UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर अगले महीने में चुनाव होने हैं. इस चुनाव को लेकर अब यूपी में सियासत भी शुरू हो गई है. बता दें राज्यसभा चुनाव के लिए 16 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 16 तारीख को ही चुनाव के नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे. वर्तमान संख्याबल के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी आसानी से 7 सीटें जीत सकती है. इसके साथ ही समाजवादी पार्टी भी 2 सीटें आसानी से जीत सकती है. लेकिन सियासत का सारा गुणा-भाग 10वीं सीट को लेकर लगाया जा रहा है. अगर इस सीट पर सपा और बीजेपी अपना तीसरा और आठवां उम्मीदवार उतारती है, तो जबरदस्त टक्कर देखने को मिलेगी. ऐसे में इस सीट पर पूर्वांचल के कुछ विधायक अपने वोट से बड़ा उलटफेर कर सकते हैं.
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अब्बास अंसारी पर सबकी नजर
पूर्वांचल के अहम विधायकों में सबसे पहला नाम अब्बास अंसारी का है. मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी भले ही सुभासपा के टिकट से हैं, लेकिन वह हमेशा समाजवादी पार्टी के करीब नजर आते हैं. ओम प्रकाश राजभर भी कह चुके हैं कि अब्बास को अखिलेश यादव के कहने पर ही टिकट दिया गया था. ऐसे में पूरी संभावना है कि अब्बास अंसारी राज्यसभा चुनाव में एनडीए के बजाय सपा का ही साथ देंगे.
जफराबाद के विधायक जगदीश राय का रुख
जफराबाद से विधायक जगदीश राय भी सुभासपा के ही टिकट पर जीते हैं, लेकिन उन्हें भी सपा का ही समर्थक माना जाता है. ओम प्रकाश राजभर खुद कई बार कह चुके हैं कि जगदीश राय सपा का झंडा लगाकर चलते हैं. पिछले राज्यसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा का साथ नहीं दिया था, जिससे यह साफ है कि इस बार भी वह सपा के साथ ही खड़े नजर आ सकते हैं.
पल्लवी पटेल सपा के साथ?
सिराथू से सपा के सिंबल पर विधायक बनीं पल्लवी पटेल का रुख भी इस बार बदल सकता है. पिछले राज्यसभा चुनाव में उन्होंने सपा के उम्मीदवारों को वोट नहीं दिया था और सपा से बगावत की थी. लेकिन सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ महीने पहले उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात हुई है. 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए माना जा रहा है कि पल्लवी पटेल इस बार अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए सपा को पूरा समर्थन दे सकती हैं.
सुभासपा के अन्य विधायकों पर भी संशय
बस्ती की महादेवा सीट से विधायक दूधराम और बेलथरा रोड से हंसूराम भी सुभासपा के विधायक हैं. पिछले चुनाव में उन्होंने अपनी पार्टी के साथ ही वोट किया था, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव और टिकट की चिंता को देखते हुए माना जा रहा है कि ये दोनों विधायक भी समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं. ऐसे में ये दोनों विधायक भी एनडीए के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं.
निर्दलीय और बागी विधायकों की बड़ी भूमिका
इनके अलावा कुछ ऐसे विधायक भी हैं जो पहले समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन अब उन्हें पार्टी से निकाला जा चुका है और अब वह निर्दलीय या स्वतंत्र विधायक के रूप में काम कर रहे हैं. इनमें पूजा पाल और राकेश चतुर्वेदी जैसे विधायकों के नाम शामिल हैं, जो फिलहाल भाजपा की तरफ नजर आ रहे हैं. कुल मिलाकर 10वीं सीट के लिए दोनों पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर है, और पूर्वांचल के ये विधायक इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
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