समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अपनी भूमिका के बारे में एक बड़ा हिंट दिया है. वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे जब पूछा गया कि क्या वे वाराणसी से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे तो उन्होंने साफ तौर पर हां या ना कहने के बजाय अपने अंदाज में जवाब दिया. अखिलेश ने कहा, "हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं, इसलिए शुभ काम करेंगे."
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उनके बयान से साफ है कि फिलहाल अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान नहीं कर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री बनने और चुनाव लड़ने के सवाल को जोड़ते हुए जवाब दिया.
वाराणसी में अखिलेश यादव ने सिर्फ चुनाव लड़ने के सवाल पर ही बात नहीं की. उन्होंने भाजपा सरकार पर काशी के विकास, किसानों की जमीन, बुनकरों की स्थिति, रोजगार और कानून-व्यवस्था को लेकर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर वाराणसी को मेट्रो की सुविधा दी जाएगी और वरुणा नदी को सुंदर बनाने का काम आगे बढ़ाया जाएगा.
2022 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े थे अखिलेश
अखिलेश यादव के इस जवाब को समझने के लिए उनके पिछले चुनावी सफर पर भी नजर डालनी होगी. 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद वे मुख्यमंत्री बने थे. उस समय अखिलेश विधान परिषद के सदस्य थे. तब मुख्यमंत्री बनने के लिए उन्होंने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था.
2017 के चुनाव के समय अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और वह विधान परिषद (MLC) के सदस्य थे. इसलिए उन्होंने किसी विधानसभा सीट से प्रत्याशी के रूप में पर्चा नहीं भरा था.
इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ने मैदान में उतरे. उन्होंने मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. इसके बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने. जून 2024 में कन्नौज से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने करहल विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया. फिलहाल वह कन्नौज से सांसद हैं.
इस लिहाज से वाराणसी में दिया गया उनका बयान 2027 के चुनाव के लिए उनकी संभावित रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि वह 2027 में किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने केवल इतना कहा कि मुख्यमंत्री वे तभी बनते हैं, जब चुनाव नहीं लड़ते हैं.
काशी को मेट्रो देने का वादा, भाजपा पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने वाराणसी के विकास को लेकर भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि भाजपा ने काशी को क्योटो बनाने का वादा किया था, लेकिन शहर में वैसा काम नहीं हुआ. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कम से कम क्योटो की तस्वीर ही लगा देते.
अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर वाराणसी को मेट्रो दी जाएगी. उन्होंने रोपवे और मेट्रो के बीच अंतर बताते हुए कहा कि दोनों अलग-अलग सुविधाएं हैं. उनके मुताबिक, रोपवे का इस्तेमाल सीमित जगहों पर हो सकता है, जबकि मेट्रो शहर के परिवहन के लिए अलग व्यवस्था है.
उन्होंने वरुणा नदी का भी जिक्र किया. अखिलेश ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार के समय नदी को सुंदर बनाने का काम शुरू हुआ था. उनकी सरकार बनने पर इस काम को आगे बढ़ाया जाएगा.
मणिकर्णिका घाट पर हुए ध्वस्तीकरण को लेकर भी उन्होंने भाजपा को घेरा. अखिलेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घाट की तस्वीर दिखाई और कहा कि काशी के लोगों ने इसका विरोध किया था. उन्होंने देवी अहिल्याबाई का जिक्र करते हुए कहा कि मणिकर्णिका घाट को तोड़ने की सजा मिल चुकी है.
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