अखिलेश यादव का दावा- 'EC निष्पक्ष नहीं तो इस दौरान बनी सरकारें असंवैधानिक', बोले- लोकतंत्र को रौंदने की कोशिश

यूपी तक

• 05:18 PM • 23 Sep 2026

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने आयोग के फैसलों, SIR के दौरान वोट कटने और चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादलों पर सवाल उठाए.

Akhilesh Yadav

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि जिस दौर में चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा था, उस दौरान बनी सरकारें असंवैधानिक हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में दखल लोकतंत्र को रौंदने के बराबर है. प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को एक निष्पक्ष संस्था माना जाता है और उससे लोकतंत्र को मजबूत करने की उम्मीद की जाती है.

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उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की. अखिलेश ने कहा कि इससे यह सवाल खड़ा होता है कि चुनाव आयोग "किसकी ओर से" काम कर रहा था.

अखिलेश यादव ने कहा, "चुनाव आयोग बेनकाब हो गया है." उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताया. उन्होंने कहा, "यह हमारे लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. यह हमारे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है." अखिलेश ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और सवाल उठाया कि सत्ता में बने रहने के लिए ऐसी संस्था के साथ 'कौन खिलवाड़ कर रहा है.'

पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया, "अब आप क्या कल्पना कर सकते हैं? क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष रहा होगा? क्या वह पक्षपात रहित रहा होगा?" उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग के फैसलों पर संस्था के भीतर से ही सवाल उठाए जा रहे हैं तो यह उसके कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है, जबकि इस संस्था से सबसे पहली अपेक्षा निष्पक्षता की होती है. लोकसभा में तीसरे सबसे बड़े दल के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि इस घटनाक्रम का असर इस दौरान बनी सरकारों पर भी पड़ता है.

उन्होंने कहा, "इसका मतलब है कि इस अवधि के दौरान जो सरकारें बनी हैं, वे असंवैधानिक सरकारें हैं." अखिलेश ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को "रौंद दिया गया है."

'पहले जांच हो कि अब तक लिए गए फैसलों का क्या हुआ'

कथित अनियमितताओं को लेकर आगे की कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर अखिलेश यादव ने कहा, "पहला कदम यह होना चाहिए कि अब तक लिए गए फैसलों और बनी हुई सरकारों के साथ क्या हुआ, इसकी जांच की जाए."

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया, "2022 में उन्होंने हम समाजवादियों को हरवा दिया और अगर यह जारी रहा तो हो सकता है कि वे फिर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की तैयारी कर रहे हों." अखिलेश ने कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर पहले भी उनके द्वारा उठाई गई चिंताओं के संदर्भ में इन नए खुलासों को देखा जाना चाहिए.

SIR को लेकर भी अखिलेश ने लगाए आरोप

उन्होंने मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान कथित तौर पर एक व्यक्ति के हस्ताक्षर से 100 से ज्यादा वोट काटे जाने का आरोप लगाया. अखिलेश ने कहा कि नियमों के अनुसार इस तरह से पांच से ज्यादा वोट हटाने की अनुमति नहीं है. उन्होंने सवाल किया, "चुनाव आयोग ने क्या कार्रवाई की?"

अखिलेश ने यह भी दावा किया कि नंद लाल निषाद के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया, जबकि उनके दावे के अनुसार नंद लाल निषाद को हस्ताक्षर करना ही नहीं आता था. उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों और समाजवादी पार्टी के समर्थकों के वोटों को निशाना बनाया गया.

अखिलेश यादव ने कहा कि किसी मामले में कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया, "यह किसी की कठपुतली है और एक साजिश का हिस्सा है."

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की. अखिलेश ने आरोप लगाया कि आयोग के कामकाज से इस बात को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है कि क्या नागरिक अब भी उस पर भरोसा कर सकते हैं.

चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादले पर भी सवाल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव से जुड़े काम संभालने वाले अधिकारियों में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समूह का एक भी अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया.

उन्होंने सवाल किया, "इससे बड़ी साजिश क्या हो सकती है? आप पीठासीन अधिकारी किसे बनाएंगे? किन अधिकारियों को भेजेंगे? तबादले और पोस्टिंग किसी आरोप की वजह से हो रहे हैं या चुनाव की तैयारी चल रही है?"

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