क्या INDIA गठबंधन से टिकट ले पाएंगे अवतार सिंह भड़ाना? मेरठ दक्षिण की सीट का समझे समीकरण

रजत सिंह

• 07:02 PM • 12 Sep 2026

मेरठ दक्षिण सीट पर 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. बीजेपी के सोमेंद्र तोमर की हैट्रिक दांव पर है. वहीं सपा-कांग्रेस में टिकट की खींचतान, अवतार सिंह भड़ाना की एंट्री और मुस्लिम-दलित वोटों का बिखराव मुकाबले को दिलचस्प बना रहा है.

Meerut South constituency

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट हमेशा से चुनावी दांव-पेच के लिए जानी जाती रही है. 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही इस सीट पर सियासी हलचल तेज हो गई है. योगी सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सोमेंद्र तोमर क्या लगातार तीसरी बार बीजेपी का चेहरा बनेंगे या पार्टी किसी नए गुर्जर चेहरे पर दांव खेलेगी?

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दूसरी ओर इंडिया गठबंधन यानी सपा-कांग्रेस में टिकट को लेकर मची खींचातान और कद्दावर नेता अवतार सिंह भड़ाना की एंट्री ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है. बहुजन समाज पार्टी, आजाद समाज पार्टी और एआईएमआईएम की मौजूदगी के बीच क्या इस बार भी मुस्लिम-दलित वोटों का बिखराव बीजेपी की राह आसान करेगा?

खेल बिगाड़ने का इतिहास और बीजेपी की हैट्रिक

मेरठ दक्षिण सीट का इतिहास रहा है कि जब भी विपक्षी दल आपस में उलझे, उसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला. 2012 में परिसीमन के बाद वजूद में आई इस सीट का चुनावी रिकॉर्ड कुछ ऐसा रहा है.

2012: सपा के आदिल चौधरी ने बीएसपी के राशिद अखलाक का वोट काटा, जिससे बीजेपी के रवींद्र सिंह भड़ाना पहली बार विधायक चुने गए.

2017: बीएसपी के हाजी याकूब कुरैशी का खेल कांग्रेस ने बिगाड़ा और बीजेपी के सोमेंद्र सिंह तोमर चुनाव जीत गए.

2022: बीएसपी ने सपा के आदिल चौधरी के वोट बैंक में सेंध लगाई और सोमेंद्र सिंह तोमर बेहद कम मार्जिन से जीतकर दोबारा विधानसभा पहुंचे.

इस सीट पर मुस्लिम और दलित वोटरों की संख्या सबसे अधिक होने के बावजूद लगातार तीन बार से गुर्जर समुदाय का उम्मीदवार ही चुनाव जीतता आ रहा है.

बीजेपी में सोमेंद्र तोमर का पलड़ा भारी

दो बार के विधायक और योगी सरकार में मंत्री सोमेंद्र सिंह तोमर की दावेदारी गुर्जर वोट बैंक पर पकड़ के कारण सबसे मजबूत मानी जा रही हैत हालांकि 2022 में कम मार्जिन से जीत मिलने के बाद पार्टी के भीतर नए चेहरों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. बीजेपी से टिकट की रेस में विनीत चपराना (भूमि गांव), पूर्व ब्लॉक प्रमुख पप्पू प्रमुख, राजेंद्र लिसाड़ी और डॉक्टर अभिमन्यु जैसे कई गुर्जर नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि बीजेपी सोमेंद्र तोमर पर ही भरोसा जताती है या किसी नए चेहरे को मौका देती है.

इंडिया गठबंधन में घमासान

इंडिया गठबंधन (सपा-कांग्रेस) में इस सीट को लेकर सबसे ज्यादा खचपच देखने को मिल रही है.

कांग्रेस और अवतार सिंह भड़ाना: 2009 में सांसद रह चुके और फरीदाबाद से लेकर खतौली तक चुनावी करिश्मा दिखा चुके अवतार सिंह भड़ाना की सक्रियता ने मेरठ दक्षिण के सियासी पारे को बढ़ा दिया है. वह कांग्रेस के सिंबल पर दावेदारी ठोक रहे हैं। कांग्रेस से हेमंत प्रधान भी रेस में हैं.

समाजवादी पार्टी की रणनीति: सपा ने हाल ही में गुर्जर समुदाय के नेता को जिलाध्यक्ष बनाकर समीकरण साधने की कोशिश की है. आदिल चौधरी (जो पिछले चुनाव में मामूली अंतर से हारे थे) के अलावा सपा से करीब आधा दर्जन गुर्जर नेता टिकट मांग रहे हैं. चर्चा यह भी है कि सपा अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के तहत किसी दलित चेहरे को भी मैदान में उतार सकती है.

बसपा, आजाद समाज पार्टी और ओवैसी फैक्टर

मेरठ दक्षिण में तीसरे और चौथे कोण की भूमिका हमेशा निर्णायक होती है.

बीएसपी (BSP): बीएसपी अपने पुराने जनाधार को समेटने में लगी है. चर्चा है कि बीएसपी पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के परिवार से किसी सदस्य को या कुंवर दिलशाद पर दोबारा दांव लगा सकती है.

आजाद समाज पार्टी (ASP): चंद्रशेखर आजाद की पार्टी इस बार मजबूती से मैदान में उतरने की तैयारी में है. अगर सपा किसी कद्दावर मुस्लिम या दलित नेता को टिकट नहीं देती है तो कई चेहरे आजाद समाज पार्टी का रुख कर सकते हैं.

एआईएमआईएम (AIMIM): असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाकर मुख्य दलों के समीकरण बिगाड़ने की ताकत रखती है.

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