मायावती का बड़ा फैसला, दोनों भतीजों को BSP में नहीं मिलेगा कोई पद, ईशान आनंद को लेकर भी साफ किया रुख!

आशुतोष चौबे

• 04:17 PM • 12 Sep 2026

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने 12 सितंबर को जारी अपने बयान में पार्टी में बदलाव लेकर बड़ा फैसला लिया है. उनके बयान का सबसे अहम हिस्सा उनके छोटे भाई और BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के परिवार से जुड़ा है.

BSP Family Politics

Mayawati On BSP Family Politics (Photo AI Generated)

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Mayawati On Ishan Anand: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने 12 सितंबर को जारी अपने बयान में पार्टी में बदलाव लेकर बड़ा फैसला लिया है. उनके बयान का सबसे अहम हिस्सा उनके छोटे भाई और BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के परिवार से जुड़ा है. मायावती ने साफ कहा है कि अब आनंद कुमार के किसी भी बेटे को BSP में किसी छोटे-बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही आनंद कुमार के बेटे ईशान आनंद को पार्टी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई थी. वहीं, आकाश आनंद के पार्टी से दूरी बनाने के बाद BSP में परिवार की भूमिका को लेकर भी लगातार चर्चा चल रही थी.

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ईशान आनंद को कुछ दिन पहले मिली थी बड़ी जिम्मेदारी

7 सितंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया बायो में बड़ा बदलाव किया था. उन्होंने पहले ‘नेशनल कन्वीनर’ का पद हटाकर ‘बसपा कार्यकर्ता’ लिखा था और बाद में इसे बदलकर सिर्फ ‘बसपा समर्थक’ कर दिया. इसी दौरान मायावती ने संगठन में फेरबदल करते हुए आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी दी थी. ईशान को करीब 15 राज्यों में पार्टी के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इस जिम्मेदारी के तहत उन्हें संगठन की गतिविधियों पर नजर रखनी थी और संबंधित राज्यों की समीक्षा करनी थी.

ईशान को मिली थी ये जिम्मेदारी

ईशान आनंद को मिली संगठनात्मक जिम्मेदारी के तहत उन्हें अपने काम और राज्यों की समीक्षा से जुड़ी रिपोर्ट अपने पिता आनंद कुमार को देनी थी. आनंद कुमार BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. आकाश आनंद के पार्टी से दूरी बनाने और ईशान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने के बाद BSP में परिवार की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे. अब मायावती के ताजा बयान ने इसी पूरे घटनाक्रम को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है. हालांकि मायावती ने अपने बयान में किसी व्यक्ति का नाम लेकर अलग से कार्रवाई की घोषणा नहीं की, लेकिन आनंद कुमार के बेटों को लेकर उनका फैसला साफ तौर पर सामने आया है.

मायावती बोलीं- परिवार के लोगों को राजनीतिक लाभ देना सही नहीं

मायावती ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने अपने भाई-बहनों और उनके परिवार के युवा सदस्यों को पार्टी के काम तक सीमित रखा है. उन्होंने लिखा, 'अपने किसी भी सगे भाई-बहन व उनके परिवार के युवा सदस्यों, तथा नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को भी मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह मैंने भी, उन्हें पार्टी के कार्यों तक सीमित करके उन्हें सांसदी, विधायकी, मंत्री पद व अन्य किसी भी राजनैतिक लाभ आदि के पदों से हमेशा दूर रखा है.' मायावती ने कहा कि उनका मकसद पार्टी और मिशन को परिवारवाद से दूर रखना है और किसी रिश्तेदार को राजनीतिक लाभ देना पार्टी के हित में नहीं होगा.

दोनों बेटो को लेकर मायावती ने क्या कहा?

मायावती ने आगे अपने छोटे भाई आनंद कुमार का जिक्र करते हुए कहा कि अविवाहित होने के कारण उन्हें अपनी देखभाल के लिए अपने भाई को साथ रखना पड़ा. उन्होंने लिखा कि आनंद कुमार उनकी देखरेख में लंबे समय से पार्टी की अहम जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. लेकिन अब उनके परिवार के लोगों को इसका लाभ मिलना पार्टी और मूवमेंट के हित में सही नहीं होगा. इसी क्रम में मायावती ने अपना फैसला स्पष्ट करते हुए कहा, 'अब इनके ख़ासकर किसी भी बेटे को बी.एस.पी. में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जायेगा.' इस बयान का सीधा असर ईशान आनंद को लेकर हुई हालिया राजनीतिक चर्चा पर पड़ता दिख रहा है.

बेटी दीपिका को लेकर मायावती ने बताया अलग रास्ता

मायावती ने अपने बयान में आनंद कुमार के परिवार के लिए एक अलग व्यवस्था का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में आनंद कुमार को उनकी मदद के लिए किसी अन्य सदस्य की जरूरत पड़ती है तो वह अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं. मायावती के मुताबिक दीपिका इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही हैं. उन्होंने कहा कि आगे चलकर उनकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखते हुए पार्टी में जरूरत के मुताबिक उन्हें जिम्मेदारी दी जा सकती है. साथ ही मायावती ने स्पष्ट किया कि आनंद कुमार अपने दोनों बेटों या भविष्य में उनके बच्चों को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगे.

मायावती ने कांशीराम का किया जिक्र

BSP प्रमुख ने अपने फैसले को पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की विचारधारा से जोड़ते हुए कहा कि वह परिवारवाद के खिलाफ उसी तरह कायम हैं. उन्होंने लिखा कि अगर वह लड़की नहीं होतीं तो शायद अपने भाई-बहनों में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखतीं. मायावती ने कहा कि सुरक्षा और सम्मान से जुड़े कारणों की वजह से उन्हें अपने सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि उनके भाई के बच्चों के बड़े और शादीशुदा होने के बाद उन्हें भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वह किसी मोह में पड़कर पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगी.

परिवारवाद पर क्या बोलीं मायावती?

मायावती ने पार्टी संगठन और भविष्य में सरकार बनने की स्थिति को लेकर भी अपना नियम स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को मौका दिया जा सकता है, लेकिन उसकी आड़ में उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को राजनीतिक लाभ नहीं दिया जाएगा. उनके मुताबिक इससे BSP परिवारवाद से मुक्त रहेगी और सर्वसमाज के ज्यादा से ज्यादा लोग सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जुड़ सकेंगे. इसके साथ ही मायावती ने पार्टी से निकाले गए नेताओं की वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित लोगों को वापस लेने की खबर 'पूरी तरह से गलत एवं मिथ्या प्रचार' है और इसे उन्होंने 'फेक न्यूज़' बताया.