अखिलेश यादव के विरोध के बीच धीरेंद्र शास्त्री के पास पहुंच गए राजा भैया? वीडिया का ये है सच

सुषमा पांडेय

• 06:16 PM • 06 Nov 2026

राम-कृष्ण विवाद के बीच राजा भैया का धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पैर छूने वाला वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इसकी तारीख कुछ और कहानी बताती है. जानिए राजा भैया और बागेश्वर बाबा की मुलाकात कब हुई थी और नवंबर में कुंडा में क्या आयोजन होने वाला है.

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उत्तर प्रदेश में भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर चल रही सियासत के बीच कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें राजा भैया बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सामने नतमस्तक होते और उनके पैर छूते नजर आ रहे हैं. 

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वीडियो सामने आने के बाद लोग राजा भैया के इस कदम को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं. कुछ लोग इसे उनकी सनातन धर्म के प्रति आस्था बता रहे हैं तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर विवादित बयान देने वाले बाबा के सामने राजा भैया कैसे नतमस्तक हो सकते हैं?

इस वीडियो की चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि राजा भैया के कुंडा स्थित आवास पर 17 से 20 नवंबर तक रामकथा का आयोजन होना है. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रस्तावित कार्यक्रमों का विरोध कर रहे हैं. 

उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन से कई जिलों में उनके कार्यक्रम रोकने की मांग की है. इस पूरे विवाद के बीच राजा भैया और बागेश्वर बाबा की मुलाकात का वीडियो सामने आने से राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं.

छह महीने पुराना है राजा भैया और बागेश्वर बाबा का वीडियो

वायरल वीडियो को लेकर एक सवाल उठ रहा है कि क्या राजा भैया ने श्रीकृष्ण को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से मुलाकात की थी? वीडियो की पड़ताल में सामने आया कि मुलाकात हालिया नहीं है. वीडियो 12 जून 2026 का बताया जा रहा है. श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर शुरू हुए ताजा विवाद से करीब छह महीने पहले की मुलाकात है.

राजा भैया इससे पहले भी बागेश्वर धाम जा चुके हैं. अक्टूबर 2025 में अपने दोनों बेटों के साथ वहां पहुंचे थे. उस समय भी उनकी मुलाकात और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सामने नतमस्तक होने की तस्वीरें चर्चा में आई थीं. उस दौरान राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के रिश्तों को लेकर भी सोशल मीडिया और मीडिया में काफी खबरें चल रही थीं.

अक्टूबर 2024 में भी राजा भैया अपने बेटों बृजराज और शिवराज के साथ बागेश्वर धाम पहुंचे थे. वहां उन्होंने काफी समय बिताया था और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से लंबी बातचीत भी की थी.

राम और कृष्ण को लेकर क्या है पूरा विवाद?

इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान से हुई. एक कथा के दौरान उन्होंने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कुछ टिप्पणी की थी. इस बयान को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई. खासकर यादव समाज के लोगों में नाराजगी की बात सामने आई. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई.

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रदेश सरकार और प्रशासन से धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रस्तावित सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की. उन्होंने अंबेडकरनगर, कुंडा, गोंडा, झांसी, लखनऊ और आगरा समेत कई जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों का जिक्र किया.

इस मुद्दे पर यादव समाज के कुछ लोगों की नाराजगी भी सामने आई. कई जगहों पर विरोध और प्रदर्शन की खबरें आईं. समाजवादी पार्टी इस विवाद को लगातार उठा रही है.

अखिलेश के हमलों के बीच राजा भैया ने क्या कहा?

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर चल रहे विवाद के बीच राजा भैया ने उन्नाव में सनातन और हिंदुत्व को लेकर अपनी बात रखी थी. उन्होंने कहा था कि अगर कोई मुसलमान इस्लाम की बात करता है तो पूरा समाज उसका समर्थन करता है, लेकिन जब कोई हिंदू सनातन या हिंदुत्व की बात करता है तो हिंदू ही उसका विरोध करने लगते हैं.

राजा भैया ने कहा कि भारत तभी तक संवैधानिक राष्ट्र है, जब तक यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं. उनके मुताबिक, भारत और हिंदुत्व की एक-दूसरे के बिना कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र देना सभी की जिम्मेदारी है.

राजा भैया ने इस बयान में सीधे तौर पर अखिलेश यादव या धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का नाम नहीं लिया था. हालांकि, राम-कृष्ण विवाद के बीच उनके इस बयान को राजनीतिक नजरिए से भी देखा गया.

राजा भैया के रामकथा कार्यक्रम में कौन-कौन पहुंचेगा?

राजा भैया के कुंडा स्थित आवास पर 17 से 20 नवंबर तक रामकथा का आयोजन प्रस्तावित है. इस कार्यक्रम को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं. बताया जा रहा है कि इसके लिए बीजेपी के कई बड़े नेताओं को निमंत्रण भेजा गया है.

अब इस कार्यक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. क्या बीजेपी के बड़े नेता रामकथा में शामिल होंगे? क्या सरकार के बड़े चेहरे भी कार्यक्रम में पहुंचेंगे? क्या इस आयोजन के जरिए राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को कोई संदेश देने की कोशिश होगी? इन सवालों के बीच रामकथा को लेकर तैयारियां चर्चा में हैं.

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