'पड़ोसी टिकट नहीं होने दे रहे…’ अखिलेश के इस तंज के पीछे संजय निषाद-ओपी राजभर का विवाद या कुछ और?

आशुतोष चौबे

04 Nov 2026 (अपडेटेड: 04 Nov 2026, 01:06 PM)

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी के भीतर चल रही खींचतान और राजनीतिक पदों की वरिष्ठता पर सवाल उठाए हैं.

संजय निषाद, अखिलेश यादव और ओपी राजभर

संजय निषाद, अखिलेश यादव और ओपी राजभर (फोटो- एआई जेनेरेटेड)

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UP Politics 2027: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी के भीतर चल रही कथित खींचतान और राजनीतिक पदों की वरिष्ठता पर सवाल उठाए हैं. उनके पोस्ट में ‘जिनकी खुद की टिकट उनके अपने ही पड़ोसी पक्की नहीं होने दे रहे’ वाली टिप्पणी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है. अखिलेश ने इस पोस्ट में किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट को लेकर एनडीए के सहयोगी दलों के बीच चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है. इस सीट पर ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद की दावेदारी को लेकर पहले से विवाद सामने आ चुका है. अखिलेश ने अपने पोस्ट में ‘5 बड़ा या 7?’ को लेकर भी चर्चा की है, जिसे अलग-अलग तरह से देखा जा रहा है.

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अखिलेश यादव ने क्या लिखा?

अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, ‘जिनकी खुद की टिकट उनके अपने ही पड़ोसी पक्की नहीं होने दे रहे हैं, वो चुप ही रहें तो ही उनका सम्मान बचा रहेगा.’ उन्होंने आगे लिखा कि संबंधित टिप्पणी ‘दुष्मुखी’ के वचनों से प्रेरित लगती है. भगवान कृष्ण के एक अन्य नाम ‘रणछोड़’ का नकारात्मक अर्थ में इस्तेमाल किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई. अखिलेश ने इसे सीमित और संकीर्ण ज्ञान बताते हुए समाज के लिए घातक करार दिया. हालांकि, इस पोस्ट में उन्होंने न तो ओम प्रकाश राजभर का नाम लिया और न ही अतरौलिया सीट का सीधा जिक्र किया. 
 

राजभर और संजय निषाद के बीच क्या विवाद?

अखिलेश की ‘पड़ोसी’ वाली टिप्पणी को अतरौलिया सीट पर ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद के बीच चल रही दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल साल 2022 के विधानसभा चुनाव में अतरौलिया सीट बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में निषाद पार्टी के खाते में गई थी. पार्टी ने यहां से प्रशांत सिंह को उम्मीदवार बनाया था, जबकि समाजवादी पार्टी के संग्राम यादव ने जीत दर्ज की थी. बता दें उस समय राजभर की सुभासपा समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी. जुलाई 2023 में राजभर फिर एनडीए में शामिल हो गए और निषाद पार्टी भी इसी गठबंधन का हिस्सा रही.

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2026 में दोनों में बढ़ी खींचतान

अतरौलिया सीट को लेकर विवाद खुलकर अप्रैल 2026 में सामने आया, जब ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पारंपरिक जहूराबाद सीट छोड़कर अतरौलिया से 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई. उन्होंने आजमगढ़ की सभी 10 विधानसभा सीटों पर सुभासपा की दावेदारी की बात भी कही. इस पर संजय निषाद ने आपत्ति जताई. उनका कहना था कि 2022 में यह सीट निषाद पार्टी के हिस्से में आई थी और राजभर ने उनसे बातचीत किए बिना चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया. बाद में राजभर के छोटे बेटे अरुण राजभर का नाम भी अतरौलिया सीट से संभावित उम्मीदवार के तौर पर सामने आया. जुलाई में पंचायत आजतक के मंच पर संजय निषाद ने कहा था कि राजभर अपने बेटे को ‘बलि का बकरा’ न बनाएं और उसे एनडीए का बेटा बनाएं. उन्होंने यह भी कहा था कि सीटों का अंतिम फैसला बीजेपी के साथ बातचीत से होगा.

अखिलेश ने फिर उठाया ‘5 बड़ा या 7?’ का सवाल

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में चार सवाल लिखे- ‘5 बड़ा या 7?’, ‘विधानसभा बड़ी या लोकसभा?’, ‘राज्य का मंत्री बड़ा या केंद्र का?’ और ‘प्रदेश का अध्यक्ष बड़ा या देश का?’ उनके 5 और 7 वाले सवाल को बीजेपी के दो नेताओं के राजनीतिक सफर से जोड़कर देखा जा रहा है. बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन बिहार की बांकीपुर सीट से पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं. वह बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री भी रहे. वहीं, पंकज चौधरी महाराजगंज लोकसभा सीट से सात बार सांसद चुने गए हैं. अखिलेश ने अपने पोस्ट में इन दोनों नेताओं का नाम नहीं लिया, लेकिन पांच बार विधायक और सात बार सांसद होने के आंकड़ों के बीच तुलना की ओर इशारा माना जा रहा है.

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बीजेपी की अंदरूनी लड़ाई का भी किया जिक्र

सपा प्रमुख ने लोकसभा से सीधे मुख्यमंत्री बनने वाली टिप्पणी पर भी पलटवार किया. उन्होंने लिखा कि यह बात किसकी ओर इशारा करके कही गई है, इसे गोरखपुर के लोग पुरानी रार-तकरार के संदर्भ में समझते हैं. अखिलेश ने दावा किया कि दिल्ली और लखनऊ के साथ अब गोरखपुर में भी बीजेपी की वर्चस्व की अंदरूनी लड़ाई खुलकर सामने आ गई है. उन्होंने प्रदेश के प्रबुद्ध समाज को नोटिस देने वालों की बात भी याद दिलाई. पोस्ट के आखिर में अखिलेश ने कहा कि जिनके नाम का पर्यायवाची ही ‘कमल’ है, वे आपसी लड़ाई में कमल का निशान पाने के लिए तरस सकते हैं. उन्होंने चुनौती दी कि अगर ऐसा नहीं है तो बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष को सबसे पहले अपना टिकट घोषित करना चाहिए. पोस्ट का अंत उन्होंने ‘इति ध्वस्तम्!!!’ लिखकर किया.

वाराणसी में अखिलेश यादव ने क्या कहा?

इससे पहले वाराणसी में अखिलेश यादव से पूछा गया था कि क्या वह 2027 का विधानसभा चुनाव वाराणसी से लड़ेंगे. इस पर उन्होंने कहा था, ‘हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं, इसलिए शुभ काम करेंगे.’ उनके इस बयान पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तंज कसते हुए उन्हें किसी एक सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी. हालांकि, अखिलेश ने अपने एक्स पोस्ट में राजभर का नाम लेकर जवाब नहीं दिया.

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