत्ति नहीं है. भगवान राम सभी के हैं और राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यह बात कह चुके हैं कि राम मंदिर सबका है. वहां दर्शन करने के लिए किसी राजनीतिक दल का टिकट या विशेष अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. हालांकि, मनोज पांडेय ने सवाल उठाया कि जब पहले अयोध्या जाने और रामलला के दर्शन करने को लेकर आपत्ति जताई गई थी, तो अब दर्शन की बात क्यों की जा रही है? उनके मुताबिक आस्था कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे राजनीतिक जरूरत या सुविधा के हिसाब से अपनाया और छोड़ा जाए.

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राम के चरित्र में हर वर्ग को मिला स्थान

मनोज पांडेय ने कहा कि भगवान राम किसी जाति विशेष के नहीं हैं. उनके चरित्र में समाज के हर वर्ग के लोगों को जगह मिली है. उन्होंने निषादराज और केवट जैसे पात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान राम ने अपने आचरण के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश दिया. उनके मुताबिक राम और भारत के करोड़ों सनातनियों के बीच का रिश्ता जन्म से लेकर मृत्यु तक का है. इसे न तो कमजोर किया जा सकता है और न ही झुठलाया जा सकता है. उन्होंने अयोध्या को केवल धार्मिक नगरी मानने के बजाय करोड़ों लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बताया. मनोज पांडेय का कहना था कि भगवान राम को किसी राजनीतिक दल या जाति के दायरे में बांधना सही नहीं है. आस्था के विषय में सभी को सम्मान और एकरूपता का भाव रखना चाहिए.

पीडीए की परिभाषा पर मनोज पांडेय ने सपा को घेरा

पंचायत आजतक के मंच पर मनोज पांडेय ने समाजवादी पार्टी के पीडीए के नारे पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पीडीए की परिभाषा को लेकर अलग-अलग बातें सामने आती रहती हैं. इस सिलसिले में उन्होंने एक पत्रकार के लेख का हवाला दिया और तंज कसते हुए कहा कि पीडीए को समझने में कई लोगों की पूरी डायरी भर जाएगी, लेकिन इसकी व्याख्या खत्म नहीं होगी. उन्होंने कहा कि एक तरफ समाजवादी पार्टी पीडीए के नाम पर पंडितों को भी अपने साथ जोड़ने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के बड़े पदों पर बैठे लोगों की तरफ से ब्राह्मण समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं. उनके मुताबिक इस तरह के दोहरे रवैये से जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता.

मनोज पांडेय ने कहा कि देश दोहरी मानसिकता और दोहरे चरित्र से नहीं चल सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक सुविधा के हिसाब से कभी राम और कृष्ण का भक्त होने का दावा करना और फिर जरूरत पड़ने पर उन्हीं के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है. उनके मुताबिक आस्था के मामले में भी सम्मान और एकरूपता होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण को लेकर किसी भी तरह की दोहरी सोच नहीं होनी चाहिए. मनोज पांडेय ने समाजवादी पार्टी के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को अपनी सुविधा के हिसाब से धार्मिक आस्था के मुद्दों पर अलग-अलग रुख नहीं अपनाना चाहिए. उन्होंने इसे दोहरे रवैये से जोड़ते हुए जनता को गुमराह करने वाला बताया.

राम और कृष्ण को लेकर विवाद पर क्या बोले मनोज पांडेय?

बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान राम और कृष्ण को लेकर दिए गए बयान और उस पर अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर भी मनोज पांडेय ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण को आपस में बांटने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उनके नाम पर ब्रज और अवध के बीच विवाद खड़ा करना भी उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत में भगवान को मानने और उनकी आराधना करने की अलग-अलग परंपराएं रही हैं. सूरदास और कबीरदास जैसे संतों ने अपनी रचनाओं के जरिए भक्ति के अलग-अलग स्वरूपों को सामने रखा. कहीं भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया, तो कहीं उन्हें माता, बहन या प्रेम के रूप में देखा गया. मनोज पांडेय के मुताबिक भक्ति की इन परंपराओं को विवाद का विषय बनाने के बजाय उनका सम्मान किया जाना चाहिए.

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राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी पर सपा को घेरा

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मुद्दे पर मनोज पांडेय ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि रामचरितमानस और रामभक्तों का अपमान करने वाले लोग आज रामभक्ति और चंदा चोरी की बात कर रहे हैं. इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई का भी जिक्र किया. मनोज पांडेय ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सात दिन के भीतर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन पांचवें दिन ही पुलिस और एसटीएफ ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने कहा कि अपराध होना और अपराध के खिलाफ तत्काल प्रभावी कार्रवाई करना दो अलग-अलग बातें हैं. उनके मुताबिक किसी घटना के होने के साथ यह भी देखना चाहिए कि सरकार और पुलिस ने उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की.

