उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस वक्त कई बड़े बदलावों की चर्चा है. यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करता है. पहली खबर बीजेपी के भीतर चल रहे बताए जा रहे अलग-अलग सर्वे और उनके आंकड़ों को लेकर है, जिनमें पार्टी की स्थिति और विधायकों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी की चर्चा है. दूसरी खबर उन बड़े चेहरों की है, जिनके बीजेपी छोड़कर विपक्षी दलों में जाने की अटकलें चल रही हैं. तीसरी खबर राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी के उस बयान से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने अखिलेश यादव को लेकर कहा कि अगर वह कुछ बातें सामने रख देंगे तो अखिलेश उत्तर प्रदेश में कहीं खड़े होने लायक नहीं बचेंगे.
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बीजेपी के भीतर सर्वे की चर्चा, कितनी सीटों का अनुमान?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी कुछ समय बाकी है, लेकिन अलग-अलग स्तर पर सर्वे और फीडबैक की चर्चा शुरू हो गई है. सरकारें अपने स्तर पर लोगों का मूड समझने की कोशिश करती हैं. सरकार की अपनी इंटेलिजेंस व्यवस्था के अलावा अलग-अलग मानकों पर सरकार के कामकाज को भी परखा जाता है. चुनाव नजदीक आने के साथ अलग-अलग एजेंसियों और पार्टी स्तर पर सर्वे कराए जाने की चर्चा है. हालांकि, सरकार के भीतर से ऐसा कोई आधिकारिक सर्वे सामने नहीं आया है, जो साफ तौर पर चुनाव की मौजूदा स्थिति बता सके.
सरकार के भीतर 170-180 सीटों की चर्चा
सरकार और पार्टी के भीतर एक अनौपचारिक आंकड़े की चर्चा है. इसमें कहा जा रहा है कि सबसे खराब स्थिति में भी बीजेपी करीब 170 से 180 सीटों के आसपास रह सकती है. चर्चा यह भी है कि मौजूदा स्थिति में बीजेपी की सीटें 160, 170 या 175 के आसपास हो सकती हैं, लेकिन चुनाव आने तक इसमें सुधार की उम्मीद जताई जा रही है.
एक अन्य सर्वे की भी चर्चा है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि बीजेपी से जुड़ी एक एजेंसी ने अगस्त महीने में सर्वे किया. इसमें आंदोलन, यूजीसी, महंगाई, एथेनॉल और आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर लोगों के बीच नकारात्मक माहौल की बात सामने आने का दावा किया गया है.
128 विधायकों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी की चर्चा
एक और आंकड़े की चर्चा है कि बीजेपी के 128 विधायकों के खिलाफ जबरदस्त एंटी इनकंबेंसी है. कहा जा रहा है कि अगर इन विधायकों के टिकट नहीं काटे गए तो पार्टी को नुकसान हो सकता है. हालांकि, 128 विधायकों वाला आंकड़ा कहां से आया और किस एजेंसी ने दिया, इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है. इसके बावजूद संगठन के स्तर पर यह माना जा रहा है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण एंटी इनकंबेंसी है. खासकर दो बार चुने जा चुके विधायकों के खिलाफ यह भावना ज्यादा हो सकती है.
सीएम योगी के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी नहीं होने का दावा
इन चर्चित फीडबैक में एक और बात सामने आने की बात कही गई है. इसके मुताबिक बीजेपी या सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी हो सकती है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी नहीं होने की बात कही जा रही है. ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी बड़े स्तर पर टिकटों में बदलाव कर सकती है. करीब 30 फीसदी टिकट बदले जाने की चर्चा है. ऐसा हुआ तो करीब 75 से 80 उम्मीदवारों के टिकट बदले जा सकते हैं. हारी हुई सीटों पर भी चेहरे बदले जाने की चर्चा है.
बीजेपी छोड़ने वाले हैं बड़े चेहरे? कौशल किशोर से रीता बहुगुणा जोशी तक चर्चा
दूसरी बड़ी खबर बीजेपी के उन चेहरों को लेकर है, जिनके पार्टी छोड़ने की चर्चा चल रही है. समाजवादी पार्टी ने बड़े प्रभाव वाले और बीजेपी के भीतर खुद को असहज महसूस कर रहे नेताओं के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं. इन चर्चाओं में सबसे पहला नाम पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर का बताया गया है.
