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यूपी में 16 लाख फर्जी वोटर हैं या नहीं? CEO नवदीप रिणवा ने अखिलेश के दावों पर ही खड़े कर दिए सवाल

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर सपा और चुनाव आयोग के बीच विवाद जारी है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने अखिलेश यादव के 16.18 लाख फर्जी वोटरों के दावे को गलत बताया है.

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर समाजवादी पार्टी और चुनाव आयोग के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगा रहे हैं. 

अब यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने इन आरोपों पर विस्तार से जवाब दिया है. उन्होंने अखिलेश यादव के 16 लाख 18 हजार फर्जी वोटरों वाले दावे को गलत बताया है. साथ ही कहा कि समाजवादी पार्टी ने जिन करीब 45 से 46 हजार नामों को डुप्लीकेट बताकर शिकायत की थी, उनमें से लगभग 90 फीसदी दावे जांच में सही नहीं मिले.

नवदीप रिणवा ने आज तक के पॉडकास्ट में बताया कि अप्रैल 2026 में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद से अक्टूबर तक किसी राजनीतिक दल ने बड़े स्तर पर वोट काटने या किसी खास समुदाय को निशाना बनाने की शिकायत नहीं की थी. 

हालांकि, उन्होंने माना कि समाजवादी पार्टी की ओर से डुप्लीकेट वोटरों को लेकर कई शिकायतें आई थीं. कुछ शिकायतें सही भी पाई गईं और उन पर कार्रवाई की गई.

16.18 लाख फर्जी वोटरों के दावे पर क्या बोले CEO?

अखिलेश यादव ने अपनी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्लाइड दिखाकर प्रदेश में 16 लाख 18 हजार फर्जी या संदिग्ध वोटर होने का दावा किया था. नवदीप रिणवा ने पॉडकास्ट में इस आंकड़े को खारिज करते हुए कहा कि दावा ही गलत है.

उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग को करीब 3 लाख डुप्लीकेट नामों की जानकारी दी गई थी. आयोग अपनी तरफ से भी ऐसे नामों की जांच करता रहा है. रिणवा के मुताबिक, इस प्रक्रिया में करीब 2 लाख से ज्यादा डुप्लीकेट नाम पहले ही हटाए जा चुके थे.

चुनाव आयोग और सपा के आंकड़ों को लेकर दोनों पक्षों के बीच अंतर बना हुआ है. अखिलेश यादव जहां बड़ी संख्या में फर्जी वोटरों का आरोप लगा रहे हैं, वहीं CEO का कहना है कि उनके सामने पेश किए गए आंकड़ों की जांच में वैसी स्थिति नहीं मिली.

सपा ने 45-46 हजार नामों को बताया था डुप्लीकेट

रिणवा ने बताया कि 10 अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच समाजवादी पार्टी ने करीब 30 ज्ञापन चुनाव आयोग को सौंपे थे. इनमें लगभग 45 से 46 हजार नाम ऐसे बताए गए थे, जिन्हें पार्टी ने डुप्लीकेट वोटर बताया था.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, जांच में इन शिकायतों में करीब 90 फीसदी दावे गलत पाए गए. हालांकि, उन्होंने कहा कि सपा की कुछ शिकायतें सही थीं और आयोग ने उन पर कार्रवाई की है.

उन्होंने विकास यादव नाम के एक व्यक्ति से जुड़ी शिकायत का भी जिक्र किया. सपा की ओर से ऐसे 10 नामों की शिकायत दी गई थी. जांच में पता चला कि अलग-अलग जगहों से अलग-अलग तस्वीरों के आधार पर फॉर्म भरे गए थे. इनमें कुछ नाम पुरुषों के थे और कुछ महिलाओं के. रिणवा के मुताबिक, सभी को एक ही व्यक्ति का डुप्लीकेट नाम मानना सही नहीं था. रिणवा ने कहा कि इस तरह की सही शिकायतों का आयोग स्वागत करता है.

सभी जिलों में पीलीभीत जैसी गड़बड़ी की हो रही जांच

CEO ने बताया कि पीलीभीत की घटना सामने आने के बाद सभी जिलाधिकारियों से अपने जिलों की मतदाता सूची की जांच करने को कहा गया है. उन्हें यह भी देखना है कि कहीं फर्जी फॉर्म-8 भरकर मतदाताओं के नाम या दूसरी जानकारियां तो नहीं बदली गईं.

रिणवा के मुताबिक, एक सप्ताह के भीतर जिलों से रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि अभी तक पीलीभीत जैसा दूसरा मामला सामने नहीं आया है और न ही किसी राजनीतिक दल ने ऐसा कोई दूसरा उदाहरण दिया है.

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