2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का भी किया जिक्र

मनोज पांडेय ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने 2017 से पहले के प्रदेश का जिक्र करते हुए उस दौर में दंगों, आतंकवाद और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं की बात कही. इसके मुकाबले उन्होंने मौजूदा सरकार में प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने का दावा किया. उन्होंने कहा कि अपराध होने और अपराध पर सरकार की ओर से की जाने वाली कार्रवाई को एक नजर से नहीं देखा जा सकता. राम मंदिर से जुड़े मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के लिए सात दिन का समय बताया था, लेकिन पांचवें दिन ही पुलिस और एसटीएफ ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इस तरह उन्होंने मौजूदा सरकार की कार्रवाई को प्रभावी बताते हुए पिछली व्यवस्था पर सवाल उठाए.

ब्राह्मणों की नाराजगी पर क्या बोले?

ब्राह्मण समाज की नाराजगी को लेकर पूछे गए सवाल पर मनोज पांडेय ने कहा कि ब्राह्मण भी दूसरे वर्गों की तरह इंसान हैं. उनकी भी अपनी अपेक्षाएं और आकांक्षाएं हैं. किसी बात से खुशी होना और किसी बात से नाराजगी होना स्वाभाविक है. हालांकि, उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज भारतीय जनता पार्टी के साथ मजबूती से खड़ा है और आगे भी रहेगा. इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा. मनोज पांडेय ने कहा कि पार्टी के एक अधिकृत पदाधिकारी की ओर से ब्राह्मण समाज को लेकर की गई टिप्पणी आज भी लोगों को आहत करती है. उन्होंने ब्राह्मण समाज को सनातन परंपरा और राष्ट्र का ध्वजवाहक बताया. साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही देश और भगवान राम की चिंता कर रहे हैं.

यूजीसी के नए नियमों पर मंत्री ने क्या कहा?

यूजीसी के नए नियमों को लेकर भी मनोज पांडेय से सवाल किया गया. इस पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि किसी भी जाति या वर्ग के युवाओं के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए. उन्होंने बताया कि इस विषय पर जल्द ही एक समिति गठित की जाएगी. यह समिति सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए काम करेगी. मनोज पांडेय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सबका साथ और सबका विकास है. उनके मुताबिक किसी भी वर्ग के युवाओं के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी के हितों का ध्यान रखा जाना जरूरी है. उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रखे गए पक्ष और प्रस्तावित समिति का जिक्र करते हुए यह बात कही.

ऊंचाहार से ही चुनाव लड़ेंगे मनोज पांडेय

आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी सीट को लेकर मनोज पांडेय ने साफ कहा कि ऊंचाहार उनकी प्राथमिकता है और वह इसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि ऊंचाहार उनके लिए सिर्फ चुनाव जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि सेवा, सम्मान और लोगों को अधिकार दिलाने का मंदिर है. मनोज पांडेय ने अपने क्षेत्र से जुड़ाव बताते हुए कहा कि वह जनता की सेवा एक पुजारी की तरह करते हैं. उनके लिए ऊंचाहार केवल वोट देने की मशीन नहीं, बल्कि उनकी कर्मभूमि है. उन्होंने क्षेत्र की जनता के साथ अपने रिश्ते को सेवा और सम्मान से जोड़कर बताया. इस तरह उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सीट को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया.

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स्वामी प्रसाद मौर्य या उनके बेटे से मुकाबले पर दिया जवाब

स्वामी प्रसाद मौर्य या उनके बेटे के साथ संभावित चुनावी मुकाबले के सवाल पर भी मनोज पांडेय ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि वह खुद को जीतने वाला नहीं, बल्कि हमेशा जनता के बीच आगे रहने वाला मानते हैं. उनके इस जवाब में क्षेत्र की जनता के बीच अपनी सक्रियता और जुड़ाव पर जोर दिखाई दिया. ऊंचाहार से चुनाव लड़ने की बात दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र उनके लिए सेवा और कर्मभूमि का स्थान है. पंचायत आजतक के मंच पर मनोज पांडेय ने इस तरह सपा छोड़ने के फैसले से लेकर राम मंदिर, सनातन आस्था, पीडीए, ब्राह्मण समाज, यूजीसी के नियमों और आगामी चुनाव तक कई मुद्दों पर अपना पक्ष रखा.