2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या (फैजाबाद) सीट पर भारतीय जनता पार्टी को मिली हार देश भर में चर्चा का विषय बनी थी. फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद सांसद चुने गए और उनके सांसद बनने के बाद अयोध्या जिले की मिल्कीपुर विधानसभा (सुरक्षित) सीट खाली हो गई. मिल्कीपुर उपचुनाव में जब अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद मैदान में उतरे तो बीजेपी के नए चेहरे चंद्रभानु पासवान ने उन्हें हराकर कमल खिला दिया. अब नजरें 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर टिक गई हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी अपने मौजूदा विधायक चंद्रभानु पासवान पर दांव बरकरार रखेगी या पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा बाजी मारेंगे? वहीं दूसरी तरफ क्या सपा सांसद अवधेश प्रसाद एक बार फिर अपने बेटे अजीत प्रसाद के लिए टिकट पक्का करा पाएंगे? 'दावेदार' के इस अंक में समझिए मिल्कीपुर सीट का पूरा सियासी समीकरण.
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सिटिंग MLA और पूर्व विधायक में टिकट की रेस
मिल्कीपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी के अंदर दावेदारी का मुकाबला काफी दिलचस्प है.
चंद्रभानु पासवान (मौजूदा विधायक): उपचुनाव जीतकर विधायक बने चंद्रभानु पासवान की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है. उन्होंने तब जीत दर्ज की जब फैजाबाद में अवधेश प्रसाद का सियासी कद अपने चरम पर था. चंद्रभानु पासवान पासी समुदाय से आते हैं (जिसका इस सीट पर अच्छा-खासा प्रभाव है) और उनकी छवि एक सौम्य स्वभाव वाले व्यवसायी की है.
गोरखनाथ बाबा (पूर्व विधायक): 2017 में अवधेश प्रसाद को हराने वाले गोरखनाथ बाबा भी टिकट के प्रबल दावेदार हैं. 2022 में हारने के बाद उपचुनाव में उनका टिकट कट गया था जिससे वे नाराज थे. लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद उन्हें मनाया गया. उनकी छवि एक दबंग नेता की है और क्षेत्र में उनका अपना जनाधार है.
अन्य दावेदार: बीजेपी से रामू प्रियदर्शी भी लंबे समय से टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं. इनके अलावा राममोहन भारती और बबलू पासी जैसे दूसरे कतार के नेता भी दावेदारी ठोक रहे हैं.
अजीत प्रसाद की दावेदारी मजबूत, पर छवि को लेकर सवाल
सपा की ओर से मिल्कीपुर सीट पर सांसद अवधेश प्रसाद का सीधा असर दिखता है.
अजीत प्रसाद: सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद उपचुनाव में हार के बावजूद 2027 के लिए सबसे आगे चल रहे हैं. अवधेश प्रसाद का सपा में बड़ा कद हैजिससे माना जा रहा है कि वे अपने बेटे के लिए दोबारा टिकट हासिल करने में सफल हो सकते हैं.
चुनौती: स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, अजीत प्रसाद की छवि अपने पिता अवधेश प्रसाद जैसी सर्वस्वीकार्य नहीं मानी जाती. 2027 में जब सपा एक-एक सीट के लिए जोर लगाएगी तो क्या अखिलेश यादव दोबारा अजीत प्रसाद पर ही दांव लगाएंगे, यह देखना बाकी होगा.
बसपा और आजाद समाज पार्टी का रुख
मिल्कीपुर सुरक्षित सीट होने के नाते बीएसपी और आजाद समाज पार्टी (ASP) के लिए भी काफी अहम है. बहुजन समाज पार्टी की ओर से रामगोपाल कोरी और अशोक कुमार कोरी के नाम मिल्कीपुर से सबसे प्रमुखता से उभरे हैं. पिछले चुनाव में प्रत्याशी उतारने वाली आजाद समाज पार्टी इस बार क्या रुख अपनाती है और किसी गठबंधन का हिस्सा बनती है या अकेले लड़ती है, इस पर भी सबकी नजर रहेगी.
मिल्कीपुर विधानसभा चुनाव 2027 में एक हाई-प्रोफाइल जंग बनने जा रही है. बीजेपी के सामने सबसे बड़ा धर्मसंकट अपने शांत छवि वाले सिटिंग विधायक चंद्रभानु पासवान और आक्रामक छवि वाले पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा के बीच चयन का है. वहीं सपा के सामने सवाल यह है कि क्या अवधेश प्रसाद का प्रभाव उनके बेटे को एक बार फिर चुनावी समर में उतार पाएगा.
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