कास्ता विधानसभा सीट पर 2027 की जंग होगी दिलचस्प, सपा की बढ़त से बदले सियासी समीकरण
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कास्ता विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. बीजेपी के सौरभ सिंह की दो जीत और 2024 में सपा की बढ़त ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.
उत्तर प्रदेश की कास्ता विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है. साल 2008 में अस्तित्व में आई इस सीट पर 2012 से विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. शुरुआती चुनाव में समाजवादी पार्टी के सुनील कुमार लाला ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सौरभ सिंह लगातार दो बार विधायक बने. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने कास्ता विधानसभा क्षेत्र में बढ़त हासिल की, जिसके बाद यहां के राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं.
मौजूदा विधायक सौरभ सिंह का कहना है कि वह चुनाव की तैयारी पहले से शुरू कर देते हैं और क्षेत्र में विकास कार्यों पर काम कर रहे हैं. उन्होंने मितौली और मगल को टाउन एरिया बनाने, औरंगाबाद को ब्लॉक बनाने के साथ आईटीआई और डिग्री कॉलेज की स्थापना का जिक्र किया. वहीं, बीजेपी पर वोट काटने के आरोप भी लगाए गए हैं. दूसरी तरफ सपा प्रत्याशी ने निष्पक्ष चुनाव की मांग करते हुए अपूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की बात कही है. इस सीट पर पासी, जाटव, ब्राह्मण, मुस्लिम, कुर्मी और यादव समेत कई वर्गों के मतदाता हैं.
कास्ता विधानसभा सीट पर इस बार भी मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है. वरिष्ठ पत्रकारों के मुताबिक, चुनावी टक्कर पहले से ज्यादा कड़ी हो सकती है. 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा की बढ़त ने पार्टी की उम्मीदें बढ़ाई हैं, जबकि बीजेपी के पास लगातार दो विधानसभा चुनाव जीतने का अनुभव है. यहां विकास के मुद्दे के साथ चुनावी लहर भी अहम भूमिका निभा सकती है. ऐसे में 2027 के चुनाव का परिणाम किसके पक्ष में जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा.
