UP News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे आलम बदी का लंबी बीमारी के बाद देर रात निधन हो गया. उनके निधन की जानकारी समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया के जरिए दी. पार्टी ने अपने शोक संदेश में उनके निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की. आलम बदी के निधन से पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है.
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करीब 90 वर्ष की उम्र तक सक्रिय राजनीति में बने रहे आलम बदी अपनी सादगी, ईमानदार छवि और जनता के बीच सहज उपलब्ध रहने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में पहचाने जाते थे. कुछ महीने पहले बजट सत्र के दौरान वह स्कूटर की पिछली सीट पर बैठकर उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे थे. उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही थी और लोगों ने उनकी सादगी की सराहना की थी.
1996 में पहली बार बने विधायक, पांच बार जीता चुनाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, आलम बदी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ के विन्दवल गांव में हुआ था. उन्होंने इंटरमीडिएट के साथ इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था और पेशे से इंजीनियर थे.
उन्होंने साल 1996 में पहली बार निजामाबाद विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया. इसके बाद 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी इसी सीट से विधायक चुने गए. वर्ष 2007 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए लगातार तीन चुनाव जीतकर अपना जनाधार कायम रखा.
इंजीनियरिंग छोड़ राजनीति को बनाया जनसेवा का माध्यम
मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले आलम बदी ने नौकरी छोड़ राजनीति को अपना जीवन समर्पित किया. उन्होंने हमेशा सादगी को अपनी पहचान बनाए रखा. उनके खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक मुकदमा नहीं था और उन्हें कम संपत्ति वाले विधायकों में गिना जाता था. क्षेत्र में विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए वह अक्सर जमीन पर बैठकर अधिकारियों से सीधे जवाब मांगते थे.
राष्ट्रीय एकता और जनसेवा को दी प्राथमिकता
विधानसभा की वेबसाइट के मुताबिक आलम बदी की विशेष रुचि राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने, गरीब वअसहाय लोगों की मदद और पठन-पाठन में थी. वह सरकारी आश्वासन समिति के सदस्य भी रहे. इसके अलावा याचिका समिति और नियम समिति से भी जुड़े रहे.
वह कौमी एकता मंच, आजमगढ़ के संस्थापक एवं संयोजक रहे, जबकि मुस्लिम रिलीफ कमेटी, आजमगढ़ के संस्थापक सदस्य भी थे. विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार विभिन्न आंदोलनों के दौरान वह धारा 153(ए) और एनएसए के तहत गोरखपुर तथा लखनऊ जेल में भी निरुद्ध रहे थे.
सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों को लगातार उठाया
निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को आलम बदी लगातार विधानसभा और जनता के बीच उठाते रहे. क्षेत्र के लोग उन्हें ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में याद करते हैं, जो बिना तामझाम आम लोगों के बीच पहुंचते थे और उनकी समस्याएं सुनते थे. उनकी साफ-सुथरी राजनीतिक छवि के कारण उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच भी सम्मान प्राप्त था.
आलम बदी के निधन को समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि आजमगढ़ और पूर्वांचल की राजनीति के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है. उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है.
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