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धीरेंद्र शास्त्री के राम-कृष्ण वाले बयान से क्यों बढ़ी राजा भैया की टेंशन? 17 नवंबर से कुंडा में होनी है बागेश्वर धाम की कथा

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान राम और भगवान कृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर विवाद खड़ा हो गया है. अपनी कथा के दौरान उन्होंने दोनों भगवानों की तुलना करते हुए भगवान राम को सीधा और भगवान कृष्ण को टेढ़ा बताया था.

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राजा भैया और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (फाइल फोटो)
राजा भैया और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (फाइल फोटो)
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Kunda Dhirendra Shastri Katha: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान राम और भगवान कृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर विवाद खड़ा हो गया है. अपनी कथा के दौरान उन्होंने दोनों भगवानों की तुलना करते हुए भगवान राम को सीधा और भगवान कृष्ण को टेढ़ा बताया था. उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो कई लोगों ने नाराजगी जताई. विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री को सफाई देनी पड़ी और उन्होंने माफी भी मांगी. हालांकि, इस बयान का असर अब उत्तर प्रदेश की सियासत में भी दिखाई देने लगा है. खास बात यह है कि इस विवाद के बीच कुंडा विधायक राजा भैया की भी चर्चा होने लगी है. इसकी वजह है कि 17 नवंबर से कुंडा में राजा भैया के यहां धीरेंद्र शास्त्री की कथा होने वाली है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस विवाद का असर राजा भैया के कार्यक्रम पर भी पड़ सकता है?

क्या बोले थे धीरेंद्र शास्त्री?

धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी कथा के दौरान भगवान राम और भगवान कृष्ण के स्वरूप और नाम की तुलना की थी. उन्होंने कहा था कि भगवान राम का नाम और उनका स्वरूप सीधा है, जबकि भगवान कृष्ण का नाम और उनका स्वरूप टेढ़ा है. इसी दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण के खड़े होने के अंदाज और उनकी मुद्रा का जिक्र करते हुए भगवान राम को उनसे अलग बताया. उनका यह बयान सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया.

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विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने भावावेश में भगवान कृष्ण के प्रति भावपूर्ण बात कही थी. कुछ लोगों ने उनकी पूरी बात नहीं सुनी और वीडियो का आधा हिस्सा देखकर उन्हें कृष्ण विरोधी घोषित कर दिया. उन्होंने कहा कि वह भगवान कृष्ण के विरोधी नहीं हैं. उनके नाम में भी भगवान कृष्ण का नाम जुड़ा हुआ है और उन्हीं के कारण उनका जीवन है. धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि अगर उनकी बात या व्याख्या से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो वह विनम्रता से माफी मांगते हैं.

17 नवंबर से होनी है धीरेंद्र शास्त्री की कथा

इस पूरे विवाद के बीच राजा भैया का नाम इसलिए चर्चा में है, क्योंकि अब धीरेंद्र शास्त्री की अगली कथा कुंडा में होने वाली है. राजा भैया 17 नवंबर से अपने क्षेत्र कुंडा में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की कथा कराने जा रहे हैं. इस कार्यक्रम में करीब 5 लाख लोगों की भीड़ जुटाने की तैयारी की बात सामने आई है. यानी जिस कथावाचक के बयान को लेकर इस समय विवाद चल रहा है, वही कुछ दिनों बाद राजा भैया के यहां कथा करने पहुंचने वाले हैं.

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय से बड़े नेताओं और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों के यहां कथाओं के आयोजन का सिलसिला देखने को मिला है. सबसे पहले बृजभूषण शरण सिंह ने अपने यहां कथा कराई थी. उनके कार्यक्रम में करीब एक हफ्ते से दस दिन तक बड़ी संख्या में लोग जुटे थे. इसके बाद दूसरे नेताओं ने भी कथाओं का आयोजन कराया. हाल ही में मनोज पांडे ने मशहूर कथावाचक प्रदीप मिश्रा की कथा कराई थी. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम समेत कई बड़े नेताओं और राज्यपाल को भी बुलाया गया था. अब इस कड़ी में राजा भैया के यहां धीरेंद्र शास्त्री की कथा होनी है.

राजा भैया के लिए क्यों मुश्किल हो सकती है स्थिति?

राजा भैया लगातार सनातन और भगवान राम-कृष्ण से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं. वह कृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर भी अपना पक्ष रखते हैं और राम मंदिर भी जा चुके हैं. ऐसे में उनके यहां कथा करने जा रहे धीरेंद्र शास्त्री का भगवान राम और कृष्ण को लेकर दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है. जिन लोगों की आस्था दोनों भगवानों में है, उनमें से कई लोग इस तुलना पर नाराजगी जता रहे हैं.

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ऐसे माहौल में राजा भैया के यहां होने वाली कथा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. धीरेंद्र शास्त्री ने भले ही माफी मांग ली हो, लेकिन विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ तो कार्यक्रम के दौरान उनसे इस बयान को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं. राजा भैया के लिए भी यह स्थिति असहज हो सकती है, क्योंकि कथा का आयोजन उनके क्षेत्र में हो रहा है. हालांकि, फिलहाल कथा रद्द होने या आयोजन में किसी बदलाव की कोई जानकारी सामने नहीं आई है.

अखिलेश यादव ने बीजेपी को घेरा

धीरेंद्र शास्त्री के बयान को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान कृष्ण की सुदर्शन चक्र लिए हुए तस्वीर साझा की और लंबा पोस्ट लिखकर इस बयान पर नाराजगी जताई. अखिलेश यादव ने लिखा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है कि कोई राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त व्यक्ति सनातन समाज की एकता को तोड़ने का काम कर रहा है.

उन्होंने सवाल उठाया कि सनातनियों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के पीछे कौन है और क्या इसके पीछे कोई बाहरी या आंतरिक शक्ति है? अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान के अलग-अलग अवतारों के बीच नकारात्मकता पैदा करने वाली तुलना सनातन समाज के खिलाफ गहरी साजिश है. उनके मुताबिक हर सच्चा सनातनी भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों का उपासक होता है और नवमी-अष्टमी का भेद किसी के मन में नहीं होता.

अखिलेश यादव के इस बयान के जरिए समाजवादी पार्टी ने धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयान के बहाने बीजेपी को घेरने की कोशिश की है. कांग्रेस के बड़े नेता भी इस मुद्दे पर बीजेपी को निशाने पर ले रहे हैं. इस तरह धार्मिक बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है.

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कथा से पहले शांत हो जाएगा विवाद?

धीरेंद्र शास्त्री के बयान के बाद माफी मांगने के बावजूद विवाद का राजनीतिक असर दिखाई दे रहा है. एक तरफ विपक्षी दल इस मुद्दे पर बीजेपी को घेर रहे हैं, तो दूसरी तरफ राजा भैया के यहां होने वाली कथा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. राजा भैया के लिए चुनौती यह हो सकती है कि कथा का आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

अब सबकी नजर 17 नवंबर पर है. क्या तब तक विवाद पूरी तरह शांत हो जाएगा? क्या धीरेंद्र शास्त्री कुंडा में कथा के दौरान इस मुद्दे पर कोई सफाई देंगे? और क्या राजा भैया के कार्यक्रम पर इस विवाद का कोई असर पड़ेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं हैं, लेकिन इतना जरूर है कि धीरेंद्र शास्त्री के बयान ने उनकी अगली कथा से पहले राजा भैया को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है.