कौशल किशोर के पाला बदलने की चर्चा
कौशल किशोर दो बार सांसद रह चुके हैं और मोदी सरकार में मंत्री भी रहे हैं. उन्हें पासी बिरादरी का बड़ा चेहरा बताया जाता है. हाल के समय में उनके बीजेपी के भीतर बागी तेवरों की चर्चा रही है. हालिया लखनऊ में उन्होंने स्वाभिमान रैली की और सरकार को लेकर कई सवाल उठाए. कौशल किशोर ने पहले कोरोना के समय भी सरकार के खिलाफ बातें कही थीं. अब 2027 के चुनाव से पहले उनके दूसरी पार्टी में जाने की चर्चा तेज है.
उनके कांग्रेस में जाने की चर्चा है. साथ ही समाजवादी पार्टी की ओर से भी उन्हें खुला ऑफर होने की बात कही गई है. हालांकि, उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. यूपी Tak के साथ बातचीत में उन्होंने अपने बेटे के लिए टिकट की बात कही थी और कहा था कि अगर टिकट नहीं मिला तो वह आगे का फैसला करेंगे.
रीता बहुगुणा जोशी का नाम भी चर्चा में
दूसरा नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता रीता बहुगुणा जोशी का है. उनके बेटे मयंक जोशी के समाजवादी पार्टी में जाने के बाद से बीजेपी में उनकी सक्रियता पहले जैसी नहीं रही है. अब कांग्रेस के भीतर चर्चा की बात कही जा रही है कि रीता बहुगुणा जोशी दोबारा कांग्रेस में लौट सकती हैं.
हालांकि, इस बारे में बहुत कुछ इस बात पर निर्भर बताया गया है कि मयंक जोशी किस पार्टी से और कहां से चुनाव लड़ते हैं. रीता बहुगुणा जोशी ने सार्वजनिक तौर पर बीजेपी के खिलाफ कुछ नहीं कहा है और जब भी बोलती हैं, बीजेपी के पक्ष में ही बोलती हैं.
अदिति सिंह के नाम की भी चर्चा
तीसरा नाम अदिति सिंह का बताया गया है. हालांकि, वह बीजेपी छोड़ेंगी, इस बात पर अभी संशय है. अदिति सिंह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की करीबी बताई जाती हैं. वह कांग्रेस से विधायक बनी थीं और बाद में विधायक रहते बीजेपी में शामिल हो गई थीं. ऐसे में उनके दोबारा कांग्रेस में जाने की चर्चा को फिलहाल मुश्किल बताया गया है. इन सभी नेताओं को लेकर नजर बनी हुई है और आने वाले समय में साफ होगा कि इनमें से कौन किस पार्टी का रुख करता है.
जयंत चौधरी का अखिलेश यादव पर बड़ा बयान, बोले- मुंह खोल दिया तो...
तीसरी बड़ी खबर राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी के बयान से जुड़ी है. पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे अखिलेश यादव और सीटों को लेकर सवाल पूछा गया. अखिलेश यादव के उस बयान का भी जिक्र हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि पहले आरएलडी को जितनी सीटें दी गई थीं, अब बीजेपी के साथ होने के कारण उसे उससे ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए.इस पर जयंत चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव अपनी बातें कह रहे हैं, लेकिन अगर वह कुछ बातें सामने रख देंगे तो अखिलेश उत्तर प्रदेश में कहीं खड़े होने लायक नहीं बचेंगे.
जयंत बोले- सीटों से तय नहीं होगा चौधरी चरण सिंह का सम्मान
सीटों को लेकर जयंत चौधरी ने कहा कि अगर उन्हें एनडीए में एक भी सीट नहीं मिलती है तो भी गठबंधन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सीट मिलती है या नहीं मिलती, यह अलग बात है. उनके मुताबिक, चौधरी चरण सिंह लोगों के दिलों में हैं और सीटों की संख्या से उनका सम्मान तय नहीं होगा. जयंत चौधरी ने कहा कि अगर राष्ट्रीय लोकदल को एक भी सीट नहीं मिलती है, तब भी चौधरी चरण सिंह का सम्मान कम नहीं होगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव के साथ गठबंधन के समय सभी बातें उन्हें नहीं बताई जाती थीं और वह अपनी गंभीरता के कारण कुछ बातें सामने नहीं रख रहे हैं. जयंत चौधरी के इसी बयान को लेकर यूपी की राजनीति में चर्चा तेज है.
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