अकबरपुर सीट पर क्या राजभर-कुर्मी वोटर करेंगे बड़ा उलट फेर, समझिए पूरा सियासी समीकरण

सुषमा पांडेय

23 Jul 2026 (अपडेटेड: 23 Jul 2026, 01:08 PM)

UP Kiska: अंबेडकरनगर की हाई-प्रोफाइल अकबरपुर विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव को लेकर सियासी मुकाबला तेज है. सपा विधायक राम अचल राजभर अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखना चाहते हैं. जबकि बीजेपी और बीएसपी जातीय समीकरण व स्थानीय मुद्दों के सहारे वापसी की तैयारी में हैं.

Akbarpur Election 2027

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Akbarpur Election 2027: अंबेडकरनगर जिले की सबसे प्रतिष्ठित और हाई-प्रोफाइल अकबरपुर विधानसभा सीट पर आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. जिला मुख्यालय होने के कारण यह सीट जिले की राजनीति और प्रशासन का मुख्य केंद्र है. पिछले तीन दशकों से इस सीट पर बीएसपी के पूर्व कद्दावर नेता और वर्तमान में समाजवादी पार्टी के विधायक राम अचल राजभर का राजनीतिक वर्चस्व कायम रहा है. 2022 में बीएसपी से सपा में आए राम अचल राजभर ने जीत दर्ज कर अपना किला बचाए रखा था. हालांकि 2027 में जहां सपा अपना कब्जा बरकरार रखना चाहती है. वहीं बीजेपी और बीएसपी दोनों कमबैक की पुरजोर कोशिश में हैं.

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अकबरपुर का चुनावी इतिहास और राम अचल राजभर का दबदबा

1993 से लेकर अब तक (केवल 2012 को छोड़कर) राम अचल राजभर इस सीट से विधायक बनते आए हैं. बीएसपी सरकार में वे कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों में मंत्री रहे.

2012 का चुनाव: 2012 में राम अचल राजभर ने खुद चुनाव न लड़कर अपने बेटे संजय कुमार राजभर को बीएसपी से लड़ाया था, जिन्हें सपा के राममूर्ति वर्मा ने हराया था.

2017 व 2022 के नतीजे: 2017 में राम अचल राजभर ने बीएसपी के सिंबल पर जीत दर्ज की. 2021 में बीएसपी से निष्कासन के बाद वे सपा में शामिल हुए और 2022 के चुनाव में सपा के टिकट पर बीजेपी के धर्मराज निषाद को करीब 12,000 वोटों से हराकर अपनी व्यक्तिगत पकड़ साबित की.

2027 के चुनाव को लेकर प्रमुख दलों के दावे

सपा विधायक राम अचल राजभर का कहना है कि 1995 में जिले के गठन से लेकर अब तक जिले और अकबरपुर के चौमुखी विकास, बिजली सुधार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में उनका अहम योगदान रहा है. वे सपा के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और अपने विकास कार्यों के दम पर फिर जीत का दावा कर रहे हैं.

बीजेपी का मानना है कि डबल इंजन सरकार की योजनाओं और सुभासपा (ओपी राजभर) व निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों के साथ आने से राजभर, निषाद और पिछड़ा वर्ग का वोट बीजेपी के पक्ष में एकजुट होगा. पार्टी ने हाल ही में पिछड़े वर्ग से जिलाध्यक्ष बनाकर सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है.

बीएसपी का दावा है कि पिछला चुनाव सपा-बीजेपी के भ्रामक प्रचार का नतीजा था. पार्टी अपनी 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की विचारधारा और अपने पुराने मजबूत कैडर वोट बैंक के सहारे वापसी की उम्मीद लगाए है.

अकबरपुर सीट का जातीय गणित 

अकबरपुर सीट पर शुरू से ही जातिगत समीकरणों की अहम भूमिका रही है.

अनुसूचित जाति (SC): लगभग 81,000 वोटर

राजभर बिरादरी: लगभग 44,248 वोटर

कुर्मी बिरादरी: लगभग 37,000 वोटर

मुस्लिम मतदाता: लगभग 35,000 वोटर

यादव मतदाता: लगभग 20,000 वोटर

ब्राह्मण व निषाद: लगभग 18,000 - 18,000 वोटर

वैश्य: लगभग 16,000 वोटर 

ठाकुर: लगभग 10,000 वोटर

विश्वकर्मा व नाई: लगभग 8,000 - 8,000 वोटर 

पाल: 6,000 और चौहान: 5,000

स्थानीय मुद्दे और पत्रकारों का विश्लेषण

शहर में लगातार लगने वाला ट्रैफिक जाम, छुट्टा पशुओं की समस्या, बेरोजगारी और महंगाई स्थानीय स्तर पर प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं. स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि भले ही बीजेपी क्षेत्र में नए विकास कार्य और बैकवर्ड कार्ड खेलकर पकड़ मजबूत करने में लगी है. लेकिन वर्तमान में सपा की स्थिति और राम अचल राजभर का व्यक्तिगत जनाधार काफी मजबूत नजर आ रहा है. आने वाले समय में प्रत्याशी घोषित होने और ओपी राजभर के प्रभाव के बाद ही मुकाबला और स्पष्ट हो सकेगा.

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