Mood kya hai Bulandshahar: बुलंदशहर जिला उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद खास स्थान रखता है. 2017 और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने यहां की सातों की सातों सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया था. हालांकि 2027 के आम चुनाव से ठीक पहले जिले की सियासी हवा किस तरफ बह रही है? क्या विकास के वादे पर वोट पड़ेंगे या फिर हर बार की तरह जातीय और धार्मिक समीकरण ही हावी रहेंगे? 'यूपी TAak' के खास कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार मुकुल शर्मा के साथ बुलंदशहर के प्रमुख पत्रकारों की टीम ने जिले की सातों विधानसभा सीटों-शिकारपुर, अनूपशहर, स्याना, बुलंदशहर सदर, सिकंदराबाद, डिबाई और खुरजा के जमीनी हालातों और सियासी समीकरणों पर बेबाक चर्चा की.
ADVERTISEMENT
विकास पर भारी 'जाति और धर्म' की चाशनी
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि दिल्ली और जेवर एयरपोर्ट के नजदीक होने के बावजूद बुलंदशहर विकास के मामले में आज भी काफी पीछे है. चुनाव आते ही विकास के मुद्दे गौण हो जाते हैं और राजनीतिक दल 'जाति और धर्म' के समीकरण बैठाकर अपनी चुनावी नैया पार लगाते हैं. अखिलेश यादव सरकार के समय बने इंफ्रास्ट्रक्चर हो या योगी सरकार में मिला मेडिकल कॉलेज और एक्सप्रेसवे-चुनाव के समय मतदाता अपनी बिरादरी और धार्मिक लामबंदी को प्राथमिकता देता रहा है.
सातों विधानसभा सीटों का पूरा सियासी गणित
शिकारपुर विधानसभा
मतदाता व समीकरण: लगभग 3 लाख मतदाता. यहां जाट और ब्राह्मण मतदाता सबसे निर्णायक भूमिका में हैं. 2017 और 2022 में बीजेपी के अनिल शर्मा ने यहां से जीत दर्ज की, जबकि 2012 में सपा के मुकेश पंडित जीते थे. मौजूदा विधायक के अस्वस्थ होने के कारण टिकट बदलने की संभावना है. माना जा रहा है कि बीजेपी या सपा में से जो भी जाट या ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाएगा, पलड़ा उसी का भारी रहेगा.
अनूपशहर विधानसभा
मतदाता व समीकरण: लगभग 5 लाख मतदाता और 120 गांव। यहां लोध, मुस्लिम, जाट और ब्राह्मण लगभग बराबर की संख्या में हैं. लेकिन यह सीट अमूमन जाट और ब्राह्मण उम्मीदवारों के ही पास रही है. बीजेपी से वर्तमान विधायक संजय शर्मा, जयप्रकाश चौधरी, पूर्व विधायक गजेंद्र सिंह और प्रशांत वशिष्ठ. सपा से पूर्व विधायक होशियार सिंह मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं.
स्याना विधानसभा
मतदाता व समीकरण: करीब 4 लाख मतदाता. लोध बिरादरी यहां सबसे बड़ा वोट बैंक है, जिसके बाद मुस्लिम मतदाताओं की संख्या आती है.
राजनीतिक स्थिति: बीजेपी के देवेंद्र सिंह लोधी यहां से विधायक हैं. पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह के समय से ही लोध मतदाता बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक रहा है. हालांकि इस बार लोध बहुल क्षेत्रों में नाराजगी और सपा द्वारा लोध प्रत्याशी उतारने की चर्चाओं से मुकाबला दिलचस्प हो सकता है.
बुलंदशहर सदर विधानसभा
मतदाता व समीकरण: सभी जातियों की मिली-जुली आबादी है जिसमें जाट बिरादरी की स्थिति काफी मजबूत मानी जाती है.
दावेदारी की रेस: बीजेपी से वर्तमान विधायक प्रदीप चौधरी के अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष हिमांशु मित्तल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अनपुल तेतिया दावेदारी कर रहे हैं. वहीं आरएलडी/गठबंधन के पाले से पूर्व विधायक हाजी अलीम के भाई हाजी यूनुस और कृष्णपाल सिंह की बेटी की भी दावेदारी की चर्चा है.
सिकंदराबाद विधानसभा
मतदाता व समीकरण: करीब 3.80 लाख मतदाता। यह क्षेत्र मुख्य रूप से ठाकुर बाहुल्य माना जाता है जहां गुर्जर, मुस्लिम और यादव मतदाताओं का भी अच्छा खासा प्रभाव है.
2027 का माहौल: बीजेपी के लक्ष्मीराज सिंह वर्तमान में विधायक हैं. विपक्ष से लालू प्रसाद यादव के समधी जितेंद्र यादव के पुत्र राहुल यादव लगातार सक्रिय हैं. ठाकुर बाहुल्य होने के कारण यहां बीजेपी का पलड़ा पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है.
डिबाई विधानसभा
मतदाता व समीकरण: स्याना की तरह डिबाई भी लोध बाहुल्य सीट मानी जाती है.
इतिहास व स्थिति: यहां से पूर्व में कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह (राजू भैया) और गुड्डू पंडित भी विधायक रह चुके हैं. वर्तमान में बीजेपी के चंद्रपाल सिंह विधायक हैं. 2027 के लिए पूर्व विधायक अनीता लोधी, राजवीर सिंह के छोटे पुत्र और क्षेत्रीय ब्लॉक प्रमुख अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं.
खुरजा (आरक्षित) विधानसभा
मतदाता व समीकरण: यह आरक्षित सीट अनुसूचित जाति (SC) बाहुल्य है. इसके साथ ही मुस्लिम, सैनी, प्रजापति और गुर्जर मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं.
वर्तमान स्थिति: बीजेपी की मीनाक्षी सिंह यहां से विधायक हैं. ग्रेटर नोएडा से सटे होने के कारण गुर्जर बाहुल्य पॉकेट्स और दलित-मुस्लिम गठजोड़ यहां चुनावी नतीजों को प्रभावित करता है.
2027 के चुनाव को प्रभावित करने वाले 4 बड़े 'एक्स-फैक्टर'
पत्रकारों के अनुसार, धरातल पर विधायकों और स्थानीय नेताओं से ज्यादा अफसरों की चल रही है. शिकायतों के फर्जी निस्तारण और अफसरशाही के हावी होने से आम जनता और कैडर कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है.
युवाओं में रोजगार को लेकर भारी आक्रोश है. बार-बार पेपर लीक होने और परीक्षाओं के रद्द होने से युवा सरकार के रवैये से नाराज हैं जिसका असर चुनाव पर पड़ सकता है. अयोध्या राम मंदिर के चंदे में हुए कथित घपले/चोरी और उस पर बड़े पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से श्रद्धालुओं और आम जनता के एक वर्ग में गुस्सा है.
अगर समाजवादी पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों (PDA) के साथ लोध या जाट प्रत्याशियों का सही संयोजन बनाती है तो कई सीटों पर बीजेपी की राह कठिन हो सकती है.
ADVERTISEMENT











