यूपी में SIR के दौरान मुस्लिम वोटरों के नाम कटे या बढ़े? CEO नवदीप रिणवा ने आंकड़ा बताकर दिया जवाब
उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान मुस्लिम मतदाताओं के नाम ज्यादा कटने के आरोपों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने पीलीभीत की एक विधानसभा सीट का आंकड़ा पेश किया है.
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उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगातार उठ रहा है. समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया में कुछ खास समुदायों को निशाना बनाया गया. अब यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने इस आरोप पर पीलीभीत की एक विधानसभा सीट का आंकड़ा सामने रखा है.
नवदीप रिणवा ने आज तक के पॉडकास्ट में दावा किया कि SIR के दौरान मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात घटने के बजाय बढ़ा है. उन्होंने बताया कि पीलीभीत की एक विधानसभा सीट पर SIR से पहले मुस्लिम आबादी का अनुपात करीब 35 फीसदी था. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 36 फीसदी और फाइनल लिस्ट में बढ़कर 39 फीसदी हो गया.
हालांकि, इसी पीलीभीत में वोटर लिस्ट से जुड़ी दूसरी तरह की गड़बड़ी भी सामने आई है. यहां 10,470 मतदाताओं के रिकॉर्ड में अनियमितताएं मिली हैं. आरोप है कि मतदाताओं की जानकारी बदले बिना उनकी सहमति के फॉर्म-8 भरे गए और मंजूर भी कर दिए गए. मामले में दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई हुई है.
क्या SIR में मुस्लिम वोटरों के नाम सबसे ज्यादा कटे?
SIR को लेकर विपक्ष का एक बड़ा आरोप है कि मुस्लिम मतदाताओं के नाम ज्यादा संख्या में हटाए गए. इस सवाल पर नवदीप रिणवा ने कहा कि वोटर लिस्ट में धर्म का कोई कॉलम नहीं होता, इसलिए चुनाव आयोग के पास धर्म के आधार पर मतदाताओं के नाम कटने या बढ़ने का सीधा आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.
उन्होंने बताया कि पीलीभीत की एक विधानसभा सीट पर नामों के आधार पर विश्लेषण किया गया था. इसमें SIR से पहले मुस्लिम आबादी का अनुपात करीब 35 फीसदी था. जब ड्राफ्ट लिस्ट जारी हुई तो बढ़कर 36 फीसदी हो गया. फाइनल लिस्ट में आंकड़ा 39 फीसदी पहुंच गया.
CEO ने इसी उदाहरण के आधार पर कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि SIR में मुस्लिम मतदाताओं के नाम कम हुए हैं. उनके मुताबिक, इस सीट पर तो मुस्लिम मतदाताओं का अनुपात बढ़ा है.
हालांकि, यहां समझना जरूरी है कि आंकड़ा पीलीभीत की एक विधानसभा सीट का है. इसे पूरे उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं का आंकड़ा नहीं माना जा सकता.
पीलीभीत में आखिर क्या गड़बड़ी हुई थी?
मुस्लिम मतदाताओं के नाम कटने के आरोपों के बीच पीलीभीत का मामला अलग वजह से चर्चा में आया. यहां कुछ मतदाताओं ने शिकायत की थी कि चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपना EPIC यानी वोटर आईडी नंबर डालने पर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम और पिता का नाम दिखाई दे रहा है.
पीलीभीत के रहने वाले अधिवक्ता फैजान अली खान ने भी शिकायत की थी. उनका कहना था कि SIR के बाद जारी फाइनल वोटर लिस्ट में उनका और उनके भाई का नाम सही था, लेकिन बाद में EPIC नंबर डालने पर किसी दूसरे व्यक्ति की जानकारी दिखाई देने लगी.
उनके मामले में वोटर आईडी नंबर पर रईस अली का नाम दिखाई दे रहा था, जबकि उनके पिता का नाम मुशफिक अली खान है. उनके भाई के रिकॉर्ड में भी अलग नाम सामने आया. इसके बाद उन्होंने प्रशासन से जांच की मांग की.
समाजवादी पार्टी ने भी 20 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर इस तरह की गड़बड़ी की शिकायत की थी. पार्टी ने बताया था कि पीलीभीत में मतदाता अपना EPIC नंबर डाल रहे हैं तो उनके नाम और पिता के नाम की जगह दूसरे लोगों की जानकारी दिखाई दे रही है. इसके बाद जांच शुरू हुई.
13,779 फॉर्म भरे गए, 10,470 को मंजूरी भी मिल गई
जांच में पता चला कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच कंप्यूटर ऑपरेटर ने मतदाताओं की जानकारी में सुधार के लिए 13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज किए थे.
इनमें से 10,470 आवेदन मंजूर कर दिए गए, जबकि 3,309 आवेदन खारिज हुए. जांच की सबसे बड़ी बात ये रही कि इन आवेदनों से जुड़े मूल फॉर्म और जरूरी दस्तावेज चुनाव कार्यालय में नहीं मिले.
जिन लोगों के नाम और दूसरी जानकारियों में बदलाव किए गए, उनके आवेदन से जुड़े दस्तावेज ही उपलब्ध नहीं थे. जांच में सभी 10,470 मंजूर प्रविष्टियों में अनियमितता पाई गई.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि सॉफ्टवेयर की तकनीकी खराबी नहीं थी. उनके मुताबिक, जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर वोटर लिस्ट को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थी, उन्हीं की तरफ से गड़बड़ी हुई.
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